"या अल्लाह" बन्दों पे अपने रहमत तू करना.., मुक़म्मल हर दिल की हसरत और आरज़ू करना। "Yaa allah" bandon …
Read more »तुझकों पाने की हसरत ने, मुझें कहीं का नहीं छोड़ा..! Tujhkon paane ki hasrat ne, Mujhen kahin kaa nahin chhoda..! Read mo…
Read more »यूँ ही बैठे-बैठे हमकों साहिल पे सुबहा से शाम हो गई, ज़िन्दगी जीने की हसरत में ज़िन्दगी ही तमाम हो गई। Yoon hi baithe-bait…
Read more »मुक़म्मल ना हुई कोई आरज़ू, अधूरी ही रही मेरी हर हसरत, समझ नहीं आ रहा, कि बेवफ़ा तुम थे या फिर मेरी क़िस्मत । Mukammal naa h…
Read more »सजाकर दिल में हसरतों की महफ़िलें बेहिसाब, ख़ुद को ही आहत करते हो, जो क़िस्मत में ही नहीं है यार तुम्हारे, तुम फ़क़त उसी की च…
Read more »चार दिन की ज़िन्दगी, चार कंधों की मोहताज़ बनकर रह गई, तमाम हसरतें और आरज़ू, महज़ अधूरे 'ख़्वाब' बनकर रह गई। Chaar di…
Read more »सिमट कर रह गई फिर तमाम हसरतें और ख़्वाहिशें मेरी.., जब कहा उसने, कि दिल की बातों को दिल से नहीं लगाया करते। Sima…
Read more »गुज़र गया वो "वक़्त" मेरे यार, जब हमकों तुम्हारी तलब हुआ करती थी, इक हसरत थी तेरे संग ज़िन्दगी जीने की, जो बे-मत…
Read more »पूछकर वो मेरे घर का पता मेरे दरवाजे पर भी नहीं आया, वक़्त बे-वक़्त आने वाला वक़्त के तक़ाज़े पर भी नहीं आया, दम निकला मेरा ज…
Read more »हसरतों की महफ़िल तो यहाँ हर कोई सजाता है, मुक्कमल उसी की होती है जो तक़दीर लेकर आता है । Hasraton ki mahfil toh yah…
Read more »बड़ी हसरत थी पहलू में तेरे सर रखकर सोने की, जो इक सबब बनकर रह गई ता-उम्र मेरे रोने की। Badi hasrat thi pahlu mein tere s…
Read more »हसरत ही नहीं ये आरज़ू भी थी, कि मोहब्बत में हम हद से गुज़र जाएंगें, अफ़सोस... कभी सोचा न था , बेवफ़ाई लिखते-लिखते हम म र …
Read more »एक से ही नहीं तुम हज़ारों से पूछो, चाँद से ही नहीं तुम सितारों से पूछो, हसरत-ए-मोहब्बत क्या है अंजाम.., जाकर आशिक़ों की …
Read more »उनको ख़बर ही कहाँ है, कि किस क़दर हम जिया करते हैं, हम तो बस आह भरकर, हसरतों का क़त्ल किया करते हैं। Unko khabar hi k…
Read more »चाहत कहूँ या हसरत कहूँ, या फिर तुझें तलब कहूँ, जो भी कहूँ बस इतना कहूँ, कि सब-कुछ बेमतलब कहूँ । Chahat kahoon yaa …
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