उनको ख़बर ही कहाँ है, कि किस क़दर हम जिया करते हैं,
हम तो बस आह भरकर, हसरतों का क़त्ल किया करते हैं।
Unko khabar hi kahan, ki kis qadar hum jiya karte hain,
Hum toh bas aah bharkar, hasraton ka qatl kiya karte hain।
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- क़दर - जिल्लत, अनादर, अवगणन, अवग्रहण, अपचार, लिहाज़, इकराम, खातिर
- आह - दुःख, पीड़ा, शोक, वेदना, अफ़सोस, ओह, दुःख या उदासी के समय ली जानेवाली ठंडी साँस
- हसरत - हार्दिक इच्छा, दिली ख़्वाहिश, चाह, अरमान, लालसा, या फ़िर ऐसी इच्छाएं जो कभी पूर्ण नहीं होती
- कत्ल - वध, हनन, हत्या, कत्लगाह, मारना
- Article By. Dharm_Singh

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