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150+ Bewafa Shayari in Hindi | Bewafa Sad Shayari | MyAlfaaz

प्यार में हर शख्स वफ़ा की उम्मीद रखता है, पर जब वही महबूब बेवफ़ा निकल जाए तो दिल पर जो क़यामत टूटती है उसे लफ़्ज़ों में बयां करना आसान नहीं होता। नमस्कार दोस्तों, MyAlfaaz पर मैं मरुधर राही आपके उसी इश्क़ के दर्द के लिए लाया हूँ Bewafa Shayari in Hindi का सबसे दर्दनाक कलेक्शन।

दिल तोड़ने वाली Bewafa Shayari

Bewafa Shayari - Wo Samajhti Hai Be Murawat Ki Humne Use Bhula Diya by Marudhar Rahi
वो समझती है बे-मुरव्वत कि, हमने उसे अब मुक़म्मल भुला दिया,
कोई समझाये उस बेवफ़ा को कि, राख़ में कभी आग नहीं लगती।
कुछ तेरी आँखों की ख़ता थी यार, तो कुछ मेरे दिल की नादानी थी,
मोहब्बत का हम वही पन्ना खोल बैठे, जिसमें अधूरी हर कहानी थी।
दिए हैं जो ज़ख्म तूने मुझे बेवफ़ा, वक़्त के साथ वो अब भर गए हैं,
तुम लौटकर कभी न वापस आना, दिल के अब जज़्बात मर गए हैं।
आरज़ू-ए-उल्फ़त में किसी की, दिल फिर बेक़रार ही ना हुआ,
जो हुआ तुमसे बेवफ़ा, हमें फिर वो किसी से प्यार ही ना हुआ।
हमने अपना सब-कुछ, तो फिर तुमने भी कुछ तो खोया होगा,
होकर जुदा मुझसे तुझे बेवफ़ा, इतना एहसास तो होया होगा।
हर तमन्ना दिल से मेरे फ़िर, ख़ुद-ब-ख़ुद रुख़सत हो गई,
मुझसे ज़्यादा उस बेवफ़ा को, ग़ैरों जब की ज़रूरत हो गई।
वक़्त के साथ 'ग़म' तेरी बेवफाई का, दम-ब-दम मिलेगा,
अब तो राख़ होने पर ही बेवफा, तेरे दर्द का मरहम मिलेगा।
कुछ इस तरहा से तबाह हमने, अपनी ही ज़िन्दगी कर ली,
इक बेवफ़ा हरजाई संग, दिल से उसकी 'बन्दगी' कर ली।
ये फ़ितरत थी तेरी बेवफ़ा, या फिर थी वक़्त की कोई साज़िश,
मिट्टी में मिलने से पहले, मिट्टी में मिला दी मेरी हर ख़्वाहिश।
बे-वज़ह बे-सबब बे-ख़ता, ख़ुद को हमसे ख़फ़ा कर बैठे हैं,
करके बेवफ़ाई हम से, वो अब रक़ीबों संग वफ़ा कर बैठे हैं।
हँसती-खेलती ज़िन्दगी मेरी, जाने फिर कहाँ लापता हो गई,
इक बेवफ़ा को बे-इंतिहा चाहने की, जब मुझसे ख़ता हो गई।
मिलने की कोई उम्मीद भी न थी, फिर भी बरसों इंतज़ार किया,
तुमसे जुदा होकर भी बेवफ़ा, मैंने फ़क़त 'तुम्ही' से प्यार किया।
लेकर दिल के इतने टूटे टुकड़े, जाऊँ तो किधर ही जाऊँ मैं,
तू कर कोई ऐसी दुआ मेरे बेवफ़ा यार कि, मर ही जाउँ मैं।

