अपनों का साथ ही जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा होता है, पर जब अपने ही बेगाने जैसे बर्ताव करने लगें तो दिल टूट जाता है। My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ 70+ दिल को छू लेने वाली Apno Ke Liye Shayari in Hindi का कलेक्शन।यहाँ आपको Apno Ke Liye Emotional Shayari, Begano Ki Shayari, aur Apno Ka Dard Shayari मिलेगी। अगर आप अपनों की बेरुखी से दुखी हैं या अपनों के लिए अपने जज्बात बयां करना चाहते हैं, तो ये शायरियाँ आपके दिल की बात कह देंगी।
Apno Ke Liye Shayari in Hindi by Marudhar Rahi
ज़िन्दगी गुज़ार दी हमने बेगानों की तरह, आख़िरी सफ़र में तो कंधा कोई अपना देना,
कुछ अधूरे ख़्वाब रखे हैं हमने अपनी ताक पर, हो सके तो उन्हें मेरे साथ दफ़ना देना।
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कभी हालातों से कभी अपनों से, तो फिर कभी-कभी ख़ुद से भी लड़ना पड़ता है,
यहाँ थोड़े से जीने के लिए मेरे दोस्त, हर-रोज़ बहुत से आँसुओं को पीना पड़ता है।
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किसी के लफ़्ज़ किसी के लहज़े, तो फिर किसी के रवैये मार गए,
हमको पता थी कीमत रिश्तों की, बस ख़ामोश रह कर हम हार गए।
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कोई बतलाये हमको, वो किस किस्म के लोग कहलाते हैं,
जो अपनेपन का ढोंग रचाकर, अपनों को ही 'डस' जाते हैं।
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कभी अपनों से थोड़ी सी नाराज़गी तो जताकर देखो तुम,
बहुत से लोग आएंगे 'साहिब', जलते दिये में घी डालने को।
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ना तीर से ना तलवार से, और ना ही किसी हथियार से,
मैंने देखा है इक शख़्स को मरते हुए, महज़ शब्दों के वार से।
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जी तो रहा हूँ मैं ज़िन्दगी, पर जीने का कोई मौल नहीं,
मेरे घर में मेरे यार, 'घर' जैसा कोई माहौल नहीं..!!
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सबको अपना कहते-कहते, आज हम ख़ुद बेगाने हो गए,
सब हँसते हैं मुझ पर, और मुझे 'हँसे' कई ज़माने हो गए।
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सबको दिलासा देते-देते, आज मैं ख़ुद तन्हा अकेला रह गया,
अरमां सब ख़ाक हुए, फ़क़त चंद साँसों का झमेला रह गया।
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मत खोल मेरे ज़ख्मों की किताब को, हर पन्ने पर अधूरी कहानी मिलेगी,
कुछ किस्मत और कुछ ख़ुदा की, बाकी मेरे अपनों की मेहरबानी मिलेगी।
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मेरे अपनों ने दिये हैं मुझे ऐसे-ऐसे दर्द, कि हर दर्द पर बस मेरी आह निकली,
मैंने उस दर्द को अल्फ़ाज़ो में इस कदर पिरोया, कि लोगों की वाह-वाह निकली।
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ना कोई हुनर और ना ही कोई तजुर्बा काम आएगा,
जिस रोज तेरे दुश्मनों में तेरे अपनो का नाम आएगा।
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ना अपनो से गिला होगा, ना ग़ैरों से कोई शिकायत होगी,
जिस रोज़ किस्मत मेहरबां, और ख़ुदा की इनायत होगी..!
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अल्फ़ाज़ों में कैसे बयाँ करे अब हम, अपने रंज-ओ-ग़म को,
कुछ किस्मत ने सितम ढाए, कुछ अपनों ने सताया है हमको।
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मिट जाते हैं कदमो के निशां, महज़ कुछ हवा के झोंको से,
इन्सान टूटता ही नहीं, बिख़र भी जाता है अपनों के धोको से।
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मुद्दत हो गई है मुस्कुराए हुए, ग़मों ने इस क़दर घेरा है,
गर्दिशों ने जब दस्तक दी, तो पहले अपनों ने मुँह फेरा है।
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निकल गया अब यह भरम भी, कि अपने 'अपने' होते हैं,
ख़ुद की मौत ख़ुद ही मरते हैं, बाक़ी सब सपने होते हैं..!
