उसने कुछ लोगों से, झूठी उम्मीदें लगा ली होगी 'मुर्शद', वरना उसे यूँ हार कर, मौत को ना गले लगाना पड़ता..! Usne ku…
Read more »जब क़िस्मत और खुदा दोनों हमसे रूठ जाते है, फिर कितने ही बांधो "सब्र" के बाँध टूट जाते हैं। Jab kismat aur khud…
Read more »मालूम नहीं क़िस्मत और ख़ुदा को क्या मंज़ूर है, जो मेरी हर कोशिश कामयाबी से 'कोसों' दूर है। Maaloom nahin kismat au…
Read more »हर रात की क़िस्मत में चमकता महताब नहीं हुआ करता, हर कली की तक़दीर में खिलता गुलाब नहीं हुआ करता, कुछ बद-नसीब अभागे ऐसे भी…
Read more »मुक़म्मल ना हुई कोई आरज़ू, अधूरी ही रही मेरी हर हसरत, समझ नहीं आ रहा, कि बेवफ़ा तुम थे या फिर मेरी क़िस्मत । Mukammal naa h…
Read more »सजाकर दिल में हसरतों की महफ़िलें बेहिसाब, ख़ुद को ही आहत करते हो, जो क़िस्मत में ही नहीं है यार तुम्हारे, तुम फ़क़त उसी की च…
Read more »राह-ए-ज़िन्दगी कुछ तो "गुनाह" हुआ है हमसे.., वरना यूँ ही किस्मत और ख़ुदा ख़फ़ा नहीं हुआ करते। Raah-e-zindagi kuch…
Read more »राह-ए-ज़िन्दगी हर मोड़ पर फिर हम , कुछ न कुछ "खोकर" निकले, हम करते भी तो भला क्या, जब अपनी ही किस्मत के सारे प…
Read more »हर राँझे की किस्मत में हीर नहीं होती, मेहरबां हर किसी पर तक़दीर नहीं होती, कमबख़्त ये दिल भी उसी की ज़िद करता है, जिस नाम…
Read more »यूँ ही मिलकर मुसाफ़िर मंज़िल से दूर नहीं हुआ करते, कुछ फ़ैसले मेरे यार किस्मत को मंज़ूर नहीं हुआ करते। Yoon hi mil kar …
Read more »ना क़िस्मत बुरी थी मेरी, और ना ही फ़ितरत बुरी थी मेरी, हर किसी पे ऐतबार करने की, फ़क़त आदत बुरी थी मेरी। Naa kismat buri th…
Read more »मत खोल मेरे ज़ख्मों की किताब को, हर पन्ने पर अधूरी कहानी मिलेगी, कुछ क़िस्मत और कुछ ख़ुदा की, बाकी मेरे अपनों की मेहरबानी …
Read more »तुझें पा ना सका, ये क़िस्मत की बात है, पर चाहूँगा तुझें उम्र-भर, ये मेरे हाथ है। Tujhen paa naa saka, yeh kismat ki baat…
Read more »मिलन होता है जुदाई होती है, उल्फ़त में वफ़ा और बेवफ़ाई होती है, कुछ बदनसीब ऐसे भी होते हैं, किस्मत में जिनके सिर्फ़ तन्हाई …
Read more »यूँ तो वो हर-रोज़ मिलते हैं हमें पर बात नहीं होती, बग़ैर उनके रोज़ रात तो होती है पर रात नहीं होती, मुक़म्मल शब गुज़र जाती ह…
Read more »ना अपनों से गिला होगा, ना ग़ैरों से कोई शिकायत होगी, जिस रोज़ क़िस्मत मेहरबां, और ख़ुदा की इनायत होगी..! Naa apnon se g…
Read more »क्या वफ़ा और क्या बेवफ़ा जब क़िस्मत अपनी हो ख़फ़ा, मुद्दई लाख कोशिशें करले हिस्से में फ़क़त जफ़ा ही जफ़ा । Kya wafa aur ky…
Read more »नहीं है यार हमारी ऐसी 'क़िस्मत', कि हम भी दें किसी दिल में दस्तक। Nahin hai yaar humari aisi 'kismat', K…
Read more »वाह रे मेरे ख़ुदा, मुझ बद-नसीब पर भी क्या ख़ूब इनायत की है, क़िस्मत में तन्हाई लिखकर, दिल में बे-इंतिहा मोहब्बत दी…
Read more »हम पर भी क्या ख़ूब, क़िस्मत के ज़ुल्म-ओ- सितम बरस रहे हैं, मुक़म्मल जहाँ को भुलाकर, फ़क़त इक ' शख़्स' को तरस रहे ह…
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