मोहब्बत में जब दिल को सिवाय दर्द और तन्हाई के कुछ हासिल न हो, तो हर धड़कन एक अधूरी कहानी बन जाती है। नमस्कार दोस्तों, My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ Love Sad Shayari in Hindi का सबसे दर्द भरा कलेक्शन। यहाँ आपको Love Sad Shayari, Dard Bhari Love Shayari और Bewafa Love Shayari मिलेगी जो आपके टूटे दिल के हर जज़्बात को बयां कर देगी।
Love Sad Shayari in Hindi by Marudhar Rahi
जिन्हें हम खोकर रोये..,
वो किसी और के होकर रोये।
वो किसी और के होकर रोये।
उसे मेरी बन्दगी रास न आई,
और उसके बग़ैर मुझे ज़िन्दगी।
और उसके बग़ैर मुझे ज़िन्दगी।
मुक़म्मल ज़िन्दगी 'तबाह' हो गई,
कमबख़्त पल दो पल के इश्क़ में।
कमबख़्त पल दो पल के इश्क़ में।
खुल गया उनकी आरज़ू में ये राज़,
जीस्त अपनी नहीं 'पराई' है यार..!
जीस्त अपनी नहीं 'पराई' है यार..!
हम वाकिफ़ थे जिनके हर हाल से,
वही बे-ख़बर निकले मेरे मलाल से।
वही बे-ख़बर निकले मेरे मलाल से।
Manzil To Tu Hi Thi Meri - Marudhar Rahi
मंज़िल तो 'तू' ही थी मेरी..,
बस तुम्हें मेरी मुफ़लिसी रास न आई।
बस तुम्हें मेरी मुफ़लिसी रास न आई।
ज़ुल्म-ओ-सितम हमारे हिस्से में ये भी क्या खूब आया,
फ़क़त हमें छोड़कर हर किसी के हिस्से में महबूब आया।
फ़क़त हमें छोड़कर हर किसी के हिस्से में महबूब आया।
मिलकर बिछड़ना तो फिर यार, हमारी ही तक़दीर थी,
ना तेरे ना मेरे हाथ में, हमारे वस्ल की कोई लकीर थी।
ना तेरे ना मेरे हाथ में, हमारे वस्ल की कोई लकीर थी।
ग़र जाना ही है तुम्हें तो जाओ, कोई 'दुहाई' न देंगे हम,
तुम्हारी ख़ुशी के लिए, तुम्हारी जुदाई भी सह लेंगे हम।
तुम्हारी ख़ुशी के लिए, तुम्हारी जुदाई भी सह लेंगे हम।
बड़ी हसरत थी पहलू में तेरे सर रखकर सोने की,
जो इक सबब बनकर रह गई ता-उम्र मेरे रोने की।
जो इक सबब बनकर रह गई ता-उम्र मेरे रोने की।
तमाम ख़्वाहिशें मेरी फ़िर बे-मौत ही मर जाती है,
क़रीब से मेरे जब वो मुँह फेर कर गुज़र जाती है।
क़रीब से मेरे जब वो मुँह फेर कर गुज़र जाती है।
जाने किसकी नज़र लगी, मेरे उल्फ़त के आशियाने को,
कोई वज़ह ही न रही, आँसुओं के सिवा मुस्कुराने को।
कोई वज़ह ही न रही, आँसुओं के सिवा मुस्कुराने को।
इश्क़ के बग़ैर तो ज़िन्दगी फ़क़त इक गुनाह सी लगती है,
ग़र दे कोई लम्बी उम्र की दुआ तो वो बद्दुआ सी लगती है।
ग़र दे कोई लम्बी उम्र की दुआ तो वो बद्दुआ सी लगती है।
उनको ख़बर ही कहाँ है कि, किस क़दर हम जिया करते हैं,
हम तो बस आह भरकर, हसरतों का क़त्ल किया करते हैं।
हम तो बस आह भरकर, हसरतों का क़त्ल किया करते हैं।
कैसे रह पाएँगे 'मरूधर राही', अब हम बग़ैर उसके ज़िंदा,
प्रीत लगाकर हमसे, उड़ गया इक बेवफ़ा बेमुरव्वत परिंदा।
प्रीत लगाकर हमसे, उड़ गया इक बेवफ़ा बेमुरव्वत परिंदा।
फ़ुर्सत ही नहीं है तेरे तसव्वुर से कि, हम कुछ कर जाए,
कहीं ऐसा न हो, ख़बर ही न हो तुम्हें और हम मर जाए।
कहीं ऐसा न हो, ख़बर ही न हो तुम्हें और हम मर जाए।
मैं भी करूँ नज़र-अंदाज़ तुझे तेरी तरह,
तू कभी तो मिल यार मुझसे मेरी तरह।
तू कभी तो मिल यार मुझसे मेरी तरह।
Aakhir Khud Ko Kitna Khoon Ki Tujhe Mukammal Pa Lu - Marudhar Rahi
आख़िर ख़ुद को कितना खोऊँ,
कि तुझे 'मुक़म्मल' पा लूँ...!!
