प्यार में बिछड़ना जितना आसान लगता है, उसे भूलना उतना ही मुश्किल होता है। जब दिल टूटता है तो शब्द ही सहारा बनते हैं। नमस्कार दोस्तों, MyAlfaaz पर मैं मरुधर राही आपके उसी दर्द के लिए लाया हूँ Breakup Shayari in Hindi का सबसे बड़ा कलेक्शन, जिसमें 2 Line Breakup Shayari, Very Sad Breakup Shayari और GF-BF Breakup Status शामिल हैं, जो आपके जज्बातों को बयां करेगा।
Ulfat Ke Badle Kaisi Saza Di Hai - Marudhar Rahi
शिकस्ता मेरे दिल ने 'पैहम' यही सदा दी है,
उसने मुझे उल्फ़त के बदले कैसी सज़ा दी है।
उसने मुझे उल्फ़त के बदले कैसी सज़ा दी है।
न हमको दवा चाहिए न दुआ चाहिए,
महबूब फ़िर से वही बिछड़ा हुआ चाहिए।
महबूब फ़िर से वही बिछड़ा हुआ चाहिए।
जिसके नाम हमने अपनी ज़िन्दगानी कर दी,
अफ़सोस, उसी ने अधूरी मेरी कहानी कर दी।
अफ़सोस, उसी ने अधूरी मेरी कहानी कर दी।
तेरे जाने के बाद ता-उम्र यही ग़म रहा,
कि मेरी कहानी में तू कितना कम रहा।
कि मेरी कहानी में तू कितना कम रहा।
ग़ैरों से जब वो हँस-हँसकर बातें करते हैं,
हम अपने दिल को रो-रोकर समझाते हैं।
हम अपने दिल को रो-रोकर समझाते हैं।
ख़ाली हाथ ही लौट आए हम फ़िर उस दर से,
जहाँ सब-कुछ छोड़कर गए थे अपने घर से।
जहाँ सब-कुछ छोड़कर गए थे अपने घर से।
हो सके तो लौटकर आजा किसी बहाने से,
दिल की दुनिया वीरान हो गई है तेरे जाने से।
दिल की दुनिया वीरान हो गई है तेरे जाने से।
मेरा कभी कोई कहना न मानना उसकी ख़ता थी,
फिर मेरा 'ख़ामोश' हो जाना ही उसकी सज़ा थी।
फिर मेरा 'ख़ामोश' हो जाना ही उसकी सज़ा थी।
Tumhare Sang Zindagi Jeena Chahte The - Marudhar Rahi
हम तो तुम्हारे संग ज़िन्दगी जीना चाहते थे,
तुमने तो हमें मरने के क़ाबिल भी न छोड़ा।
तुमने तो हमें मरने के क़ाबिल भी न छोड़ा।
ये हिज़्र की लम्बी रातें, और तेरी झूठी बातें,
न सही जाती है, न किसी से कही जाती है।
न सही जाती है, न किसी से कही जाती है।
हो जाओ तुम ज़माने के हमारे सिवा,
हम न हो सकेंगे किसी के तुम्हारे सिवा।
हम न हो सकेंगे किसी के तुम्हारे सिवा।
वो किस क़दर सुबक-सुबक कर रोया होगा,
पाकर जिसने किसी को फिर से खोया होगा।
पाकर जिसने किसी को फिर से खोया होगा।
इतनी सादगी से दिल तोड़ा है ज़ालिम ने,
कि इक उम्र गुज़र गई सबब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते।
कि इक उम्र गुज़र गई सबब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते।
हमें उनसे और उन्हें पैसों से प्यार था,
यार मेरा ख़ुद-ग़रज़ ही नहीं ग़द्दार था।
यार मेरा ख़ुद-ग़रज़ ही नहीं ग़द्दार था।
जिसको चाहा था हमने दीवानों की तरह,
उसी ने ठुकराया है हमें बे-क़दरों की तरह।
उसी ने ठुकराया है हमें बे-क़दरों की तरह।
बड़ी हिफ़ाज़त से रखा था, फिर भी टूट गया,
दिल ही तो था यार, चोट लगी और टूट गया।
दिल ही तो था यार, चोट लगी और टूट गया।
मौसम-ए-बहार में गुल ख़िज़ा के खिल गए,
ठुकराकर जब वो हमें ग़ैरों के गले मिल गए।
ठुकराकर जब वो हमें ग़ैरों के गले मिल गए।
Chaar Din Ki Zindagi Shayari - Marudhar Rahi
चार दिन की ज़िन्दगी को हम यूँही हँसकर गुज़ार लेते,
काश... तुम भी हम पर हमारी तरहा ऐतबार कर लेते।
काश... तुम भी हम पर हमारी तरहा ऐतबार कर लेते।
हम फिर से चाहेंगे तुझे इक और जन्म लेकर,
अगले जन्म तुम हमसे फ़क़त 'वफ़ा' करना..!
अगले जन्म तुम हमसे फ़क़त 'वफ़ा' करना..!
कहने को तो वो शख़्स 'मुक़म्मल' मेरा था,
अफ़सोस, दिल में उसके किसी और का बसेरा था।
अफ़सोस, दिल में उसके किसी और का बसेरा था।
दिल तो आज भी उन्हें 'अपना' मानकर बैठा है,
जो अपनी महफ़िल कहीं और सजाकर बैठा है।
जो अपनी महफ़िल कहीं और सजाकर बैठा है।
बड़ा लम्बा सफ़र तय करने पर बतलाया उसने हमें,
कि वो किसी और मंज़िल के 'मुसाफ़िर' हैं...!!
कि वो किसी और मंज़िल के 'मुसाफ़िर' हैं...!!
ऐ मेरे दिल-ए-नादाँ, ना यूँ आह भर ना राह तक,
उसने फ़क़त राह ही नहीं, मंज़िल भी बदल ली है।
उसने फ़क़त राह ही नहीं, मंज़िल भी बदल ली है।
वो हमनशीं हमनवा बनकर इश्क़ को हवा दे गया,
और जाते-जाते मुझे लम्बी उम्र की बद्दुआ दे गया।
और जाते-जाते मुझे लम्बी उम्र की बद्दुआ दे गया।
ये दुनिया और ये महफ़िलें मेरे अब किस काम की,
इक तू ही तो दवा थी मेरे दर्द-ए-दिल के आराम की।
इक तू ही तो दवा थी मेरे दर्द-ए-दिल के आराम की।
कमियां तो फिर मुझमें बे-हिसाब गिनाई उसने मुझे,
जो थी कमी उसके बग़ैर, बस वो न बताई उसने मुझे।
जो थी कमी उसके बग़ैर, बस वो न बताई उसने मुझे।
क्यूँ न सुनाई दी तुम्हें मेरे दर्द-ए-दिल की सदा,
तेरे दिल से मेरे दिल का, हर तार तो जुड़ा था..!
तेरे दिल से मेरे दिल का, हर तार तो जुड़ा था..!
बेख़ुदी में खोकर तेरी, ख़ुद से बे-ख़ुद हुए हैं हम,
तू तो इक बहाना है, बर्बाद तो ख़ुद हुए हैं हम..!
तू तो इक बहाना है, बर्बाद तो ख़ुद हुए हैं हम..!
ऐसे 'सावन' का भला अब कोई क्या ही करे,
बिछड़कर अपने महबूब से जब कोई आहें भरे।
बिछड़कर अपने महबूब से जब कोई आहें भरे।
जाने वो कौनसे दर्जे का पढ़ा-लिखा अनपढ़ था,
जो न हालात समझ सका न जज़्बात पढ़ सका।
जो न हालात समझ सका न जज़्बात पढ़ सका।
Dil Se Lagakar Hi Nahi Yaar - Marudhar Rahi
दिल से लगाकर ही नहीं यार, दिल में छुपाकर भी रखता,
काश... कि तू भी मुझसे, तेरे 'दर्द' की तरहा वफ़ा करता।
काश... कि तू भी मुझसे, तेरे 'दर्द' की तरहा वफ़ा करता।
भले ही वो अब चाहतों से मेरी मुकर गया,
पर उसका दर्द तो दिल में मेरे घर कर गया।
पर उसका दर्द तो दिल में मेरे घर कर गया।
जाने वाले को फ़िर कहाँ इतना पता होता है,
जो छूट रहा है, वो किस हद तक टूट रहा है।
जो छूट रहा है, वो किस हद तक टूट रहा है।
दिल ने जो कहा, उसने वो कभी सुना ही नहीं,
और जो सुना, दिल ने वो कभी कहा ही नहीं।
और जो सुना, दिल ने वो कभी कहा ही नहीं।
न हीर हुई न लैला, न ही वो मुमताज़ निकली,
मेरी चाहत चाहत नहीं, सिर्फ़ धोकेबाज़ निकली।
मेरी चाहत चाहत नहीं, सिर्फ़ धोकेबाज़ निकली।
नादाँ थे हम जो तेरे फ़रेब को प्यार समझ बैठे,
दिल के दुश्मन को हम अपना यार समझ बैठे।
दिल के दुश्मन को हम अपना यार समझ बैठे।
मलाल ये नहीं कि तुम हमको रूला कर चले गए,
मसला तो ये है कि अब हमको चुप कौन कराएगा।
मसला तो ये है कि अब हमको चुप कौन कराएगा।
तेरा एहसास इक पल भी दिल से न मेरे जुदा है,
ग़र न हो यक़ीं तो पूछ ले गवाह फ़क़त ख़ुदा है।
ग़र न हो यक़ीं तो पूछ ले गवाह फ़क़त ख़ुदा है।
मुद्दत के बाद आज फ़िर उनका पैग़ाम आया है,
शायद उन्हें हमसे कोई न कोई काम आया है।
शायद उन्हें हमसे कोई न कोई काम आया है।
अक्सर मैंने जिसकी दुआओं में खुशियाँ मांगी,
अफ़सोस, वही तोहफ़े में मुझे ख़ामोशी दे गया।
अफ़सोस, वही तोहफ़े में मुझे ख़ामोशी दे गया।
तन्हा ही 'तय' किया फ़िर हमने अपना हर सफ़र,
गवारा न हुआ कोई हमको तुम्हारे बाद हम-सफ़र।
गवारा न हुआ कोई हमको तुम्हारे बाद हम-सफ़र।
महज़ इक तेरा ख़याल आँखें मेरी नम कर जाता है,
वक़्त बे-वक़्त आकर इज़ाफ़ा-ए-ग़म कर जाता है।
वक़्त बे-वक़्त आकर इज़ाफ़ा-ए-ग़म कर जाता है।
Raah E Ulfat Me Aisa Bhi Ik Mod Aaya - Marudhar Rahi
राह-ए-उल्फ़त में ऐसा भी इक मोड़ आया,
जिस्म तो मैं ले आया, रूह वहीं छोड़ आया।
जिस्म तो मैं ले आया, रूह वहीं छोड़ आया।
हैरां नहीं हम तो बस इस बात से शर्मिंदा हैं,
कि तुझसे बिछड़कर भी हम कैसे ज़िन्दा हैं।
कि तुझसे बिछड़कर भी हम कैसे ज़िन्दा हैं।
नज़रों में उसने हमारी ही गिराया है हमें..,
एक ही शख़्स ने कई मर्तबा ठुकराया है हमें।
एक ही शख़्स ने कई मर्तबा ठुकराया है हमें।
कमबख़्त 'धोखा' भी मिला तो हमको वहाँ से..,
जहाँ हमने ऐतबार करने की तमाम हदें भुला दी।
जहाँ हमने ऐतबार करने की तमाम हदें भुला दी।
अपना बनाकर फ़िर से हमें कोई बेगाना कर गया,
ग़मों का मेरे घर रोज़ का आना-जाना कर गया..!
ग़मों का मेरे घर रोज़ का आना-जाना कर गया..!
Jo Dil Me Hamare Baste Hain - Marudhar Rahi
जो दिल में हमारे बसते हैं,
वही हमें रुलाकर हँसते हैं।
वही हमें रुलाकर हँसते हैं।
खिलकर कली से फूल बिखर भी गए,
मिलकर हम इसी जन्म बिछड़ भी गए।
मिलकर हम इसी जन्म बिछड़ भी गए।
इश्क में हमने ऐसी 'ठोकर' खाई है,
वफ़ा की कीमत रो-रोकर चुकाई है।
वफ़ा की कीमत रो-रोकर चुकाई है।
जिसको समझा था हमने अपना मरहला,
अफ़सोस... वो ग़ैरों का मुक़ाम निकला।
अफ़सोस... वो ग़ैरों का मुक़ाम निकला।
कभी मौसम तो फिर कभी रुत बदल गई,
दिल जब भर गया तो 'ज़रूरत' बदल गई।
दिल जब भर गया तो 'ज़रूरत' बदल गई।
मुरझा गए हैं फूल कली से खिलकर,
बिछड़ गए हैं हम 'महबूब' से मिलकर।
बिछड़ गए हैं हम 'महबूब' से मिलकर।
जो चले गए हैं हमसे 'ख़फ़ा' होकर,
मालूम नहीं उन्हें किस ने मना लिया।
मालूम नहीं उन्हें किस ने मना लिया।
होकर जुदा तुमसे हमने है यह जाना,
ग़म-ए-हिज़्र से बेहतर है 'मर' जाना।
ग़म-ए-हिज़्र से बेहतर है 'मर' जाना।
मुफ़्त में मिल गया वो शख़्स किसी को,
जो हर कीमत पर हमको 'गवारा' था..!!
जो हर कीमत पर हमको 'गवारा' था..!!
तेरी 'जुदाई' में हुआ है मेरा हाल ऐसा,
पल-पल गुज़र रहा है इक साल जैसा।
पल-पल गुज़र रहा है इक साल जैसा।
Bad Hi Nahi Main Bad Hawas Hokar Lauta Hun - Marudhar Rahi
बद ही नहीं मैं बद-हवास होकर लौटा हूँ,
राहे-उल्फ़त से ज़िंदा लाश होकर लौटा हूँ।
राहे-उल्फ़त से ज़िंदा लाश होकर लौटा हूँ।
ये रंज रहेगा ता-उम्र मुझे,
क्यूँ चाहा मैंने इतना तुझे।
क्यूँ चाहा मैंने इतना तुझे।
तेरे संग पल-भर की हँसी ने मुझे,
ता-उम्र के लिए आँसू दे दिए...!!
ता-उम्र के लिए आँसू दे दिए...!!
अक्सर प्यार में ऐसा होता है,
एक हँसता है दूसरा रोता है।
एक हँसता है दूसरा रोता है।
बस इक तुझे खोने के बाद..,
ख़्वाहिश ही न रही कुछ पाने की।
ख़्वाहिश ही न रही कुछ पाने की।
दम-ब-दम दिल पे एक ही सितम,
हरपल तेरी दर्द-ए-जुदाई का ग़म।
हरपल तेरी दर्द-ए-जुदाई का ग़म।
उसने लोगों की हर बात सुनी,
काश वो इस दिल की भी सुन लेते।
काश वो इस दिल की भी सुन लेते।
जब 'मुक़द्दर' में ही मेरे रोना था,
लाज़मी तेरा मुझसे जुदा होना था।
लाज़मी तेरा मुझसे जुदा होना था।
रूह से रूह का हमसे नाता जोड़कर,
चले गए वो फ़िर हमें 'तन्हा' छोड़कर।
चले गए वो फ़िर हमें 'तन्हा' छोड़कर।
जबसे तुमने मुझसे मुँह मोड़ लिया है,
मेरी हसरतों ने कफ़न ओढ़ लिया है।
मेरी हसरतों ने कफ़न ओढ़ लिया है।
चाहत का सिला कोई इस क़दर दे गया,
झूठे ख़्वाब दिखाकर दर्द असली दे गया।
झूठे ख़्वाब दिखाकर दर्द असली दे गया।
भले ही तू किसी और की तक़दीर थी,
पर दिल में तो मेरे तेरी ही तस्वीर थी।
पर दिल में तो मेरे तेरी ही तस्वीर थी।
Jabse Tu Mere Dard E Dil Ki Wajah Ban Gayi Hai - Marudhar Rahi
जबसे तू मेरे दर्द-ए-दिल की वज़हा बन गई है,
ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं, इक 'सज़ा' बन गई है..!
ज़िन्दगी ज़िन्दगी नहीं, इक 'सज़ा' बन गई है..!
बेख़याली में भी बस यही ख़याल आता है,
क्या अब भी उसको मेरा ख़याल आता है।
क्या अब भी उसको मेरा ख़याल आता है।
जिसको हम अपना बनाने में मसरूफ़ थे,
वही हमको बेवकूफ़ बनाने में मशगूल थे।
वही हमको बेवकूफ़ बनाने में मशगूल थे।
ख़ुदा जाने वो किस मिट्टी का बना है,
जो दिल तोड़ के कहता है रोना मना है।
जो दिल तोड़ के कहता है रोना मना है।
ग़र जाना ही था तुमको मेरा ये दिल तोड़कर,
क्यों गए फ़िर मेरे इस जिस्म में जान छोड़कर।
क्यों गए फ़िर मेरे इस जिस्म में जान छोड़कर।
अब हाल न पूछो यारों, हाल बे-हाल हो गए हैं,
उनसे बिछड़े हमको, दिन महीने साल हो गए हैं।
उनसे बिछड़े हमको, दिन महीने साल हो गए हैं।
हम तो यूँ ही खामखाँ फटे में टांग अड़ा रहे थे,
असल में तो वो किसी और से नैन लड़ा रहे थे।
असल में तो वो किसी और से नैन लड़ा रहे थे।
जहाँ खिलना था गुल को वहीं खिलता तो अच्छा था,
काश... कि तू हमको कभी न मिलता तो अच्छा था।
काश... कि तू हमको कभी न मिलता तो अच्छा था।
लगता है उसकी ज़रूरतें कहीं और पूरी हो रही है,
ग़ालिबन इसी वज़ह हमारे दरम्यान दूरी हो रही है।
ग़ालिबन इसी वज़ह हमारे दरम्यान दूरी हो रही है।
कितना अज़ीज़ था वो शख़्स मुझे, जो बेगाना हो गया,
ख़्वाबों में भी मिले उसको हमसे, इक ज़माना हो गया।
ख़्वाबों में भी मिले उसको हमसे, इक ज़माना हो गया।
यूँ वक़्त बे-वक़्त मेरी आँखों का भरना..,
गवाही है मेरी चाहत से तेरे दिल के भर जाने की।
गवाही है मेरी चाहत से तेरे दिल के भर जाने की।
Tum Mera Wo Adhura Khwab Ho - Marudhar Rahi
तुम मेरा वो 'अधुरा' ख़्वाब हो..,
जिसे मैंने जगती आँखों से मुक़म्मल होते देखा था।
जिसे मैंने जगती आँखों से मुक़म्मल होते देखा था।
जिसको कभी एहसास तक न हुआ मेरे रोने का,
अब क्या फ़र्क पड़ेगा उसे मेरे होने या न होने का।
अब क्या फ़र्क पड़ेगा उसे मेरे होने या न होने का।
थामकर हाथों में हाथ वो फिर हमें तन्हा छोड़ गया,
रहता था जिस दिल में ज़ालिम उसी को तोड़ गया।
रहता था जिस दिल में ज़ालिम उसी को तोड़ गया।
कम-ज़र्फ कमबख़्त ने फ़क़त दिल ही नहीं तोड़ा है,
अच्छे-ख़ासे इंसान को ज़िंदा लाश बना के छोड़ा है।
अच्छे-ख़ासे इंसान को ज़िंदा लाश बना के छोड़ा है।
कोशिशें तो हम भी बहुत करते हैं तुझे भुलाने की,
पर कमबख़्त दिल है कि, इजाज़त ही नहीं देता..!
पर कमबख़्त दिल है कि, इजाज़त ही नहीं देता..!
बड़ा ही 'पेचीदा' रिश्ता रहा हम दोनों के दरम्यान,
न वो हमें समझ सके न हम उन्हें समझा सके..!
न वो हमें समझ सके न हम उन्हें समझा सके..!
बहुत ही 'मुश्किल' है, दिल को अपने यह समझाना,
कि जिसे तू चाहता है, वो किसी और को चाहता है।
कि जिसे तू चाहता है, वो किसी और को चाहता है।
मसला ये नहीं है यार कि, तन्हा दिन गुज़र रहे हैं,
मलाल तो ये है कि, कमबख्त दिन जवानी के हैं।
मलाल तो ये है कि, कमबख्त दिन जवानी के हैं।
यूँ तो आज भी वो हर-पल दिल के मेरे पास रहता है,
जाने फ़िर क्यूँ ये कमबख़्त दिल इतना उदास रहता है।
जाने फ़िर क्यूँ ये कमबख़्त दिल इतना उदास रहता है।
दिल के आईने में मेरे, फ़क़त इक तेरी ही तस्वीर थी,
तुम्हें दिखाई न दी, ये मेरी 'बद-किस्मत' तक़दीर थी।
तुम्हें दिखाई न दी, ये मेरी 'बद-किस्मत' तक़दीर थी।
कभी सोचा ही न था कि, सफ़र में ऐसा भी मोड़ आएगा,
कोई अपना बनाकर हमको, फ़िर से 'तन्हा' छोड़ जाएगा।
कोई अपना बनाकर हमको, फ़िर से 'तन्हा' छोड़ जाएगा।
उसका किसी और का होना ही, मेरा रोना बनकर रह गया,
दिल मेरा उसके लिए, महज़ इक खिलौना बनकर रह गया।
दिल मेरा उसके लिए, महज़ इक खिलौना बनकर रह गया।
तुम भी तरस जाओगे इक रोज़, मुझसे मुलाक़ात करने को,
जिस तरह हम तरस रहें हैं आज, तुमसे इक बात करने को।
जिस तरह हम तरस रहें हैं आज, तुमसे इक बात करने को।
जो ज़िन्दगी लिखा करता था मुझे अपनी हर चिठ्ठी में,
मिलाकर चला गया वही मेरे सारे 'अरमान' मिट्टी में।
मिलाकर चला गया वही मेरे सारे 'अरमान' मिट्टी में।
वो कौनसी ख़ुशी थी मेरी 'जान', जो हमने तुम्हें न दी,
फिर क्यूँ तुमने हमसे, हमारे जीने की वज़ह छीन ली।
फिर क्यूँ तुमने हमसे, हमारे जीने की वज़ह छीन ली।
हमने तो अपनी हर साँस पे तेरा 'नाम' लिख दिया था,
फिर क्या ज़रूरत थी तुम्हें फ़िज़ाओं में ज़हर घोलने की।
फिर क्या ज़रूरत थी तुम्हें फ़िज़ाओं में ज़हर घोलने की।
Tum Zindagi Me To Nahi Rahe Hamari Shayari - Marudhar Rahi
तुम ज़िन्दगी में तो नहीं रहे हमारी, फिर भी हर 'वक़्त' तुम्हारा ही ख़याल रहता है,
कभी यादें कभी फ़रियादें, कभी आँसू कभी तड़प, तो कभी तुम्हारा मलाल रहता है।
कभी यादें कभी फ़रियादें, कभी आँसू कभी तड़प, तो कभी तुम्हारा मलाल रहता है।
मुक़म्मल शब रोता रहा फ़लक, और ख़बर ज़मीं को न हुई,
वो हमीं को 'तबाह' करते रहे, और ख़बर हमीं को न हुई..!!
वो हमीं को 'तबाह' करते रहे, और ख़बर हमीं को न हुई..!!
आज भी 'सुना' पड़ा है दिल का मेरा वो हर इक कोना...,
जहाँ बरसों पहले किसी की चाहत के गुल खिला करते थे।
जहाँ बरसों पहले किसी की चाहत के गुल खिला करते थे।
कम-ज़र्फ कमबख़्त ने, दिल को तोड़ा भी तो इस क़दर तोड़ा,
कि जोड़ दे या तोड़ दे फ़िर से कोई, इस क़ाबिल भी न छोड़ा।
कि जोड़ दे या तोड़ दे फ़िर से कोई, इस क़ाबिल भी न छोड़ा।
जितनी बे-दर्दी और बे-रहमी से दिल तोड़ा है तुमने मेरा,
वैसे तो कोई बे-ज़ुबान खिलौने को भी नहीं तोड़ता यार।
वैसे तो कोई बे-ज़ुबान खिलौने को भी नहीं तोड़ता यार।
दिल तो आज भी बे-हद तरसता है, 'गुफ़्तगू' तुमसे करने को,
बस अब हिम्मत ही नहीं रही, ख़ुद को और ज़लील करने की।
बस अब हिम्मत ही नहीं रही, ख़ुद को और ज़लील करने की।
न जाने कहाँ से सीख लिया उसने इतना 'फ़रेब' करना...,
हम तो जब भी मिलते थे, प्यार की ही बातें किया करते थे।
हम तो जब भी मिलते थे, प्यार की ही बातें किया करते थे।
दिल हमारी तरह उसने फिर, न जाने कितनो का दुखाया होगा,
करके हमें बेगाना, जाने उसने कितनो को अपना बनाया होगा।
करके हमें बेगाना, जाने उसने कितनो को अपना बनाया होगा।
हम-नवा हम-दर्द मेरा, दर्द पर मेरे मुस्करा के जा रहा है,
जिसके लिए ज़माना छोड़ा, वही हमें ठुकरा के जा रहा है।
जिसके लिए ज़माना छोड़ा, वही हमें ठुकरा के जा रहा है।
ख़्वाबों से कहेंगे कि, वो अब अपना वक़्त बे-वक़्त ज़ाया न करे,
बेसबब बिछड़कर जाने वाला, लौटकर फिर कभी आया न करे।
बेसबब बिछड़कर जाने वाला, लौटकर फिर कभी आया न करे।
आख़िर तू भी बदल गई, बदलते किसी मौसम की बहार की तरह,
देख हम वहीं के वहीं खड़े हैं, तन्हा किसी घर की दीवार की तरह।
देख हम वहीं के वहीं खड़े हैं, तन्हा किसी घर की दीवार की तरह।
लिखूँ तो क्या लिखूँ आज, आँखें नम हैं और दिल भी बड़ा उदास है,
जो था इस दिल को अज़ीज़-ओ-ख़ास, वो अब रक़ीबों के पास है।
जो था इस दिल को अज़ीज़-ओ-ख़ास, वो अब रक़ीबों के पास है।
ढली साँझ तो दरख़्तों पे परिंदे, अपने-अपने आशियाने ढूँढ़ रहे थे,
गुज़ारकर ग़ैरों की बाहों में वो दिन सारा, शाम को बहाने ढूँढ़ रहे थे।
गुज़ारकर ग़ैरों की बाहों में वो दिन सारा, शाम को बहाने ढूँढ़ रहे थे।
Wapas Lautne Me Takheer Na Kar - Marudhar Rahi
अब तू इतनी भी ताख़ीर न कर वापस लौटने में,
कि मैं माहिर हो जाऊं चाहतों का गला घोंटने में।
कि मैं माहिर हो जाऊं चाहतों का गला घोंटने में।
वो हमसे मिले तो ऐसे थे, जैसे कभी बिछड़ेंगे ही नहीं,
बिछड़े तो फिर कुछ इस कदर, कभी मिलेंगे ही नहीं..।
बिछड़े तो फिर कुछ इस कदर, कभी मिलेंगे ही नहीं..।
'ख़ुदा करे' किसी पर न ऐसी, शामत और क़यामत आए,
दिन जवानी के हो, और 'उल्फ़त' में ग़म-ए-फ़ुर्क़त आए।
दिन जवानी के हो, और 'उल्फ़त' में ग़म-ए-फ़ुर्क़त आए।
बर्बादियों की ओर हमने, ख़ुद अपना हर रस्ता कर लिया,
सस्ते लोगों से रफ़ाक़त करके, ख़ुद को सस्ता कर लिया।
सस्ते लोगों से रफ़ाक़त करके, ख़ुद को सस्ता कर लिया।
तन्हाइयों के बिस्तर पर, ग़मों की चादर ओढ़कर,
इक ज़िन्दा लाश करवटें ले रही है, जज़्बातों से मुँह मोड़कर।
इक ज़िन्दा लाश करवटें ले रही है, जज़्बातों से मुँह मोड़कर।
कोई हार कर भी जीत गया, तो कोई जीत कर भी हार गया,
कमबख्त दिल के मामले में, दिमाग वाला बाज़ी मार गया..!
कमबख्त दिल के मामले में, दिमाग वाला बाज़ी मार गया..!
सिमटकर रह गई फिर तमाम हसरतें और ख़्वाहिशें मेरी..,
जब कहा उसने कि, दिल की बातों को दिल से नहीं लगाया करते।
जब कहा उसने कि, दिल की बातों को दिल से नहीं लगाया करते।
फ़क़त इतना ही रिश्ता रह गया है, अब हम दोनों के दरम्यान,
हम मिलते भी हैं, तो इक-दूसरे को 'नज़र-अंदाज़' करने को।
हम मिलते भी हैं, तो इक-दूसरे को 'नज़र-अंदाज़' करने को।
'मेरे यार', तू मेरे दिल में ही नहीं, साँसों में भी समाया था,
तुमने देखा ही नहीं कभी ग़ौर से, मैं तेरा ही तो साया था।
तुमने देखा ही नहीं कभी ग़ौर से, मैं तेरा ही तो साया था।
पलकें बिछाए बैठे रहे हम, 'रात-भर' जिनकी राहों में,
मुक़म्मल शब गुजार दी उसने, किसी ग़ैर की बाहों में।
मुक़म्मल शब गुजार दी उसने, किसी ग़ैर की बाहों में।
तुझको दिल-ओ-धड़कन में बसाने की, इतनी बड़ी सज़ा न दे,
कोई नहीं है मेरा तेरे सिवा, मुझको 'मर' जाने की वज़हा न दे।
कोई नहीं है मेरा तेरे सिवा, मुझको 'मर' जाने की वज़हा न दे।
पाकर भी हम उन्हें पा न सके, खोकर भी हम उन्हें खो न सके,
दिल में दर्द तो बहुत था, चाहकर भी हम आँसुओं संग रो न सके।
दिल में दर्द तो बहुत था, चाहकर भी हम आँसुओं संग रो न सके।
दर्द की तुम्हारे कुछ इंतिहा कम हुई है, इसे बे-हद ही कर जाओ,
आओ कि फ़िर से मेरे दिल के हिस्से, कोई नई ज़द ही कर जाओ।
आओ कि फ़िर से मेरे दिल के हिस्से, कोई नई ज़द ही कर जाओ।
सुनाऊँ तो भला कैसे सुनाