कोई बतलाये हमको, वो किस किस्म के लोग कहलाते हैं, जो अपनेपन का ढोंग रचाकर, अपनों को ही डस जाते हैं। Koi batlaye humko, w…
Read more »कभी अपनो से थोड़ी सी नाराज़गी तो जताकर देखो तुम, बहुत से लोग आएंगे 'साहिब', जलते दिये में घी डालने को। Kabhi apno…
Read more »माथे की हर लकीर मिट गई 'महादेव', तेरे दर पर सर रगड़ते-रगड़ते, फिर भी तकदीर की वो तहरीर ना मिटी, जिस में तूने ग़म ल…
Read more »क्या मेरी आँखों का पानी इतना सस्ता है "महादेव"..., कि जिनके गिरने का तुझे कभी अहसास ही ना हुआ। Kya meri aankh…
Read more »भाव गहरे हो तो अल्फ़ाज़ समझ नहीं आते, मुख़्तलिफ़ हो चहरे तो राज़ समझ नहीं आते, जिनकी नीयत और फ़ितरत में हो दग़ा करना, उन्हें फ़…
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