कि तुझे 'मुक़म्मल' पा लूँ...!!
कुछ तो लिहाज़ कर मेरे ऐतबार का,
मुद्दतों से मुंतज़िर हूँ तेरे इक़रार का।
मुद्दतों से मुंतज़िर हूँ तेरे इक़रार का।
बड़ा अज़ीब है उस हरजाई का अंदाज़-ए-गुफ़्तगू,
अधरों पे कुछ तो नज़रों में है कुछ और ही जुस्तजू।
अधरों पे कुछ तो नज़रों में है कुछ और ही जुस्तजू।
लाज़मी था बहाना उसका वक़्त न मिलने का मेरे यार,
हमारे हिस्से का वक़्त वो जो किसी और को देने लगे..!
हमारे हिस्से का वक़्त वो जो किसी और को देने लगे..!
फ़क़त इतना ही ज़िक्र है, तेरा मेरे अफ़साने में,
तमाम उम्र गवा दी, बस इक शख़्स को पाने में।
तमाम उम्र गवा दी, बस इक शख़्स को पाने में।
मेरे मरने का तुम जरा भी रंज-ओ-ग़म न करना,
बे-वज़ह बेकार में अपनी ख़ुशियाँ कम न करना।
बे-वज़ह बेकार में अपनी ख़ुशियाँ कम न करना।
Afsos Ki Tere Adhro Pe Kabhi Mera Naam Nahi Aata - Marudhar Rahi
अफ़सोस... कि तेरे अधरों पे कभी मेरा नाम नहीं आता,
कमबख़्त मुझे तेरे 'नाम' के सिवा कोई काम नहीं आता।
कमबख़्त मुझे तेरे 'नाम' के सिवा कोई काम नहीं आता।
तुमने फ़क़त मेरा ऐतबार ही नहीं तोड़ा है 'पिस्ता',
ज़िन्दगी से साँसें भी छीन ली आहिस्ता-आहिस्ता।
ज़िन्दगी से साँसें भी छीन ली आहिस्ता-आहिस्ता।
मैं वो ना-मुराद बद-नसीब अभागा 'भिखारी' हूँ..,
जो हर-रोज़ तुझे ख़ुदा से झोली फ़ैलाकर माँगता हूँ।
जो हर-रोज़ तुझे ख़ुदा से झोली फ़ैलाकर माँगता हूँ।
'खुद-गर्ज' इस ज़माने की खुद-गर्ज़ी के बग़ैर,
मैं चाहता हूँ कोई चाहे मुझे मेरी मर्ज़ी के बग़ैर।
मैं चाहता हूँ कोई चाहे मुझे मेरी मर्ज़ी के बग़ैर।
इश्क़ इबादत है और इबादत है ग़र ख़ुदा..,
तो फिर मेरे इश्क़ से जुदा क्यूँ है मेरा ख़ुदा।
तो फिर मेरे इश्क़ से जुदा क्यूँ है मेरा ख़ुदा।
तुझे पा न सका, ये क़िस्मत की बात है,
पर चाहूँगा तुझे उम्र-भर, ये मेरे हाथ है।
पर चाहूँगा तुझे उम्र-भर, ये मेरे हाथ है।
मर कर भी वो प्यार कभी नहीं मरता है,
जो जज़्बातों के ज़रिये दिल में उतरता है।
जो जज़्बातों के ज़रिये दिल में उतरता है।
नाम-ए-उल्फ़त हम ऐसी हिमाक़त कर बैठे,
इक हरजाई संग दिल से रफ़ाक़त कर बैठे।
इक हरजाई संग दिल से रफ़ाक़त कर बैठे।
Dard Bhari Love Sad Shayari
हो गए ना तुम बे-घर,
दिल मेरा तोड़कर..!!
दिल मेरा तोड़कर..!!
तुझको पाने की हसरत ने,
मुझे कहीं का नहीं छोड़ा..!
मुझे कहीं का नहीं छोड़ा..!
कुछ ग़लतफ़हमियाँ थी,
पर 'ग़लत' नहीं थी...!!
पर 'ग़लत' नहीं थी...!!
जिसने कभी दिल चुराया था मेरा,
वो अब 'निगाहें' चुराती है मुझसे..!
वो अब 'निगाहें' चुराती है मुझसे..!