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बज़्म और महफ़िलों में तो 'अक्सर' शौर ही हुआ करते हैं,
लोग बाहर से कुछ तो अंदर से कुछ और ही हुआ करते हैं।
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ज़्यादा फ़र्क नहीं है मेरे दोस्त, भाई और कसाई में,
कसाई गर्दन पर वार करता है, और भाई दिल पर।
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मुझे किसी ऐसे सहारे की सख्त ज़रुरत है मेरे 'दोस्त'..,
जो दुनिया की भीड़ में अपनेपन का एहसास करा सके।
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ज़िन्दगी का सही सबक़ तो कोई अपना ही सिखाता है हमको,
कोई बार-बार दुत्कार कर, तो फ़िर कोई प्यार से पुचकार कर।
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हर ख़्वाब अधूरा और झूठा हर सपना निकला,
दुनिया की इस भीड़ में न कोई अपना निकला।
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हम भी यार दुनिया से कहाँ हारने वाले थे,
मेरे अपने ही पीठ में खंज़र मारने वाले थे।
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ले चल 'ज़िन्दगी' दुनिया से कहीं दूर,
सहा नहीं जाता लोगों का अब फ़ितूर।
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राब्ता ना रहा अब कोई जीस्त-ओ-जाँ से,
फ़रेब पर फ़रेब मिला है हमें इस जहाँ से।
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जिन लोगों से मेरी 'दुश्मनी' हो जाती है,
मेरे भाई की उनसे फिर दोस्ती हो जाती है।
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किसको कहें हम अपना, किस पर करे 'ऐतबार',
मेरे अपनों ने ही छीना है, मेरी ख़ुशियों का संसार।
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गुज़रता वक़्त पल-पल मेरी और इशारा कर रहा है,
कौन है तेरा यहाँ हर कोई तुझसे किनारा कर रहा है।
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सबब ना पूछ मेरे यार मुझसे मेरे इन अश्क़ों का,
मैं नहीं चाहता कि कोई मेरा अपना ही 'बेपर्दा' हो।
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इन आँखों में अब ख़्वाब नहीं, अश्क़ों के बहते धारे हैं,
ज़िन्दगी की जंग को दुश्मनों से नहीं, अपनों से हारे हैं।
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सारे रिश्ते-नाते बे-बुनियाद और झूठे हैं,
अजब है ये दुनिया इसके 'रंग' अनूठे हैं।
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अपनों की ज़रुरतें पूरी करते-करते,
अपनी ही 'हसरतें' अधूरी रह गई..!!
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ग़ैरों को अपना बनाने निकले थे हम,
और ख़ुद से ही बेगाने होकर आ गये।
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फ़ितरत में उसके भी दग़ा था,
जो मेरा ख़ास अपना सगा था।
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किसी को सच किसी को झूठ, तो फिर किसी को महज़ इक शक मार जाता है,
अपनी औलाद की ख़ुशी के लिए, सगा भाई भी अपने भाई का हक़ मार जाता है।
कभी-कभी हम 'ख़ुद' से ही रूठ जाते हैं, अपनों को मनाने में,
और इक ज़िन्दगी गुज़र जाती है, ज़िन्दगी को ज़िन्दगी बनाने में।
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बुझाकर ख़ुशियों के सारे चराग़, हर-सू ग़मों का साया कर दिया,
हम गिला भी करे तो किससे, जब अपनों ने ही हमें पराया कर दिया।
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ना अपनों ने गले लगाया मुझे, और ना ही थामा ग़ैरों ने मेरा कोई हाथ,
हर मोड़ पर तन्हा खड़ा था, लिए अपने ही कंधों पे अपनी 'ज़िंदा' लाश।
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ये किस तूफां में घिरे हैं कि कोई किनारा नज़र नहीं आ रहा,
चारों और बस मौत ही मौत कोई सहारा नज़र नहीं आ रहा,
यूँ तो बहुत हुआ करते थे किसी ज़माने में हमारे चाहने वाले,
अफ़सोस... आज हमको कोई 'हमारा' नज़र नहीं आ रहा।
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सफ़ेद लिबास में हर शख़्स सादिक नहीं होता,
ज़िन्दगी का हर फ़ैसला मन-मुताबिक नहीं होता,
कुछ अपनों के सताए किस्मत के आज़माए होते हैं,
हर ख़ामोश और उदास चेहरा आशिक़ नहीं होता।
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पतझड़ से पहले शजर से पत्ते झड़ते देखे हैं हमने,
वक़्त के साथ हालात संवरते-बिगड़ते देखे हैं हमने,
तुम किस रिश्तों की दुहाई दे रहे हो मेरे यार मुझे..,
ख़ून के रिश्ते ही ख़ून से लड़ते-झगड़ते देखे हैं हमने।
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ज़िन्दगी ही तो थी यार, हँसकर गुज़र जाती,
फूलों को तन्हा छोड़कर, ख़ुशबू किधर जाती,
मरने तक ही तो ज़िन्दा रहना था मुझे यहाँ...