टूटकर हर ख़्वाब आँसुओं का समन्दर बन गया Bewafa Sad Shayari

Bewafa Shayari - Tootkar Har Khwab Aansuon Ka Samandar Ban Gaya Tera Dard Hi Bewafa Ab Mera Mukaddar Ban Gaya by Marudhar Rahi
टूटकर हर ख़्वाब आँसुओं का समंदर बन गया,
तेरा 'दर्द' ही बेवफ़ा, अब मेरा मुक़द्दर बन गया।
जिस्म तो मिल ही जाएंगे तुम्हें कई बाज़ार में..,
ग़र मिले रूह से रूह कहीं, तो बताना हमको बेवफ़ा।
जितनी भी थी वफ़ा वो इक बेवफ़ा पे लुटा बैठे हैं,
हम अपने ही हाथों ख़ुद अपनी हस्ती मिटा बैठे हैं।
ज़ख़्म ऐसा दिया उसने, जो कभी भर न पाया,
ख़याल तो कई मर्तबा आया, पर मैं मर न पाया।
ग़र होते जो ख़फ़ा तो हम मना भी लेते,
अफ़सोस कि तुम तो बेवफ़ा ही हो गए।
साँसों का कारवां जब तलक चलता रहेगा,
तेरी याद में बेवफ़ा दिल मेरा जलता रहेगा।
नाम-ए-उल्फ़त हम ऐसी वाहियात कर बैठे,
इक हरजाई के हवाले अपनी हयात कर बैठे।
भरी महफ़िल में आँखें डबडबा जाती है,
इक बेवफा की याद जब हमें आ जाती है।
दिल पे पत्थर रखना पड़ता है साहिब,
यार को 'बेवफ़ा' नाम देने से पहले..!
तू बेवफ़ा ही नहीं वो आईना भी है,
जिसने मुझे मुझसे ही मिलाया है।
सोचता हूँ तुझे कितना लिखूँ,
तू रो पड़े, बस इतना लिखूँ..!
वो अपने दिल पर 'पत्थर' रखकर सोते हैं,
जुदा जो अपने यार की बेवफ़ाई में होते हैं।
कौन कमबख़्त चाहता है, ग़म-ए-जुदाई मिले,
बशर्ते, वफ़ा के बदले न कभी बेवफ़ाई मिले।
अब न कोई ख़्वाब और न ही कोई ख़्वाहिश है,
ख़ुशी है तो फ़क़त इतनी कि बेवफ़ा तू खुश है।
बे-मौत मर गए वो आशिक़ बेवफ़ाई के दर्द से,
जान से बढ़कर जिन्होंने अपनी जान को चाहा।
मेरी वफ़ा की उस बेवफ़ा ने, ऐसी कीमत चुकाई है,
कि इक अरसे से हमको, हिचकी तक नहीं आई है।
तुम 'क़त्ल' भी करते ग़र हमारा, तो हर गुनाह माफ़ था,
तुम बेवफ़ाई कर बैठे, जो हमारे उसूलों के ख़िलाफ़ था।
कैसे रह पाएँगे 'मरूधर राही', उसके बग़ैर अब हम ज़िंदा,
प्रीत लगाकर हमसे, उड़ गया इक बे-मुरव्वत परिंदा।
वो कौनसी ख़ता थी मेरी, जिससे तू ख़फ़ा हो गई,
पढ़ाकर मुझे वफ़ा का पाठ, तू ख़ुद बेवफ़ा हो गई।
ख़ुदा करे, कभी ना तेरी ज़िंदगी में वो लम्हा आए,
मेरी तरह दुनिया की भीड़ में, तू ख़ुद को तन्हा पाए।

