ब्रेकअप सिर्फ दिल नहीं तोड़ता, हौसला भी तोड़ देता है। पर उसी दर्द से उठकर खुद को फिर से खड़ा करना ही असली जीत है। My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ पावरफुल Breakup Motivation Shayari in Hindi का कलेक्शन।यहाँ आपको Breakup ke baad Motivation Shayari, Bewafa Shayari with Motivation, aur Life Motivational Shayari मिलेगी। अगर आप भी ब्रेकअप के दर्द से बाहर निकलकर खुद को मजबूत बनाना चाहते हैं, तो ये शायरियाँ आपको नई हिम्मत देंगी।
Breakup Motivation Shayari in Hindi by Marudhar Rahi
उसका बेवफ़ा हो जाना भी लाज़मी था यार,
हमने मोहब्बत जो उनसे 'बे-इंतिहा' की थी।
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तुझे बे-इंतिहा चाहना ही मेरे लिए मेरी ख़ता हो गई,
ख़ता पल दो पल की थी, ता-उम्र की सज़ा हो गई।
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तेरी दर्द-ए-जुदाई में, रोना मेरा लाज़मी था यार,
मैं कोई खिलौना तो नहीं, इक आदमी था यार..!
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लाज़मी था मेरा, उसके झूठे वादो पर ऐतबार करना,
पहली मर्तबा सीखा था हमने, किसी से प्यार करना।
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उन्हें हो न हो 'यक़ीं', पर मुझे तो मुक़म्मल ऐतबार है,
किसने की है वफ़ा और जफ़ा, गवाह परवरदिगार है।
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ग़र सच्ची है मेरी मोहब्बत, ऐ बेवफ़ा बेमुरव्वत,
तो ख़ुदा तुझे तेरी बेवफ़ाई के अंज़ाम से बचाए।
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ग़ालिबन कुछ मजबूरियां रही होगी उसकी,
वरना बे-इंतिहा मोहब्बत किसको गवारा नहीं।
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काश... कि बेवफ़ा, उल्फ़त का भी कोई पैमाना बना होता,
मेरी वफ़ा और तेरी जफ़ा का गवाह, फिर ज़माना बना होता।
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ना शिकवा था ना शिक़ायत थी, और ना ही कोई गिला था,
हम-सफ़र यार बनकर, जब वो हमसे पहली दफ़ा मिला था,
फ़िर जितना मैं उस पे मरता गया, उसका दिल भरता गया,
आख़िर में उसका बेवफ़ा हो जाना ही मेरी वफ़ा का सिला था।
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इतने बेरहम तो नहीं हैं हम, दिल तुम्हारी तरह हम भी तोड़ दें,
इससे बेहतर तो यही होगा, कि हम तुम्हें रब के हवाले छोड़ दें।
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बड़े ही ख़ुश नज़र आ रहे थे आज वो हमको ठुकरा कर,
हम भी उनकी ख़ुशियों में इज़ाफ़ा कर आए, थोड़ा और मुस्कुरा कर।
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एक ही वादे पे गुज़ार दी हमने अपनी तमाम ज़िन्दगी..,
सजदा क़ुबूल न हो तो हम, दर-ए-ख़ुदा नहीं बदला करते।
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वो चाहती तो मिल सकती थी मुझसे फिर से किसी बहाने से,
उसने मुनासिब न समझा कि कोई ‘जी उठे’ उसके आने से..!
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मुक़द्दर को ही मिलना हमारा गवारा न था,
वरना यार इश्क़ हमारा इतना नकारा न था।
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गुज़र गया वो वक़्त मेरे यार, जब हमको तुम्हारी तलब हुआ करती थी,
इक हसरत थी तेरे संग ज़िन्दगी जीने की, जो बे-मतलब हुआ करती थी।
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बड़ी मुश्किलों से संभाला है मैंने इस दिल को बेवफ़ा, तेरे रंज-ओ-ग़म से,
फिर से इसे तेरे हवाले कर देंगे, ऐसी कोई उम्मीद न रख अब तू हमसे..!!
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इतिहास गवाह है मेरे दोस्त, इस बात का कि कमल कीचड़ में ही खिला करते हैं,
और ये बदनसीबी है दिल से चाहने वालों की, जो उन्हें बेवफ़ा यार मिला करते हैं।
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मत करो किसी से उम्मीद-ए-वफ़ा, यहाँ हर किसी की अपनी अलग कहानी है,
जिसकी बेवफ़ाई में तुम आँसू बहा रहे हो, आँखों में उसके न शरम न पानी है।
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तुझको पाकर खोने की शिक़ायत, हम तो अपनी ही तक़दीर से करते हैं,
और जो करनी थी बातें तुझसे बेवफ़ा, वो अब हम तेरी तस्वीर से करते हैं।
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माना के ज़माने से छुपाकर तू, मेरी वफ़ा और तेरी जफ़ा की हर बात रखती होगी,
मुझे यक़ीं है कभी तो तू तन्हाई में मुझे याद करके, दिल पे अपने हाथ रखती होगी।
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ख़ुशनसीब ही नहीं ख़ुशकिस्मत भी थे तुम, जो तुम्हारे हिस्से प्यार का हर मौसम आया,
हम ठहरे बदनसीब अभागे, जो हमारे हिस्से फ़क़त तुम्हारी बेवफाई का 'ग़म' आया..!
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बात-बात पर बेसबब रूठना तो ‘मरूधर राही’, उनका फ़क़त इक बहाना था,
दिल का पंछी जा बैठा उस डाल पर, जहाँ पहले से ग़ैरों का आना-जाना था।
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हौसला नहीं हारा हूँ मैं अभी अपना, फ़क़त मोहब्बत की बाज़ी हारी है,
मैंने तो सह लिया तेरा हर 'दर्द' बेवफ़ा, सहने की बारी अब तुम्हारी है।
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जा ज़िन्दगी तू मेरी ज़िन्दगी से, अब तू इक और ज़िन्दगी जी ले,
हम ग़म के आँसू पी लेंगे, पर तू महफ़िल में ख़ुशी के जाम पी ले।
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यूँ ही मिलकर मुसाफ़िर, मंज़िल से दूर नहीं हुआ करते,
कुछ फ़ैसले मेरे यार, किस्मत को मंज़ूर नहीं हुआ करते।
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हमने उन्हें बे-इंतिहा चाहा, ये हमारी चाहत का लिहाज़ था,
वो धोके पर धोका देते रहे, ग़ालिबन उनके यही रिवाज़ था।
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मतलब की इस दुनिया में हम तो बे-मतलब हैं यारा,
तू तक़दीर में नहीं है मेरी और तेरी ही तलब है यारा।
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थोड़ा ढ़लने दे वक़्त के साथ, तेरे हुश्न-ओ-शबाब को,
बेवफ़ा मुझे तेरे चाहने वालों की, 'तादाद' देखनी है..!
ख़ैरात में मिली ख़ुशियाँ हम, हरगिज़ 'गवारा' नहीं करते,
उन्हें कह दो, एक ही मोहब्बत को हम दोबारा नहीं करते।
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क्या हुआ यार जो उसने हमें छोड़ दिया,
वादा उन्हीं का था उन्हीं ने तोड़ दिया..!
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- - मरुधर राही ✍️








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