काश... ये बात मेरे अपनों के गले उतर जाती।
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किसी के दिल में उतरकर कौन देखता है,
ज़िंदगी से पहले मरकर कौन देखता है,
होता है ये तो अपनों का रहम-ओ-करम,
वरना अश्क़-ए-ग़म पीकर कौन देखता है।
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कौन अपना है कौन पराया है,
ये हमको वक़्त ने बतलाया है,
ख़ुशियों में मुक़म्मल जहाँ...,
दर्द में ख़ुद को 'तन्हा' पाया है।
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कितने टूटे हैं हम ये ना हमसे पूछो,
कितने झूठे हैं लोग ये हमसे पूछो,
अपनों को अपना बनाने में ख़ुद से,
कितने रूठे हैं हम ये हमसे पूछो..!
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झूठी हम-दर्दी और झूठे हर दिलासे हो गए,
खून के रिश्ते ही खून के अब प्यासे हो गए।
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कुछ लोगों में ऐसा भी कमीनापन होता है,
पीठ पीछे बुराई सामने अपनापन होता है।
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बिखेर कर कांटे मेरी हर राह में मेरे अपनों ने,
मुझसे मेरे पांवों की 'चप्पलें' तक छीन ली..!
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कुछ रिश्ते रस्मों-रिवाज़ों से नहीं,
बल्कि 'जज़्बातों' से बंधे होते हैं..!
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अपनों में 'अपनापन' ढूंढ़ रहे हो साहिब..,
दिन के उजालों में जुगनू ढूंढ़ रहे हो साहिब।
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'ऐ ज़िन्दगी' तुझे गुज़ारे तो हम किसके सहारे,
हर शख़्स मुझे अब बेगाना सा लगने लगा है।
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जो 'टूटा' नहीं था कभी, वक़्त और हालात की मार से,
वो बिखर कर चूर-चूर हो गया, अपनों के तिरस्कार से।
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यूँ ना देखो मुझे तुम साहिब, अपनी हैरत भरी इन निगाहों से,
ज़ख़्मी हुआ हूँ कांटे चुनते-चुनते, किसी अपने की 'राहों' से।
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अपना-अपना कह कर, अक्सर महफ़िल लूट लिया करते हैं लोग,
और जब लुट जाये महफ़िल, तो वहाँ से छूट लिया करते हैं लोग।
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अक्सर छीन लिया करते हैं, अपने ही अपनों की तमाम ख़ुशियाँ,
तुम दुश्मनों से ही नहीं, अपनों से भी जरा 'सम्भलकर' रहा करो।
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रिश्तों में मतलब नहीं, निभाने की तलब रखिये,
जो थक जाए सफ़र में, उसे कंधे पर रखिये।
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ज़िन्दगी जब नाच नचाती है ना 'साहिब'...,
तो तारीफ़ में ताली बजाने वाले हाथ अपनों के ही होते हैं।
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कहीं नहीं मिलता उन ज़ख़्मों का मरहम 'साक़ी',
जो अपनों की बदौलत सौग़ात में मिला करते हैं।
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गैरों से क्या गिला करें हम, यहाँ तो अपने ही ग़ैर होकर बैठे हैं,
मेरी मौत का जश्न मनाने को, वो अपना 'मुँह' धोकर बैठे हैं।
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कोई नहीं पढ़ पाया 'मुर्शद', मेरे पेशानी की सिकन,
हर शख़्स मशगूल था, सजाने में अपने दिल की अंजुमन।
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जो भी थे दिल के क़रीब, वो फ़िर सोच से बहुत परे निकले,
अपनों की आड़ में कुछ लोग, ग़ैरों से भी गये-गुज़रे निकले।
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शिकवा क्या करूं ज़िन्दगी से, सितम तो अपनों ने किया है,
गिला भी करूं तो अब किससे, मायूस तो सपनों ने किया है।
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ज़िन्दगी के सफ़र पर, मुक़म्मल खेल तो साँसों का है,
ग़म का ग़म नहीं, अफ़सोस मेरे अपनों के झांसों का है।
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ग़ैर 'ग़ैर' ही रहेंगे वो कभी अपने नहीं होते,
और बिना मेहनत साकार सपने नहीं होते।
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डाल दो 'मिट्टी' तुम ऐसे रिश्तों पर,
जो मोहताज हैं मिलने को किस्तों पर।
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बे-दर्द ज़माने की अनोखी रीत देखी,
अपनो से ख़फ़ा ग़ैरों संग प्रीत देखी।
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- - मरुधर राही ✍️
![Apno Ke Liye Shayari in Hindi [2026] 150+ Apno Ke Liye Shayari in Hindi - Marudhar Rahi](https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEg5BolT0fnkM-dBUyHUCsN5kyVSWmQ-LuEU3UJEj7MnsQTiasY-grOZrm0nNanV-DdNQN0nRQ8ylaPekfi7MatARdXHTDDV9XToKXU4JX0qVD8DAa0jSpure9B1iidnVDjeHS1DZyJk4XZQyycKayi5UDSi_U15qvsyQRFzEcftPVsTyeljJs3zOT8xN49l/w640-h640/Sad-apno-ke-liye-shayari.jpg)







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