असली एटीट्यूड दिखावे में नहीं, अंदाज़ में होता है। अगर आप भी उनमें से हैं जो अपनी शर्तों पर जीते हैं और दुनिया की परवाह नहीं करते, तो ये शायरियाँ सिर्फ आपके लिए हैं। My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ 50+ Killer Attitude Shayari For Boys का सबसे खतरनाक कलेक्शन।यहाँ आपको Boys Attitude Shayari, Killer Attitude Status, और Royal Nawabi Attitude Shayari मिलेगी। इन शायरियों को अपने WhatsApp Status और Instagram Caption पर लगाकर अपना स्वैग दिखा सकते हैं।
Killer Attitude Shayari For Boys - by Marudhar Rahi MyAlfaaz
परवाह नहीं कौन क्या कहता है,
मैं बहुत नेक हूँ मेरा दिल कहता है।
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हम बुरे हैं, इस पर ना बहस करो,
तुम अच्छे हो, बस ये साबित करो।
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शुक्र है इस बुरे वक़्त का..,
जिसने मुझे लोगों की ब-ख़ूबी पहचान करा दी।
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बड़ी ब-ख़ूबी से देखा है हमने, लोगों का भला करके,
शुक्रियादा कम करते हैं, बेवकूफ़ ज़्यादा समझते हैं।
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जिस दिन हम तुम्हारे गुनाहों से पर्दा उठाएंगे 'लाला',
तुम किसी से हाथ तो क्या नज़रें मिलाने लायक न रहोगे।
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करने को तो मैं भी कुछ लोगों का, बहुत ही बुरा कर सकता हूँ,
पर मुझे हरगिज़ गवारा नहीं, ख़ुद अपनी ही नज़रों में गिरना..!
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हम ग़लत हैं, तो फिर 'ग़लत' ही सही,
पर तुम सही हो, ये तुमसे किसने कही।
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छोड़ो भी यार अब तुम ये, अदब और बे-अदब का मसला,
जिसको जितनी तवज्जो दी, वो उतना ही बे-अदब निकला।
🥺🥺🥺🥺
जिनकी हरकतें और करतूतें, सिर्फ़ जूते खाने लायक़ हों,
उन पर लफ़्ज़ ज़ाया करके, लफ़्ज़ों की तौहीन न करें..!!
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सलीका किसी को मनाने का, प्यार मोहब्बत का भी बेकार नहीं,
पर लोग हैं कि, जूत और सबूत के बग़ैर मानने को तैयार नहीं..!
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इससे पहले कि मैं अपनी 'शराफ़त' की तमाम हदें भूल जाऊँ..,
कुछ लोगों से गुज़ारिश है कि, वो अपना रास्ता ही नहीं रवैया भी बदल ले।
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सिर्फ मेरा 'Status' देखकर ही, तुम्हारी *** में आग लग सकती है,
तो खौफ़ खाओ हमसे मुकाबले का, तुम्हारे ब्रह्मांड में आग लग सकती है।
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अपने पैसों का गुरूर उन्हें दिखाओ 'लाला',
जिन्होनें तुम्हारे बुरे वक़्त को न देखा हो..!
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जिस दौलत का तुम हमको ग़ुरूर दिखा रहे हो 'लाला',
उसे तो हम अक्सर 'ख़ैरात' में बाँट दिया करते हैं..!
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न जाने वो 'नादाँ' किस ग़ुरूर और सुरूर में इतना अकड़ रहा है,
जिसे एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन लेना पड़ रहा है..!
ज़रा अदब और तहज़ीब से बात किया करो आप हमसे,
वरना लहज़े में कड़वाहट और खून में गर्माहट हम भी रखते हैं।
😡😡😡😡
मिज़ाज़ में थोड़ी नरमी भी रखा करो जनाब..,
अकड़ते तो हमने अक्सर 'मुर्दों' को देखा है।
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कहीं तुम्हें उस दौलत का गुरूर तो नहीं 'लाला',
जो तुम्हारी माँ ने हमारे घर नाच-नाचकर कमाई है।
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दुश्मनी का इतना ही शौक़ है 'लाला', तो खुलकर सामने आ,
यूँ पीठ पीछे तो अक्सर हमने, कुत्तों को भौंकते देखा है..!