दिल का मेरे जो चितचोर था,
दिल में उसके कोई और था।
दिल में उसके कोई और था।
नहीं है यार हमारी ऐसी 'क़िस्मत',
कि हम भी दें किसी दिल में दस्तक।
कि हम भी दें किसी दिल में दस्तक।
उन्हें भी हो ये "मलाल" कभी,
कोई पूछे मेरा भी हाल कभी।
कोई पूछे मेरा भी हाल कभी।
'ऐ ख़ुदा' उसको हर ख़ुशी देना,
जो ग़म मुझे बे-हिसाब दे गया।
जो ग़म मुझे बे-हिसाब दे गया।
कहाँ से लाऊं ऐसा नसीब मेरे यार,
चाहत को मेरी तुम भी रहो बेक़रार।
चाहत को मेरी तुम भी रहो बेक़रार।
मेरी तो मुक़म्मल दुनिया तेरे दम से है,
फिर क्यूँ बे-ख़बर ये बेरुख़ी हमसे है।
फिर क्यूँ बे-ख़बर ये बेरुख़ी हमसे है।
तेरी हर ख़ुशी में ही मेरी ख़ुशी बसी है,
फिर क्यूँ मुझसे इस क़दर ये बेरुख़ी है।
फिर क्यूँ मुझसे इस क़दर ये बेरुख़ी है।
जिनको बीच राह बिछड़ना होता है,
वो मंज़िल का पता नहीं पूछा करते।
वो मंज़िल का पता नहीं पूछा करते।
बड़ा ही शुक्रगुज़ार हूँ उस हम-दर्द का,
जिसने धोखा भी दिया तो बड़े धोखे से।
जिसने धोखा भी दिया तो बड़े धोखे से।
Hum Waqif Hain Tumhari Fitrat Se Shayari
हम वाक़िफ़ हैं तुम्हारी 'फ़ितरत' से,
तुम निग़ाहें चुराकर ये गवाही न दो।
तुम निग़ाहें चुराकर ये गवाही न दो।
'ख़ुदा करे'... कभी न वो मंज़र आए,
मेरी तरह तेरी आँखों में समंदर आए।
मेरी तरह तेरी आँखों में समंदर आए।
काश... उतनी ही होती ये ज़िन्दगी,
तेरे संग गुज़री जितनी ये ज़िन्दगी।
तेरे संग गुज़री जितनी ये ज़िन्दगी।
ना ख़ता है उनकी ना क़सूर हमारा है,
हमें तो यार हमारी सादगी ने मारा है।
हमें तो यार हमारी सादगी ने मारा है।
मेरे जज़्बातों संग खिलवाड़ करने वाले,
खुदा तुझको हर बला से 'महफूज़' रखे।
खुदा तुझको हर बला से 'महफूज़' रखे।
अब क्या ही नाम दें ऐसे ताल्लुकात को,
जिसमें तरसे हैं फ़क़त इक मुलाक़ात को।
जिसमें तरसे हैं फ़क़त इक मुलाक़ात को।
काश... कि कोई तो ऐसा शख़्स होता,
लिपटकर जिससे मैं 'जी-भर' के रोता।
लिपटकर जिससे मैं 'जी-भर' के रोता।
Main Chahunga Tujhko Qayamat Tak - Marudhar Rahi
मैं चाहूँगा तुझको क़यामत तक,
तू मयस्सर हो या न हो, ये रज़ा ख़ुदा की।
तू मयस्सर हो या न हो, ये रज़ा ख़ुदा की।
एक ही मंज़िल के मुसाफ़िर थे हम दोनों,
बस कुछ ग़लतफ़हमियों ने जुदा कर दिया।
बस कुछ ग़लतफ़हमियों ने जुदा कर दिया।
मेरी चाहत के तक़ाज़े पर थोड़ा गौर तो कर,
मैं 'ख़ुद' को खो चुका हूँ तुझे चाहते-चाहते।
मैं 'ख़ुद' को खो चुका हूँ तुझे चाहते-चाहते।
इस दिल-ए-बेक़रार को कोई तो क़रार दे,
मुफ़्त में ना सही प्यार के बदले तो प्यार दे।
मुफ़्त में ना सही प्यार के बदले तो प्यार दे।
कैसे यक़ीं करूँ मैं किसी के इक़रार पर,
ज़ख्म ही ज़ख्म लगे हैं मेरे 'ऐतबार' पर।
ज़ख्म ही ज़ख्म लगे हैं मेरे 'ऐतबार' पर।
सर की मेरे कोई झूठी कसमें-वफ़ा खाकर,
सो गया बे-मुरव्वत ग़ैरों की बाँहों में जाकर।
सो गया बे-मुरव्वत ग़ैरों की बाँहों में जाकर।
दिल को दिल ही रहने दे, इसको दर-ए-ख़ुदा न बना,
वरना लोग आएंगे, और माथा टेक कर चले जाएंगे..!
वरना लोग आएंगे, और माथा टेक कर चले जाएंगे..!
