कोई बतलाये हमको, वो किस किस्म के लोग कहलाते हैं, जो अपनेपन का ढोंग रचाकर, अपनों को ही डस जाते हैं। Koi batlaye humko, w…
Read more »कभी अपनो से थोड़ी सी नाराज़गी तो जताकर देखो तुम, बहुत से लोग आएंगे 'साहिब', जलते दिये में घी डालने को। Kabhi apno…
Read more »कभी हालातों से कभी अपनों से, तो फिर कभी-कभी ख़ुद से भी लड़ना पड़ता है, यहाँ थोड़े से जीने के लिए मेरे दोस्त, हर-रोज़ बहुत से…
Read more »ना तीर से ना तलवार से, और ना ही किसी हथियार से, मैंने देखा है इक शख़्स को मरते हुए, महज़ शब्दों के वार से। Naa teer se na…
Read more »जी तो रहा हूँ मैं ज़िन्दगी, पर जीने का कोई मौल नहीं, मेरे घर में मेरे यार, "घर" जैसा कोई माहौल नहीं..!! Jee to…
Read more »ज़्यादा फ़र्क नहीं है मेरे दोस्त, भाई और कसाई में, कसाई गर्दन पर वार करता है, और भाई दिल पर। zyada fark nahin hai mere do…
Read more »मुझें किसी ऐसे सहारे की सख्त ज़रुरत है मेरे 'दोस्त'.., जो दुनियां की भीड़ में अपनेपन का अहसास करा सके। Mujhen kis…
Read more »ले चल "ज़िन्दगी" दुनियाँ से कहीं दूर, सहा नहीं जाता लोगों का अब फ़ितूर। Le chal "zindagi" duniyan se …
Read more »जिन लोगों से मेरी "दुश्मनी" हो जाती है, मेरे भाई की उनसे फिर दोस्ती हो जाती है। Jin logon se meri "dushm…
Read more »किसी को सच किसी को झूठ, तो फिर किसी को महज़ इक शक मार जाता है, अपनी औलाद की ख़ुशी के लिए, सगा भाई भी अपने भाई का हक़ मार ज…
Read more »कौन अपना है कौन पराया है, ये हमकों वक़्त ने बतलाया है, ख़ुशियों में मुक़म्मल जहाँ.., दर्द में ख़ुद को "तन्हा" पाय…
Read more »झूठी हम-दर्दी और झूठे हर दिलासे हो गये, खून के रिश्ते ही खून के अब प्यासे हो गये। Jhoothi hum-dardi aur jhoothe har dil…
Read more »कभी-कभी हम 'ख़ुद' से ही रूठ जाते हैं, अपनों को मनाने में, और इक ज़िन्दगी गुज़र जाती है, ज़िन्दगी को ज़िन्दगी बनाने म…
Read more »कुछ लोगों में ऐसा भी कमीनापन होता है, पीठ पीछे बुराई सामने अपनापन होता है। Kuchh logon mein aisa bhi kaminapan hota hai…
Read more »बिखेर कर कांटे मेरी हर राह में मेरे अपनों ने, मुझसे मेरे पांवों की 'चप्पलें' तक छीन ली..! Bikher kar kaante mer…
Read more »कुछ रिश्ते रस्मों-रिवाज़ों से नहीं, 'जज़्बातों' से बंधे होते हैं..!! Kuchh rishte Rasmon-riwazon se nahin, …
Read more »अपनों में "अपनापन" ढूंढ़ रहे हो साहिब.., दिन के उजालों में जुगनू ढूंढ़ रहे हो साहिब। Apnon mein "apnapan&q…
Read more »'ऐ ज़िन्दगी' तुझें गुज़ारे तो हम किसके सहारे, हर शख़्स मुझें अब बेगाना सा लगने लगा है। 'Aye zindagi' …
Read more »पतझड़ से पहले शजर से पत्ते झड़ते देखे हैं हमने, वक़्त के साथ हालात संवरते-बिगड़ते देखे हैं हमने, तुम किस रिश्तों की दुहाई द…
Read more »किसको कहें हम अपना, किस पर करें 'ऐतबार', मेरे अपनों ने ही छीना है, मेरी ख़ुशियों का संसार। Kisko kahen hum apna,…
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