भीड़ में रहकर भी अकेला महसूस करना सबसे बड़ा दर्द होता है। तन्हाई में जो गम दिल सहता है, उसे लफ़्ज़ देना आसान नहीं। My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ 27+ बेहतरीन Alone Sad Shayari in Hindi का कलेक्शन।यहाँ आपको Tanha Shayari, Alone Shayari Status, aur Sad Alone Shayari मिलेगी। अगर आप अकेलेपन के एहसास से गुजर रहे हैं तो ये शायरियाँ आपके दिल की तन्हाई को बयां कर देंगी।
Alone Sad Shayari in Hindi by Marudhar Rahi
किस्मत में तो न थे वो दर्द-ओ-ग़म हमारी, जो तन्हाइयों के साये में हम तन्हा सह गये,
कोई हमारा होकर भी हमारा ना हुआ, हम उनके न होकर भी उन्हीं के होकर रह गये।
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कहीं नहीं लिखा था किस्मत में वो रंज-ओ-ग़म, जो तन्हाइयों के साए में मैं सह गया,
भरोसे की बुनियाद पर रेत का घर बनाया था, ग़लतफ़हमियों के तूफ़ानों में ढह गया।
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बहुत रोती है कमबख़्त मेरी ये आँखें बेवफ़ा, दिल की तन्हाई और अज़ीयत देखकर,
जल्द ही ख़ुदा को प्यारा हो जाऊँगा मैं, यही कहा है इक तबीब ने मेरी तबीयत देखकर।
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तन्हाई की रातें अक्सर लम्बी ही नहीं, क़यामत से भी गुज़रा करती है,
साथ में ज़िन्दगी जज़्बातों संग, बिना सुर-ताल रातभर मुजरा करती है।
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ना दिन गुज़रता है ना रातें कटती है,
तन्हाइयों में पल-पल तेरी यादें ड़सती है,
देखकर मेरा ये हाल-ए-दिल बेवफा,
मेरी तन्हाइयाँ भी मुझ पे रोज़ हँसती है।
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हालातों ने आँसू पीना सिखा दिया,
अपनो ने तन्हा जीना सिखा दिया,
ज़ख़्म पे ज़ख़्म जब मिले ज़िन्दगी से,
तो वक़्त ने चुप रहना सिखा दिया।
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'ऐ ज़िन्दगी', तेरे सारे सितम माफ़ कर दूँ मैं,
बशर्ते, दम जब निकले तो यार की बाहों में निकले।
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मत पूछ मेरे यार 'तन्हा' ज़िन्दगी हम कैसे गुज़ारे हैं,
दिल के जज़्बातों को रो-रोकर काग़ज़ पे उतारे हैं।
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जिसके पास कहने और सुनने वाला कोई नहीं होता है,
वो वीराने में 'तन्हा' बैठकर ख़ुद से बातें करके रोता है।
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दौलत की चकाचौंध में वो कुछ इस कदर खो गए,
हमें भी तन्हा कर दिया और खुद भी तन्हा हो गए।
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बदलती दुनिया का बदलता पल-पल रंग देखकर,
ख़ुश हूँ मैं आज बहुत तन्हाइयाँ अपने संग देखकर।
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तुझसे अच्छी तो तेरी 'यादें' है यारा,
जो पल-भर भी मुझे तन्हा नहीं छोड़ती।
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कहाँ से लाऊं यार ऐसा कोई तिलिस्मी दिल,
जो चाहत में तेरी धड़के तो तुझे 'एहसास' हो।
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घड़ियाँ इंतज़ार की अब काटे नहीं कटती हैं,
तेरे आने की आस में राह से नज़र नहीं हटती है,
कहाँ मसरूफ़ हो गए हो तुम हमको तन्हा करके,
क्या तुम्हें हमारी तरह ये तन्हाइयाँ नहीं डसती हैं?
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पीता नहीं था मैं फिर भी पीना सिखा दिया,
हिज़्र-ए-यार ने मुझे तन्हा जीना सिखा दिया,
मैंने माँगी दुआ ख़ुदा से जिनकी खुशियों की,
उसी ने मुझे घुट-घुटकर मरना सिखा दिया।
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क्या कमी रह गई थी बेवफ़ा मेरे प्यार में,
छोड़कर चली गई 'तन्हा' मुझे मझधार में।
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काश... कि हम तुझसे 'दिल्लगी' ही ना करते,
तो यूँ तन्हाइयों में तन्हा बैठ कर आह ना भरते।
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हमने तो यार वो वक़्त भी 'तन्हा' ही गुज़ारा है,
जो बिना हम-सफ़र किसी को ना सफ़र गवारा है।
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पहले आती थी हिचकियाँ, अब सिसकियाँ आती है,
लगता है कोई अन्दर ही अन्दर, 'मर' रहा है मुझमें..!
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यूँ तो कोई ख़ास वज़ह न थी जुदा हमारे होने की,
वो नज़र-अंदाज़ करते गये और फ़ासले बढ़ते गये।
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लौट आये हैं हम फ़िर से अपनी तन्हाइयों और वीरानियों में,
कमबख़्त ये तमाशा-ए-मोहब्बत हमको 'रास' न आया..!
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बिछड़ कर तुझसे हमने है यह जाना, कि ये रातें सिर्फ़,
चैन से सोने को ही नही, जी भर के रोने को भी हुआ करती है।
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जिस रोज़ तुम्हें मेरी मोहब्बत का एहसास होगा,
आँखों में अश्क़ ही नही 'दिल' भी उदास होगा..!
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हयात हमारी भी फिर चैन से बसर हो जाती,
मुक़म्मल जो हम-सफ़र की कसर हो जाती।
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कमबख़्त उसकी यादों का महज़ इक झोंका,
तिनकों में बिखेर कर चला जाता है हमको..!
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तन्हा ज़िन्दगी है और जीना मुहाल है,
इक बेवफ़ा के ख़याल से हाल बेहाल है।
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काश... कि हम भी इतने ख़ुशनसीब होते,
किसी शाम बाहों में हमारे भी महबूब होते।
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जब किस्मत में लिखी हो जुदाई,
तो 'रास' आ ही जाती है तन्हाई।
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जो 'ज़िन्दगी' है, वो ज़िन्दगी में नही..,
बिना ज़िन्दगी के ज़िन्दगी जी रहे हैं, ये भी तो कम नही।
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- - मरुधर राही ✍️



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