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मेरी हार और जीत, किसी के फ़ैसले की कोई मोहताज नहीं,
हम ख़ुद मुँह फेर लेते है वहाँ से, जहाँ ऊसूल और लाज नहीं।
😏😏😏😏
जिस दिन हमारे ज़मीर ने तुम्हारे ख़िलाफ़ कोई 'गवाही' दे दी..,
हम तुम्हारी सारी होशियारी तुम्हारे पिछवाड़े से निकाल देंगे लाला।
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जो हम नहीं करना चाहते 'लाला', तुम हमसे वही करवा कर मानोगे,
तुम अपनी ही हरकतों की वजह से, हमसे *** मरवा कर मानोगे।
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कुछ गढ़ढ़े पहले से ही खुदे होते हैं, तो फिर कुछ नये और खुदवा लेते हैं,
कुछ लोग ज़्यादा ही होशियारी दिखाकर, अपनी मय्या और *** लेते हैं।
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जो ऊँगली तुम हमारी तरफ़ कर रहे हो 'लाला', उसी को पकड़ कर हम तुम्हारी *** में घुसा देंगे,
हम तो लिहाज़ करते हैं अपने संस्कारों का, वरना जहाँ से निकले हो तुम्हें उसी ब्रह्मांड में घुसा देंगे।
😡😡😡😡
जो कमाई है इज़्ज़त तुमने ख़ुद को बे-आबरू करके, मुफ़्त में वो नीलाम हो जाएगी,
और तुम खैर मनाओ मेरी 'ख़ामोशी' की, ग़र ज़ुबां खुली तो चर्चा आम हो जाएगी।
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कभी अपनी *** के घोड़े खोलकर, उनका दम भी आज़मा ले 'लाला',
तुझे तेरी औक़ात ही नहीं, हमारी हैसियत भी ब-ख़ूबी पता चल जाएगी।
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कुछ लोग इतने गुणचोर हुआ करते है 'लाला',
सौ गुण भुलाकर एक अवगुण याद रखते हैं।
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लोग मेरी ख़ामोशी को मेरा गुरूर समझने लगे हैं,
सच तो ये है लोगों का हम फ़ितूर समझने लगे हैं।
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जिनकी हर किसी से बनती है,
उनसे हमारी हरगिज़ नहीं बनती।
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माफ़ ग़लतियों को किया जाता है, गुनाहों को नहीं,
और तुम्हारे गुनाह, माफ़ी के हरगिज़ क़ाबिल नहीं।
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जिस दिन मैं अपनी मैं पे आ गया,
बा-ख़ुदा फिर तुम तुम ना रहोगे।
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फ़क़त मेरा वक़्त ख़राब है रक्त नहीं..,
रूह का तलबगार हूँ जिस्म का भक्त नहीं।
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मंज़ूर है मुझे ख़ुद्दारी की सूखी खाना भाकरी,
पर हरगिज़ नहीं करूँगा दौलतमंदों की चाकरी।
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ग़र किसी आवारा कुत्ते को उसकी औक़ात दिखानी है,
तो फिर उसको घर के बाहर से ही दुत्कार लगानी है।
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याद रखना, सगे-सम्बन्धी भी उसी दुनिया से ताल्लुक रखते हैं,
जहाँ इन्सान की नीयत नहीं, बल्कि 'हैसियत' देखी जाती है..!
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इज़्ज़त वही दिया करते हैं मेरे दोस्त, जिन्होंने इज़्ज़त कमा रखी है,
वो क्या ख़ाक किसी को इज़्ज़त देंगे, जिन्होंने ख़ुद अपनी गँवा रखी है।
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लाख कोशिशों के बावजूद भी, कोई शख्स हमारा होकर हमारा नहीं होता,
और दिल से उतरे हुए लोगों का दीदार, आँखों को हरगिज़ गवारा नहीं होता।
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बहुत गीत गाते थे कुछ लोग मेरे किरदार का,
बारी जब खुद की आई तो 'धुन' ही भूल गये।
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वो हर जगह मुँह मारता फिरता है 'दोस्त',
शायद वो हरामखोर कुत्तों के क़बीले से है।
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माफ़ करने का हरगिज़ ये मतलब तो नहीं,
कि आप उसी ग़लती को फिर से दोहराएँ।
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जिसने भी ख़राब की अब मेरी खोपड़ी,
उस मादर *** कुत्ते की माँ की ****।
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मेरी हस्ती महज़ इतनी आम है,
जितना आपको मुझसे काम है।
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अभी चुप हूँ और मौन हूँ,
बाद में बताऊंगा मैं कौन हूँ।
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- - मरुधर राही ✍️








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