कौन कमबख़्त कहता है, कि शराब हर "ग़म" भुला देती है, दो घूँट हलक से उतारकर देखो, सब-कुछ याद दिला देती है। Kaun k…
Read more »"ऐ ज़िन्दगी", तेरे सारे सितम माफ़ कर दूँ मैं.., बशर्ते, दम जब निकले तो यार की बाहों में निकले। "Aye zindag…
Read more »कोई देदे "सज़ा" मुझें मेरे अपने ही गुनाहों की.., मैंने अपनी ही ख़्वाहिशों का बेरहमी से गला घोंटा है। Koi dede &…
Read more »उसने कुछ लोगों से, झूठी उम्मीदें लगा ली होगी 'मुर्शद', वरना उसे यूँ हार कर, मौत को ना गले लगाना पड़ता..! Usne ku…
Read more »वक़्त के साथ-साथ 'ग़म' तेरी बेवफाई का, दम-ब-दम मिलेगा, अब तो राख़ होने पर ही बेवफा, मुझें तेरे दर्द का मरहम मिलेगा…
Read more »खो गया है दिल का मेरे सुकून कहीं, खुशियों का कहीं अता पता नहीं, ज़िन्दगी सितम पर सितम किये जा रही है, और क्या है ख़ता पता…
Read more »कोई दखल-अंदाज़ी ना करे हमारी ख़ामोशियों से.., हम अभी अपनी ख़्वाहिशों की 'मय्यत' सजा रहे हैं। Koi dakhl-andazi naa …
Read more »मत पूछ मेरे यारा, कितने 'टुकड़ों' में जिये हैं ज़िन्दगी हम तेरे जाने के बाद.., कभी आँसू कभी तड़प कभी याद, कभी दर्द…
Read more »भरकर जाम सुराही से आँखें बंद कर पी गये, मिली ना जब ख़ुशियाँ तो ग़म मिलाकर पी गये, ज़िन्दगी जीने के क़ाबिल तो न थी मेरे दोस्…
Read more »ख़ुद अपने ही दिल को अपने हाथों, फिर इस क़दर इतने 'दिलासे' ना रहते, मिल जाती ग़र दो घूँट जो वफ़ा की, तो मोहब्बत के…
Read more »ना तीर से ना तलवार से, और ना ही किसी हथियार से, मैंने देखा है इक शख़्स को मरते हुए, महज़ शब्दों के वार से। Naa teer se na…
Read more »जी तो रहा हूँ मैं ज़िन्दगी, पर जीने का कोई मौल नहीं, मेरे घर में मेरे यार, "घर" जैसा कोई माहौल नहीं..!! Jee to…
Read more »जिसके 'नाम' हमने अपनी ज़िन्दगानी कर दी, अफ़सोस... उसी ने अधूरी मेरी कहानी कर दी। Jiske 'naam' humne apni …
Read more »जीवन इतना सरल और सहज भी नहीं है, यहाँ हर चीज़ की कीमत चुकानी पड़ती है, मरने तक जिंदा रहकर, ख़ुद अपने ही कंधों पे अपनी जिंद…
Read more »किन 'लफ़्ज़ों' में समझाए अब हम यार, ये उस संगदिल को, कोई रास ही नहीं आता उसके सिवा, कमबख़्त इस दिल को। Kin 'la…
Read more »चार दिन की ज़िन्दगी में महज़ पल दो पल की हँसी थी, बाकी कभी दर्द कभी आँसू तो कभी बेकसी बेबसी थी। Char din ki zindagi mein …
Read more »एक ही लफ़्ज़ को हमने, कई मर्तबा पढ़-पढ़ के लिखा, अफ़सोस... जो भी लिखा, लिए इक अनपढ़ के लिखा। Ek hi lafz ko humne, kai martba …
Read more »आज भी "सुना" पड़ा है दिल का मेरा वो हर इक कोना.., जहाँ बरसों पहले किसी की चाहत के गुल खिला करते थे। Aaj bhi &q…
Read more »वो समझती है बे-मुरव्वत, कि हमने उसे अब मुक़म्मल भुला दिया, कोई समझाये उस बेवफ़ा को, कि राख़ में कभी आग नहीं लगती। Woh samj…
Read more »मत पूछ मेरे यार "तन्हा" ज़िन्दगी हम कैसे गुज़ारे हैं, दिल के जज़्बातों को रो-रो कर काग़ज़ पर उतारे हैं। Mat poochh…
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