दर्द भरी Bewafa Shayari - By Marudhar Rahi

Bewafa Shayari - Karobar Teri Yaadon Ka Bewafa Dam Ba Dam Ho Raha Hai by Marudhar Rahi
कारोबार तेरी 'यादों' का बेवफ़ा, दम-ब-दम हो रहा है,
जिसमें हर्ज़ और मर्ज़ बे-हिसाब, मुनाफ़ा कम हो रहा है।
उस बेवफ़ा ने इक पल न लगाया दिल को मेरे तोड़ने में,
और हमने अपनी उम्र गुज़ार दी उन टुकड़ों को जोड़ने में।
हर ख़्वाब मेरा आईने की तरह टूटकर फिर बिखर गया,
होकर बेवफ़ा हम-सफ़र वादों से जब अपने मुकर गया।
हमको नहीं है ज़माने की कोई ख़ैर-ओ-बद की ख़बर,
हम तो इक बेवफ़ा की यादों में 'मशगूल' रहा करते हैं।
जज़्बातों का मेरे सरे-राह, यूँ क़त्ल-ए-आम कर गए,
वो ख़ुद बेवफ़ा होकर, मेरी वफ़ा को बदनाम कर गए।
फ़क़त एक ही ख़्वाब देखा है आँखों ने मेरी बेवफ़ा,
क़यामत तक ख़ुशियाँ कम न हो कभी तेरी बेवफ़ा।
मत पूछ मेरे यार ज़िन्दगी किस हाल में गुज़र रही है,
इक बेवफ़ा के ख़याल और मलाल में गुज़र रही है..!
दिल ने हमारे यार, हमसे ही बड़ी बेमानी की है,
इक बेवफ़ा के नाम, मुक़म्मल ज़िन्दगानी की है।
तुमसे दूर होने का हमारा कोई इरादा न था,
अफ़सोस, साथ रहने का तेरा कोई वादा न था।
माना कि मेरे यार कुछ ग़लतियाँ हुई होगी हमसे,
पर सज़ा में बेवफ़ाई दोगे ये न उम्मीद थी तुमसे।
अब न आऊँगा मैं लौटकर, फ़िर से तेरी 'हयात' में..,
देखी है मैंने मक्कारी और ग़द्दारी, बेवफ़ा तेरी जात में।
रक़ीबों से मिलकर वो बेवफ़ा, जब मेरे रू-ब-रू आई,
तो उसके हर लहज़े से, फ़क़त बेवफ़ाई की बू आई..!!

ये कैसी मेरे दिल की बेकसी बेबसी है Bewafa Shayari

Bewafa Shayari - Ye Kaisi Mere Dil Ki Bekasi Bebasi Hai Tu Bewafa Hokar Bhi Dil Me Mere Basi Hai by Marudhar Rahi
ये कैसी मेरे दिल की बेकसी बेबसी है,
तू बेवफ़ा होकर भी दिल में मेरे बसी है।
तेरी ही गली तेरा ही शहर ढूंढते हैं,
शाम-ओ-सहर ही नहीं आठों पहर ढूंढते हैं,
होकर जुदा हम तुझसे बेवफ़ा,
पानी में भी फ़क़त ज़हर ढूंढते हैं।
मिलन होता है जुदाई होती है,
उल्फ़त में वफ़ा और बेवफ़ाई होती है,
कुछ बद-नसीब ऐसे भी होते हैं,
किस्मत में जिनके सिर्फ़ तन्हाई होती है।
उल्फ़त का मैं इक घायल परिंदा हूँ,
वफ़ा करके इक बेवफ़ा से ख़ुद से ही शर्मिंदा हूँ,
अक्सर लोग जिन हालातों में मौत को गले लगा लेते हैं,
उन्हीं हालातों में मैं ज़िंदा हूँ।
होकर जुदा तुमसे अब कैसे रह पाऊंगा,
तेरे हिज़्र का ग़म तन्हा कैसे सह पाऊंगा,
ग़र पूछेगा ज़माना मेरी खैरियत बेवफ़ा,
हाल-ए-दिल अपना कैसे कह पाऊंगा।
साँसों में मेरे कोई इस क़दर समाया है,
दिल की हर दीवार पे उसी का साया है,
अफ़सोस, उसी ने हमें अपना बनाकर,
बेरहमी से बेगानों की तरह ठुकराया है।
आँखों में अश्क़ दिल उदास लिए फिरता हूँ,
ज़माने के सारे ग़म अपने पास लिए फिरता हूँ,
होकर जुदा अपने बेवफ़ा हम-सफ़र यार से,
अपने ही कंधों पे अपनी लाश लिए फिरता हूँ।
हँसती आँखों को अश्क़ों की बरसात दे गया,
तन्हाईयों के दिन ग़मों की काली रात दे गया,
कोई अपना ही अपना-अपना कहकर हमको,
वफ़ा के बदले बेवफ़ाई की 'सौग़ात' दे गया..!
ऐ मेरे दिल-ए-नादाँ, अब तू न मुझसे कोई सवाल कर,
याद रख, छोड़ दिया उस बेवफ़ा ने तुझे तेरे हाल पर,
अब तू अपनी बर्बादियों का मातम मना या आँसू बहा,
पर इल्म रहे, कोई नहीं रोने वाला अब तेरे मलाल पर।
उसने मुझे अपने दिल की किताब में बहुत कम लिखा,
पहले पन्ने पर सनम आख़िरी पन्ने पर फ़क़त ग़म लिखा,
उठा लाए हम उस किताब को और हर ख़ाली पन्ने पर,
उस बेवफ़ा हरजाई का हर ज़ुल्म-ओ-सितम लिखा...!!

