दर्द जब दिल में उतर जाता है तो शायरी ही उसका मरहम बनती है। My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ 20+ बेहतरीन शराब शायरी और शराबी शायरी हिंदी का कलेक्शन, जो टूटे दिल, यादों और तन्हाई के दर्द को बयां करता है।यहाँ आपको 2 लाइन शराब शायरी, दर्द भरी शराब शायरी और यादों वाली शायरी मिलेगी। ये शायरियाँ सिर्फ उन एहसासों को लफ़्ज़ों में पिरोने के लिए हैं जो अक्सर कहे नहीं जाते।


शराब शायरी हिंदी में - Marudhar Rahi



Sharab Shayari - Koi to aisi jagah bata Saki - Marudhar RAHI - MyAlfaaz

कोई तो ऐसी जगह बता साक़ी, जहाँ उसकी यादों का कोई क़हर ना हो,
या फिर मुझे इतनी पिला, बाद पीने के मेरी कोई शाम-ओ-सहर ना हो।
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साक़ी  इन्तिहा  न पूछ तू मेरे दर्द-ए-दिल की, क्या क़यामत दिल पे गुज़र रही है,
रिश्ते में हमारे जिन्होंने ज़हर घोला, वो बेवफ़ा उन्हीं की ज़िन्दगी में रंग भर रही है।
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हर रोज़  नई-नई महफ़िलें सजती है मेरे यार, इन बेवफ़ाओं के दरबार में,
वफ़ादार तो अक्सर 'तन्हा' ही मिलते हैं, कभी मय-ख़ाने तो कभी बार में।
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साक़ी  'सबब'  न  पूछ  तू मुझसे, मेरी इस तबाही और बर्बादी का,
आशियां अपना जलाकर, घर रौशन कर दिया इक हरामज़ादी का।
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ज़माने से छुपाते रहे हम, ज़ख़्म जो तुमने दिए हमको गहरे,
तेरे दिल के निकाले हम बेवफ़ा, मय-खाने  में  जा ठहरे..!
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May kada sara peekar dekh liya mere yaar - Sharabi Shayari - Marudhar RAHI

मय-कदा   सारा   पीकर   देख   लिया  मेरे  यार..,
जो ख़ुमार उसकी आँखों में है, वो किसी मय में नहीं।
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मेरी  इस  बे-रंग  ज़िन्दगी  में,  अब कोई 'रंग' बाक़ी न रहा,
जाम उल्फ़त के जो आँखों से पिलाता था, वो साक़ी न रहा
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कौन  कमबख़्त  कहता  है,  कि  शराब  हर  'ग़म'  भुला देती है,
दो घूँट हलक से उतारकर तो देखो, सब-कुछ याद दिला देती है।
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नशा शराब का हो  या शबाब का, उतर ही जाता है,
मदहोशी का वादा, होश आने पर मुकर ही जाता है।
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जाता तो कहाँ जाता मैं, ग़र मय-कदा न चुनता,
कौन था मेरा यहाँ, जो मेरा दर्द-ए-दिल सुनता।
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Bin piye hi botal sharab ki maikhane - Sharab Shayari - Marudhar RAHI

बिन पिये ही बोतल शराब की, मैख़ाने में तोड़ दी हमने,
देखकर तेरे गुरूर की हद, तेरी 'तमन्ना' ही छोड़ दी हमने।
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भरकर  जाम  सुराही  से  आँखें बंद कर पी गये,
मिली ना जब ख़ुशियाँ तो ग़म मिलाकर पी गये,
ज़िन्दगी  जीने  के  क़ाबिल  तो न थी मेरे दोस्त,
फिर भी हम इक ज़िन्दगी  मर-मर कर जी गये।
🥀💔😪😭

तन्हाइयों  की  हर सुबहो शाम दे गया,
आँखों  में अश्क़  हाथों में जाम दे गया,
यहाँ कोई किसी का हम-दर्द नहीं होता,
जाते-जाते  कोई मुझे ये पैग़ाम दे गया।
😌😞😴

छोड़ दिया हमने वो मैख़ाना और मय,
जहाँ बुझ न पाई तेरी 'यादों' की शय। 
🥀💔😪





  • - मरुधर राही ✍️