जिस किसी की वज़ह से आग लगी मेरे आशियाने में,
ख़ुदा करे.., आँसू पोंछने वाला न मिले उसे ज़माने में।
ख़ुदा करे.., आँसू पोंछने वाला न मिले उसे ज़माने में।
Ji Chahe Jitna Kar Lo Nazar-Andaz Shayari
जी चाहे जितना कर लो नज़र-अंदाज़ हमें तुम,
जिस दिन हमने नज़रें बंद कर ली, कफ़न हटा-हटाकर देखोगे तुम।
जिस दिन हमने नज़रें बंद कर ली, कफ़न हटा-हटाकर देखोगे तुम।
तलब और तड़प ऐसी कि, उसे पल-भर भी आँखों से ओझल न होने दूँ,
बद-नसीबी मेरी ऐसी कि, वो ख़्वाबों में भी आए तो नींद दग़ा दे जाती है।
बद-नसीबी मेरी ऐसी कि, वो ख़्वाबों में भी आए तो नींद दग़ा दे जाती है।
काश... हम अपना ये हाल-ए-दिल, तुम्हें अपना सीना चीरकर दिखा पाते,
कि कमबख़्त ये दिल, मेरे लिए धड़कता कम और तेरे लिए तड़पता ज़्यादा है।
कि कमबख़्त ये दिल, मेरे लिए धड़कता कम और तेरे लिए तड़पता ज़्यादा है।
बड़ी अनमोल थी ज़िन्दगी मेरी भी यारा, जो तेरे तसव्वुर में ही गुज़र गयी,
तू मेरा होकर भी मेरा न हो सका, तक़दीर ही साथ देने से जब मुक़र गयी।
तू मेरा होकर भी मेरा न हो सका, तक़दीर ही साथ देने से जब मुक़र गयी।
अपनी हर ख़ुशी देकर उसे, उसके तमाम दर्द-ओ-ग़म लिया करते थे हम,
अफ़सोस... हमको मारा भी तो उसने, जिसके लिये जिया करते थे हम।
अफ़सोस... हमको मारा भी तो उसने, जिसके लिये जिया करते थे हम।
ज़िन्दगी तो फ़क़त उनके संग गुज़री थी, अब तो महज़ साँसें गुज़र रही है,
और उन्हें अब एहसास ही कहाँ, दिल पे मेरे क्या 'क़यामत' गुज़र रही है।
और उन्हें अब एहसास ही कहाँ, दिल पे मेरे क्या 'क़यामत' गुज़र रही है।
वो आएंगे जनाज़े पर मेरे, दीदार मेरा आख़िरी करने को,
कमबख़्त दिल कहीं बग़ावत न कर बैठे, ऐतबार आख़िरी करने को।
कमबख़्त दिल कहीं बग़ावत न कर बैठे, ऐतबार आख़िरी करने को।
बहुत हिम्मत जुटानी पड़ती है साहिब, उस शख़्स को नज़र-अंदाज़ करने को,
जो हरपल दिल-ओ-दिमाग़ पर छाया ही नहीं, साँसों में भी समाया रहता हो।
जो हरपल दिल-ओ-दिमाग़ पर छाया ही नहीं, साँसों में भी समाया रहता हो।
हम पर भी क्या ख़ूब, क़िस्मत के ज़ुल्म-ओ-सितम बरस रहे हैं,
मुक़म्मल जहाँ को भुलाकर, फ़क़त इक 'शख़्स' को तरस रहे हैं।
मुक़म्मल जहाँ को भुलाकर, फ़क़त इक 'शख़्स' को तरस रहे हैं।
जब-जब तेरा ख़याल आता है, तो आँखें मेरी नम हो जाती है,
चलो इसी बहाने, ज़िन्दगी की कुछ साँसें तो कम हो जाती है।
चलो इसी बहाने, ज़िन्दगी की कुछ साँसें तो कम हो जाती है।
ना किसी के जलाने से जलेगी, ना किसी के बुझाने से बुझेगी,
ये इश्क़ की आग, मुक़म्मल 'राख़' होने तक सुलगती ही रहेगी।
ये इश्क़ की आग, मुक़म्मल 'राख़' होने तक सुलगती ही रहेगी।
"ऐ" तक़दीर लिखने वाले, तू फ़क़त मुझ पे इतना एहसान कर दे,
जिसको मुक़द्दर में न लिखा, दिल से ख़ाली उसका मकान कर दे।
जिसको मुक़द्दर में न लिखा, दिल से ख़ाली उसका मकान कर दे।
दिल तो चाहता है कि बस इक तू ही तू दिखे जिधर देखूँ,
अफ़सोस, मेरा ऐसा मुक़द्दर कहाँ कि तुझे इक नज़र देखूँ।
अफ़सोस, मेरा ऐसा मुक़द्दर कहाँ कि तुझे इक नज़र देखूँ।
चाहत कहूँ या हसरत कहूँ, या फिर तुझे तलब कहूँ,
जो भी कहूँ बस इतना कहूँ कि, सब-कुछ बेमतलब कहूँ।
जो भी कहूँ बस इतना कहूँ कि, सब-कुछ बेमतलब कहूँ।
ये कैसा तक़दीर का तमाशा और क़िस्मत का क़हर है,
जिसको मांगा था दुआओं में उसी की जुबां पे ज़हर है।
जिसको मांगा था दुआओं में उसी की जुबां पे ज़हर है।
मुद्दत से तेरे दीदार के तलबगार बनकर बैठे हैं,
ख़तावार से पहले ही गुनेहगार बनकर बैठे हैं।
ख़तावार से पहले ही गुनेहगार बनकर बैठे हैं।
अक्सर वफ़ा की दहलीज़ वही पार किया करते हैं,
कसमे-वफ़ा जो हमसे हज़ारों बार किया करते हैं।
कसमे-वफ़ा जो हमसे हज़ारों बार किया करते हैं।
Kaash Ki Tera Naam Galti Hua Hota - Marudhar Rahi
काश... कि तेरा "नाम" ग़लती हुआ होता,
तो लोग दावे से कहते, ग़लती तुम्हारी ही है।
तो लोग दावे से कहते, ग़लती तुम्हारी ही है।
कितनी फ़िक्र रहती है हमको तुम्हारी हर वक़्त,
इस बात से तुम अंजान और हम परेशान हैं..!