ये ख़ता थी मेरी जो मैं तेरी कहानी में आ गया Bewafa Shayari - Marudhar Rahi

Bewafa Shayari - Ye Khata Thi Meri Jo Main Teri Kahani Me Aa Gaya Tera Dard Bewafa Meri Mukammal Jawani Kha Gaya by Marudhar Rahi
ये ख़ता थी मेरी जो मैं तेरी कहानी में आ गया,
तेरा दर्द बेवफ़ा मेरी मुक़म्मल जवानी खा गया।
इक बेवफ़ा बे-मुरव्वत हरजाई की चाहत में यार,
दिल खोया ही नहीं, सिसक-सिसक कर रोया है।
जाना है तो जा 'बेवफ़ा' कोई दुहाई ना दूंगा मैं,
तेरी ख़ुशी के लिए तेरी जुदाई भी सह लूंगा मैं।
क्या गिला क्या शिक़वा और क्या ही अब रोना,
प्यार की फ़ितरत ही है जब बेवफ़ाओं से होना।
रोज़ राह तकता है इक परिंदा अपने हम-सफ़र की,
जो ख़फ़ा ही नहीं, बेवफ़ा भी होकर चला गया..!!
कमबख़्त हम तो अपने ही दिल के हाथों मजबूर थे,
वरना उस बेवफ़ा के ख़यालों से तो हम मीलों दूर थे।
करनी ही थी यार बेवफ़ाई, तो थोड़ा और ठहर जाते,
क्या पता तब तक हम, किसी हादसे में ही मर जाते।
ज़िन्दगी को जीना फिर इतना भी दुशवार न होता,
ग़र हमकों इक बेवफ़ा से बे-इन्तिहा प्यार न होता।
ग़र होता कोई मर्ज़, तो दिखाते किसी 'हकीम' को,
हमें तो इक बेवफ़ा की चाहत की, लत लगी थी यार।
कभी सोचा ही न था कि, मिलकर हम फ़िर जुदा होंगे,
नाम-ए-वफ़ा वो बेवफ़ा, कभी रक़ीबों पर फ़िदा होंगे।
आती है हंसी मुझको तो अब मेरे ही बिगड़े हालात पर,
कैसे यक़ीं कर बैठा मैं इक बेवफ़ा की झूठी हर बात पर।
चाहत ही न रही बेवफ़ा मुझे अब कोई नूरे-सहर की,
ये रूह तलबगार भी है तो फ़क़त दो क़तरे ज़हर की..!
मुक़म्मल न हुई कोई आरज़ू, अधूरी ही रही मेरी हर हसरत,
समझ नहीं आ रहा कि, बेवफ़ा तुम थे या फिर मेरी क़िस्मत।
तेरी ख़ुशी के लिए मेरी 'जान', हम तो हँसते-हँसते मर जाते,
अच्छा होता बेवफ़ाई से पहले, हमको थोड़ा ज़हर देकर जाते।
इससे पहले कि तू मुझे दर्द देने की इंतिहा कर दे, बेवफ़ा...
डरता हूँ कि कहीं मेरी आह तुझे तबाह न कर दे, बेवफ़ा...
कोई ये न पूछे अब हमसे, ज़ख़्म दिल पर इतने कैसे लगे,
कुछ दिल-फ़रेब लोग हमको, हमारे जैसे ही मासूम लगे।
अब उस बेवफ़ा हरजाई को, भुलाए भी तो किस अदा से,
जिसे सजदों में माँगा किया करते थे, कभी अपने ख़ुदा से।
मेरे उसूलों की किताब में सब-कुछ माफ़ी के क़ाबिल था,
फ़क़त इक 'बेवफ़ाई' को छोड़कर...!!

तुम आना लेकर दो आंसू मेरी लाश पे Bewafa Sad Shayari

Bewafa Shayari - Tum Aana Lekar Do Aansu Meri Laash Pe Safar Mera Aakhiri Gamgin Hokar Haseen Ho Jayega by Marudhar Rahi
तुम आना लेकर दो आँसू मेरी लाश पे, सफ़र मेरा आख़िरी ग़मगीन होकर हसीन हो जाएगा,
और मेरे जनाज़े पर ज़्यादा मातम न करना बेवफ़ा, वरना लोगों का 'शक़' यक़ीन हो जाएगा।
खाकर मोहब्बत की कुछ झूठी कसमें, तेरा तो दिल भी बहल गया और वक़्त भी गुज़र गया,
पर मेरा क्या बेवफ़ा, जो करके तुझ पे ऐतबार सब-कुछ संवर कर फिर से मेरा बिखर गया।
ख़्वाबों ख़यालों में भी कभी हमारे, उसके सिवा किसी की परछाई तक पास न आई,
अफ़सोस... फिर भी उस बेवफ़ा, बे-मुरव्वत, हरजाई को हमारी 'वफ़ा' रास न आई।
हर ज़ख़्म हरा होकर तमाम यादें जवां हो जाती है, जब भी हवा पुरवाई चलती है,
कभी आकर पूछ मेरी आँखों के अश्कों से बेवफ़ा, मुझे तेरी कितनी कमी खलती है।
फ़क़त इतना तो बता दो संगदिल, कहाँ तक दिल को मेरे तुम यूँ ही दुःखाओगे,
कहीं हम मर गए जो तुम्हारी बेरुख़ी से, तो क्या तुम ख़ुद से नज़रे मिला पाओगे।
पहले गीत वफ़ा के गाता था, अब नग़मे बेवफ़ाई के गुनगुना रहा हूँ मैं,
डुबोकर ग़म की स्याही में दर्द की कलम, दास्ताँ-ए-दिल कागज़ को सुना रहा हूँ मैं।
नहीं देखा जाता मुझसे बेवफ़ा, तेरी आँखों से दर्द का इक क़तरा भी बहता,
तुझे मेरी आँखों का समन्दर भी दिखाई न दे, तो ये तेरी आँखों की है ख़ता।
इतने नज़राने न देकर जाओ तुम यार हमको, वफ़ा के बदले बेवफ़ाई में,
शिकस्ता दिल के कुछ टुकड़े तुम भी ले जाओ, दिल बहल जाएगा तन्हाई में।
खो ही दिया आख़िर उस बे-मुरव्वत ने हमको, रोज़ आज़माते-आज़माते,
हम भी थक गए थे यार, उस बेवफ़ा पर अपना झूठा हक़ जताते-जताते।
बहुत दर्द देता है कमबख़्त, ये तेरा ग़ैरों से हँस-हँसकर बातें करना,
ख़ुदा ख़ैर करे बेवफ़ा, जब तू कभी मेरी तरह इस दर्द से होकर गुज़रे।
'काश'... इतना तो सोचा होता तूने बेवफ़ा, बेवफ़ाई करने से पहले,
कोई है जो हर-पल जीता है, फ़क़त इक हमें देखकर मरने से पहले।
काश... कि बेवफ़ा तेरी यादों पर, कुछ तो वक़्त का पहरा होता,
तो ज़ख्म दिल का न मेरा फिर, दिन-ब-दिन यूँ और गहरा होता।
ये तो नसीबों की लड़ाई थी, जिसे हम वफ़ा करके भी हार गए,
तुम ठहरे ख़ुश-नसीब, जो बावजूद बेवफ़ाई के बाज़ी मार गए।
हमें तो उस बेवफ़ा की 'वफ़ा' पर यार, बहुत पहले ही शक था,
और उसे हम वफ़ा सिखाते, इतना न उस पर मेरा कोई हक़ था।

