Advertisement

Kismat ke sitam...

Kismat_ke_sitam


हम पर भी क्या ख़ूब, क़िस्मत के ज़ुल्म-ओ-सितम बरस रहे हैं,
मुक़म्मल जहाँ को भुलाकर, फ़क़त इक 'शख़्स' को तरस रहे हैं।

Hum par bhi kya khoob, kismat ke zulm-o-sitam baras rahe hain,
Mukammal jahan ko bhulakar, faqat ik shakhs ko taras rahe hain



  • क़िस्मत - तक़दीर, भाग्य, नसीब, मुकद्दर
  • सितम - ज़ुल्म, अत्याचार, अन्याय, अनर्थ, कष्ट पहुँचाना
  • फ़क़त - केवल, सिर्फ, बस
  • शख़्स - व्यक्ति, आदमी, मनुष्य, इन्सान

  • Article By. Dharm_Singh

एक टिप्पणी भेजें

1 टिप्पणियाँ

  1. भरे बाजार से अक्सर मैं खाली हाथ आया हूँ,
    कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते।

    जवाब देंहटाएं