इस बात से तुम अंजान और हम परेशान हैं..!
चेहरे पर ख़ामोशी है, पर दिल में बड़ा शौर है,
जो मेरे दिल में है, उसके दिल में कोई और है।
जो मेरे दिल में है, उसके दिल में कोई और है।
राह-ए-उल्फ़त में ऐसे भी मंज़र आएंगे,
पहले 'दिल' देकर बाद में मुक़र जाएंगे।
पहले 'दिल' देकर बाद में मुक़र जाएंगे।
हर सजदे में हमने जिनकी ख़ुशियाँ माँगी,
अफ़सोस उनकी ख़ुशी किसी और में थी।
अफ़सोस उनकी ख़ुशी किसी और में थी।
किसी को इतनी भी अहमियत मत देना,
कि ख़ुद की ही 'कीमत' कम हो जाए..!
कि ख़ुद की ही 'कीमत' कम हो जाए..!
ख़्वाहिशों पे यार यहाँ किसके पहरा है,
जिसकी ख़्वाहिश है बस वही बहरा है।
जिसकी ख़्वाहिश है बस वही बहरा है।
जिसको हमने अपना सब-कुछ समझा,
अफ़सोस... उसने हमें न कुछ समझा।
अफ़सोस... उसने हमें न कुछ समझा।
Jise Koi Fark Nahi Padta Tha Shayari
जिसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था, चेहरा मेरा ख़ामोश और उदास देखकर,
बिलख-बिलखकर रोया वो फिर, कफ़न में लिपटी मेरी लाश देखकर।
बिलख-बिलखकर रोया वो फिर, कफ़न में लिपटी मेरी लाश देखकर।
कोई देखे तुम्हें अपनी बुरी नज़रों से, इसमें न कोई क़ुसूर तुम्हारा होगा,
पर तुम भी देखो उसे उसी नज़रों से, ये न हमको हरगिज़ गवारा होगा।
पर तुम भी देखो उसे उसी नज़रों से, ये न हमको हरगिज़ गवारा होगा।
सोचा था अपनी चाहत के दम पे, इक रोज़ तेरे दिल में घर कर जाएंगे,
अब लगता है तुम्हारी बेरुख़ी देखकर, ये अरमान लेकर हम मर जाएंगे।
अब लगता है तुम्हारी बेरुख़ी देखकर, ये अरमान लेकर हम मर जाएंगे।
क़िस्मत में नहीं है दीदार तेरा, बस तेरी तस्वीर को निहारा करते हैं,
तू तक़दीर में नहीं है मेरी, फिर भी तुझे 'ख़्वाबों' में पुकारा करते हैं।
तू तक़दीर में नहीं है मेरी, फिर भी तुझे 'ख़्वाबों' में पुकारा करते हैं।
ये जो तुम वक़्त बे-वक़्त, बिन बुलाए ख़्वाबों में मेरे चले आते हो ना,
काश... यूँ ही ज़िन्दगी में चले आते, तो ज़िन्दगी कुछ और ही होती।
काश... यूँ ही ज़िन्दगी में चले आते, तो ज़िन्दगी कुछ और ही होती।
उसने फ़क़त अपनी ख़ुशी के लिए, दिल को मेरे फिर तोड़ दिया,
देखकर उसको हम रक़ीबों संग ख़ुश, उसके हाल पर छोड़ दिया।
देखकर उसको हम रक़ीबों संग ख़ुश, उसके हाल पर छोड़ दिया।
ग़र हैं हम इतने ही बुरे, तो फिर तुम हमको बुरे ही रहने दो,
मुकम्मल कर लो तुम अपने अरमां, हमारे अधूरे ही रहने दो।
मुकम्मल कर लो तुम अपने अरमां, हमारे अधूरे ही रहने दो।
तुम करना फ़क़त 'दुआ' ख़ुदा से कि, हम तुम्हें भुला सके,
हम करेंगे इल्तिज़ा उसी ख़ुदा से, क़ुबूल तुम्हारी दुआ करे।
हम करेंगे इल्तिज़ा उसी ख़ुदा से, क़ुबूल तुम्हारी दुआ करे।
सज़ा इश्क़ में है मज़ा इश्क़ में है, जीते-जी क़ज़ा इश्क़ में है,
अब तू ख़ुद कर फैसला दीवाने, तेरी क्या रज़ा इश्क़ में है..!!