लोग जब भी बेवफा तेरा नाम लेते हैं Bewafa Shayari

Bewafa Shayari - Log Jab Bhi Bewafa Tera Naam Lete Hain Hum Aah Bharkar Dil Thaam Lete Hain by Marudhar Rahi
लोग जब भी बेवफ़ा तेरा नाम लेते हैं,
हम आह भरकर दिल थाम लेते हैं..!!
ग़र मसला तेरी रुसवाई का न होता 'बेवफ़ा',
तो अपने हर आँसू पर हम तेरा नाम लिख देते।
दूर रखना ख़ुदा उसको हर रंज-ओ-ग़म से,
बेवफ़ाई करके जो चला गया है अब हमसे..!
जब भी तेरे गलियारों से गुज़रता हूँ बेवफ़ा,
तो कमबख़्त दिल बग़ावत पे उतर आता है।
बेशक़ मौत आ जाए 'मुर्शद',
पर किसी बेवफ़ा पे दिल, तौबा-तौबा।
आधी दुनिया तो इसी ग़म में डूबी है,
क्यों की बेवफ़ाई उसमें क्या ख़ूबी है।
इक बेवफ़ा से जो वफ़ा कर बैठे,
ख़ुद को ख़ुद से 'ख़फ़ा' कर बैठे।
हमने निभाई है वफ़ा उनसे वहाँ तक,
बे-ख़बर थे उनकी बेवफ़ाई से जहाँ तक।
उस बेवफ़ा ने दिल ही इतना दुखाया है,
कि अब तो दिल का भी दिल भर आया है।
वो ख़ूब-सूरत तो बहुत हैं, पर 'वफ़ादार' नहीं,
और बेवफ़ाओं के हम, हरगिज़ तलबगार नहीं।
इतने रंग तो 'कायनात' में भी नहीं हैं मेरे यार,
जितने हमने उस बेवफ़ा की फ़ितरत में देखे हैं।
तहे-दिल से शुक्रिया उस बेवफ़ा यार का,
जिसने फलसफ़ा ही बदल दिया प्यार का।
हम तो 'मर' ही जाते यार तेरी बेवफ़ाई से,
ग़र तेरी रुसवाई का ख़याल न आया होता।
वो क्या ख़ाक समझेंगे वफ़ा की कीमत मेरे यार,
जो ख़ुद बेवफ़ाओं को 'तवज्जो' दिया करते हैं..!!
अब नहीं खेलनी 'मुर्शद', हमें इश्क़ की बाज़ी,
बेवफ़ाई के बग़ैर, इसमें जीत मुमकिन नहीं..!
साहिब हम बे-मुरौवती के उस 'दौर' में जी रहे हैं,
जिसमें ज़्यादातर लोग बेवफ़ाई के आँसू पी रहे हैं।