अब तू ख़ुद कर फैसला दीवाने, तेरी क्या रज़ा इश्क़ में है..!!
Wafa Ke Pahredar - Marudhar Rahi
जिनके चाहने वाले ही हज़ार होते हैं,
वो ना फिर वफ़ा के पहरेदार होते हैं।
वो ना फिर वफ़ा के पहरेदार होते हैं।
आशियाँ मेरा उजाड़ कर, दर-ब-दर कर गई,
वो बड़े घर से थी साहिब, जो मुझे बे-घर कर गई।
वो बड़े घर से थी साहिब, जो मुझे बे-घर कर गई।
ज़माने से तो फ़िर मैं तेरे लिए हर जंग लड़ लेता,
ग़र सामने ज़माने के तू मेरा 'हाथ' पकड़ लेता..!
ग़र सामने ज़माने के तू मेरा 'हाथ' पकड़ लेता..!
यूँ तो हमको बहुत कुछ सिखा कर गया है वो,
अफ़सोस कीमत कुछ ज़्यादा ही ले गया है वो।
अफ़सोस कीमत कुछ ज़्यादा ही ले गया है वो।
आहिस्ता-आहिस्ता से यह साँझ ढ़ल रही है,
रफ़्ता-रफ़्ता कुछ फ़िज़ा भी सर्द चल रही है,
इस दिल-ए-नाशाद के वीराने में मेरे महबूब,
फ़क़त इक तेरी मुक़म्मल 'कमी' ख़ल रही है।
रफ़्ता-रफ़्ता कुछ फ़िज़ा भी सर्द चल रही है,
इस दिल-ए-नाशाद के वीराने में मेरे महबूब,
फ़क़त इक तेरी मुक़म्मल 'कमी' ख़ल रही है।
Lagta Hai Ahmiyat Hamari Unke Liye - Marudhar Rahi
लगता है 'अहमियत' हमारी, उनके लिये अब आम हो गई,
जिनके एक कॉल के इंतज़ार में, हमें सुबहा से शाम हो गई।
जिनके एक कॉल के इंतज़ार में, हमें सुबहा से शाम हो गई।
यूँ तो वो हर-रोज़ मिलते हैं हमें, पर बात नहीं होती,
बग़ैर उनके रोज़ रात तो होती है, पर रात नहीं होती,
मुक़म्मल शब गुज़र जाती है बस इसी कश्मकश में,
क्यूँ यार हमारी 'किस्मत' ही, हमारे साथ नहीं होती।
बग़ैर उनके रोज़ रात तो होती है, पर रात नहीं होती,
मुक़म्मल शब गुज़र जाती है बस इसी कश्मकश में,
क्यूँ यार हमारी 'किस्मत' ही, हमारे साथ नहीं होती।
बे-दर्द ज़माना इस दिल के जज़्बातों को नहीं जानता,
कमबख़्त ये दिल ज़माने की रस्मों-रिवाज़ों को नहीं मानता,
ग़र होता इतना आसां दिल्लगी करके किसी को भूल पाना,
माशूक़ा की गलियों में 'आशिक़' कभी ख़ाक नहीं छानता।
कमबख़्त ये दिल ज़माने की रस्मों-रिवाज़ों को नहीं मानता,
ग़र होता इतना आसां दिल्लगी करके किसी को भूल पाना,
माशूक़ा की गलियों में 'आशिक़' कभी ख़ाक नहीं छानता।
हाल-ए-दिल हम अपना बताए तो बताए किस से,
दर्द-ए-दिल हम अपना सुनाए तो सुनाए किस से,
जब कोई अपना ही अपना न रहा तो फिर यार...,
बे-दर्द ज़माने में उम्मीद लगाए तो लगाए किस से।
दर्द-ए-दिल हम अपना सुनाए तो सुनाए किस से,
जब कोई अपना ही अपना न रहा तो फिर यार...,
बे-दर्द ज़माने में उम्मीद लगाए तो लगाए किस से।
जो शख़्स तुम्हारी झूठी कसम खा सकता है,
इल्म रहे वो किसी भी हद तक जा सकता है,
और अपना घर रौशन करने के लिए 'बेशक़',
तुम्हारे आशियाँ को आग तक लगा सकता है।
इल्म रहे वो किसी भी हद तक जा सकता है,
और अपना घर रौशन करने के लिए 'बेशक़',
तुम्हारे आशियाँ को आग तक लगा सकता है।
आज-कल के प्यार में ना हया ना उसूल है,
करना किसी से उम्मीद-ए-वफ़ा फ़िजूल है,