बर्बादियों का किस्सा अपना Bewafa Sad Shayari

Bewafa Shayari - Barbadiyon Ka Kissa Apna Zamane Me Aam Na Karunga Tu Be-Fikra Rah Bewafa Tujhko Kabhi Badnaam Na Karunga by Marudhar Rahi
बर्बादियों का किस्सा अपना, ज़माने में आम ना करूँगा,
तू बे-फ़िक्र रह बेवफ़ा, तुझको कभी बदनाम ना करूँगा।
हम भी लिखते तेरे हर ज़ुल्म-ओ-सितम की दास्ताँ बेवफ़ा,
पर तु ज़माने में रूसवा हो, ये हमको हरगिज़ मंज़ूर नहीं..!!
ग़र है ये कोई ख़ता, तो फिर तू ये आख़िरी ख़ता ही करले,
ज़िंदा हूँ या मर गया कहीं, बेवफ़ा तू इतना पता ही करले।
क्या वफ़ा और क्या बेवफ़ा, जब क़िस्मत अपनी हो ख़फ़ा,
मुद्दई लाख कोशिशें करले, हिस्से में फ़क़त जफ़ा ही जफ़ा।
काश... कि वक़्त की आँधी अब ऐसी चले बेवफ़ा,
मैं मर जाऊं और फिर तुझे मेरी कमी खले बेवफ़ा।
जो था दिल का मुक़म्मल क़रार, वही मुसलसल मलाल हो गया है,
उस बेवफ़ा से बिछड़े हमको यारों, आज पूरा इक साल हो गया है।
नफ़रत ऐसी कि उस बेवफ़ा की, सूरत तक देखना अब हमको गवारा नहीं,
और आँखों की मेरी ऐसी बेबसी, के ज़माने में उसके सिवा कुछ दिखता नहीं।
तड़पती है साँसें बरसती है आँखें, और दिल भी खोया-खोया सा रहता है,
इक शख्स तेरे जाने के बाद बेवफ़ा, महफ़िलों में भी रोया-रोया सा रहता है।
कितने ख़्वाब, कितनी तमन्नाएँ और न जाने कितनी ही हसरतें अधूरी रह गईं,
हरजाई, तेरी बेवफ़ाई के मातम में, मेरी हर ख़्वाहिश अश्क बनकर बह गई।

पल-पल कोसता रहता हूँ मैं उस पल को Bewafa Shayari

Bewafa Shayari - Pal-Pal Kosta Rehta Hun Main Us Pal Ko Jis Pal Us Bewafa Se Pehli Dafa Mulakat Hui by Marudhar Rahi
पल-पल कोसता रहता हूँ मैं उस 'पल' को,
जिस पल उस बेवफ़ा से पहली दफ़ा मुलाक़ात हुई।
जिनको रास आता हो बेवफ़ाई का लिबास प्यार में,
जाकर खोल लें तवायफ़ खाना वो किसी बाज़ार में।
आख़िर कितना मातम करूं बेवफ़ा तेरी बेवफ़ाई का,
कि ये जीस्त-ओ-जां भी मुझसे तेरी तरह तौबा करले।
उसने दूर ही नहीं यार मजबूर भी किया है हमें,
वरना हमें तो उस बेवफ़ा के झूठे वादों पर भी ऐतबार था।
हमने तो फ़क़त 'वफ़ा' करना ही सिखाया था उन्हें,
मालूम नहीं बेवफ़ाई करना कौन सिखा गया उन्हें।
हरजाई तेरी बेवफ़ाई की भी बड़ी पज़ीराई है,
फ़ितरत में न यार मेरे तेरी कोई 'रुसवाई' है।

नादाँ है दिल Bewafa Shayari - Marudhar Rahi

Bewafa Shayari - Humko Malum Hai Ki Wo Bewafa Hai Par Dil To Unhi Ko Chahta Hai Nadan Hai Kambakht Dil Jo Ek Bewafa Se Umeed E Wafa Chahta Hai by Marudhar Rahi
हमको मालूम है कि वो बेवफ़ा है, पर दिल तो उन्हीं को चाहता है,
नादाँ है कमबख़्त दिल, जो इक बेवफ़ा से उम्मीद-ए-वफ़ा चाहता है।
ना सेहरा सजा ना मेहन्दी लगी, और ना ही कोई मिलन की रात आई,
दिल में कसक उठकर आँखें भर आई, जब भी उस बेवफ़ा की बात आई।
क़ाफ़िला लगा था उसके चाहने वालों का, जिनमें वो फ़क़त अपना नफ़ा ढूंढ रहे थे,
और हम नादाँ थे जो नाम-ए-उल्फ़त, इक बेवफ़ा हरजाई में अपनी वफ़ा ढूंढ रहे थे।
कल हम रहें या ना रहें पर ये ज़माना रहेगा,
दिल मेरा तेरा दीवाना था वो दीवाना रहेगा,
मरकर भी न भूलेंगे हम तुझको कभी बेवफ़ा,
आख़री साँस तक लबों पे मेरे तेरा फ़साना रहेगा।
- मरुधर राही ✍️

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