जिसकी चाहत की चाह में तुम रो रहे हो..,
वो किसी और को ख़ुश करने में मशगूल है।
करना किसी से उम्मीद-ए-वफ़ा फ़िजूल है,
जिसकी चाहत की चाह में तुम रो रहे हो..,
वो किसी और को ख़ुश करने में मशगूल है।
Tum Meri Be-Sur Zindagi Ka Madhur Nagma Ho - Marudhar Rahi
'तुम' मेरी इस बे-सुर ज़िन्दगी का, वो ख़ूबसूरत मधुर नग़मा हो..,
जिसे न मैं गा सकता हूँ, न भुला सकता हूँ, बस मन ही मन गुनगुना सकता हूँ।
जिसे न मैं गा सकता हूँ, न भुला सकता हूँ, बस मन ही मन गुनगुना सकता हूँ।
वफ़ा के किस्से अब पुराने हो गए हैं,
इक परिंदे के कई ठिकाने हो गए हैं,
कल ही हुई थी उनसे पहचान हमारी,
और आज फिर से हम बेगाने हो गए हैं।
इक परिंदे के कई ठिकाने हो गए हैं,
कल ही हुई थी उनसे पहचान हमारी,
और आज फिर से हम बेगाने हो गए हैं।
हर राँझे की किस्मत में हीर नहीं होती,
मेहरबां हर किसी पर तक़दीर नहीं होती,
कमबख़्त दिल भी उसी की ज़िद करता है,
जिस नाम की हाथों में लकीर नहीं होती।
मेहरबां हर किसी पर तक़दीर नहीं होती,
कमबख़्त दिल भी उसी की ज़िद करता है,
जिस नाम की हाथों में लकीर नहीं होती।
क्यूँ तेरा ख़याल दिल से मेरे जाता नहीं,
क्यूँ तुझे ख़याल कभी मेरा आता नहीं,
ये कैसी ज़िद है कमबख्त इस दिल की,
जो तेरे सिवा इसे कोई और भाता नहीं।
क्यूँ तुझे ख़याल कभी मेरा आता नहीं,
ये कैसी ज़िद है कमबख्त इस दिल की,
जो तेरे सिवा इसे कोई और भाता नहीं।
बे-क़रार 'दिल' को मेरे क़रार ना मिला,
चाहत का कोई मेरी तलबगार ना मिला,
जुस्तजू में जिसकी गुज़र गई ये ज़िन्दगी,
वो वफ़ाशेआ'र हम-सफ़र यार ना मिला।
चाहत का कोई मेरी तलबगार ना मिला,
जुस्तजू में जिसकी गुज़र गई ये ज़िन्दगी,
वो वफ़ाशेआ'र हम-सफ़र यार ना मिला।
दिल की बाज़ी हम अपने ही हाथों हार कर आए हैं,
तमाम ख़्वाहिशों को अपनी बे-मौत मार कर आए हैं,
किया जिसने ज़िन्दगी को हमारी मुक़म्मल बर्बाद..,
हम उसी हरजाई की यार 'जीस्त' संवार कर आए हैं।
तमाम ख़्वाहिशों को अपनी बे-मौत मार कर आए हैं,
किया जिसने ज़िन्दगी को हमारी मुक़म्मल बर्बाद..,
हम उसी हरजाई की यार 'जीस्त' संवार कर आए हैं।
Jo Jeete-Ji Na Ho Saka Kabhi Mera Shayari
जो जीते-जी न हो सका कभी मेरा, वो मरने के बाद होता है,
इक शख़्स हर-रोज़ मेरी मज़ार पे आकर, बे-इंतिहा रोता है।
इक शख़्स हर-रोज़ मेरी मज़ार पे आकर, बे-इंतिहा रोता है।
किन 'लफ़्ज़ों' में समझाए अब हम यार, ये उस संगदिल को,
कोई रास ही नहीं आता उसके सिवा, कमबख़्त इस दिल को।
कोई रास ही नहीं आता उसके सिवा, कमबख़्त इस दिल को।
कैसे कह दूँ मेरे यार कि मुझे उसकी कोई तलब नहीं,
अफ़सोस... कि मेरी तलब से उसे कोई मतलब नहीं।
अफ़सोस... कि मेरी तलब से उसे कोई मतलब नहीं।
एक ही लफ़्ज़ को हमने, कई मर्तबा पढ़-पढ़ के लिखा,
अफ़सोस... जो भी लिखा, लिए इक अनपढ़ के लिखा।
अफ़सोस... जो भी लिखा, लिए इक अनपढ़ के लिखा।
कुछ तो तवज्जो दे बे-मुरव्वत, मेरी बर्दाश्त की इस हद को,
सीने से लगाकर रखा है, मैंने तेरे हर ज़ुल्म-ओ-सितम को।
सीने से लगाकर रखा है, मैंने तेरे हर ज़ुल्म-ओ-सितम को।
ज़्यादा जी नहीं पाऊँगा अब मैं, मेरे इस हाल से,
पल-पल मार रहा है कोई मुझे, अपने ख़याल से।
पल-पल मार रहा है कोई मुझे, अपने ख़याल से।
चाह कर भी हम उस हादसे को, ता-उम्र न भुला सके,
जिसमें ख़ुद को भी खो दिया, और उन्हें भी न पा सके।
जिसमें ख़ुद को भी खो दिया, और उन्हें भी न पा सके।
आग लगे इस ज़माने को, जले चाहे सारा संसार,
रक़ीबों ने छीना है, नसीबों का मुझसे मेरा प्यार।
रक़ीबों ने छीना है, नसीबों का मुझसे मेरा प्यार।
Dil Me Teri Deed Ka Aakhri Malal Shayari
दिल में तेरी दीद का आख़री मलाल लेकर,
कोई जा रहा है जहाँ से तेरा ख़याल लेकर।
कोई जा रहा है जहाँ से तेरा ख़याल लेकर।
'काश'... कि कभी तो उन्हें इतना एहसास हो,
कितना तड़पता है ये दिल वो न जब पास हो।
कितना तड़पता है ये दिल वो न जब पास हो।
अभी उलझा हूँ हल करने में अपने घर के मसले,
तुम अपने ऐतबार पर थोड़ा 'ऐतबार' रखना...!!
तुम अपने ऐतबार पर थोड़ा 'ऐतबार' रखना...!!
एक ही तो वज़ह थी मेरे मुस्कुराने की,
उसे भी नज़र लग गई इस ज़माने की,
अब आँसुओं के सिवा कुछ ख़ास नहीं,
ख़ुशी क्या है ग़म क्या है एहसास नहीं।
उसे भी नज़र लग गई इस ज़माने की,
अब आँसुओं के सिवा कुछ ख़ास नहीं,
ख़ुशी क्या है ग़म क्या है एहसास नहीं।
वो भी यार बड़ा कमाल करने लगे हैं,
सवाल के बदले सवाल करने लगे हैं,
देने लगे हैं वो अब ग़ैरों को तवज्जो..,
हमसे बयां हमारा मलाल करने लगे हैं।
सवाल के बदले सवाल करने लगे हैं,
देने लगे हैं वो अब ग़ैरों को तवज्जो..,
हमसे बयां हमारा मलाल करने लगे हैं।
भलाई का मेरे यार अब ज़माना नहीं,
भूलकर भी ये बात तुम भुलाना नहीं,
जिसने बसा दी किसी की उजड़ी दुनिया,
आज उसी दर उसका कोई ठिकाना नहीं।
भूलकर भी ये बात तुम भुलाना नहीं,
जिसने बसा दी किसी की उजड़ी दुनिया,
आज उसी दर उसका कोई ठिकाना नहीं।
जज़्बातों की यहाँ कहाँ कदर होती है,
पत्तों का रुख़ हवाएं जिधर होती है,
और बिन कहे हाल-ए-दिल पढ़ ले,
ऐसी कहाँ हर कोई 'नज़र' होती है।
पत्तों का रुख़ हवाएं जिधर होती है,
और बिन कहे हाल-ए-दिल पढ़ ले,
ऐसी कहाँ हर कोई 'नज़र' होती है।
ख़ुद को खो दिया मैंने ग़ैरों को पाते-पाते,
सूख गए आँखों से अश्क़ रोज आते-आते,
यहाँ कोई किसी का हम-दर्द नहीं होता...,
यही सिखाकर गया है कोई मुझे जाते-जाते।
सूख गए आँखों से अश्क़ रोज आते-आते,
यहाँ कोई किसी का हम-दर्द नहीं होता...,
यही सिखाकर गया है कोई मुझे जाते-जाते।
Jab Wo Aayi Maiyyat Pe Meri - Marudhar Rahi
जब वो आई मय्यत पे मेरी सज-संवर कर,
'ख़ुदा' कसम हम फिर से मर गए मर कर।
'ख़ुदा' कसम हम फिर से मर गए मर कर।
- मरुधर राही ✍️
















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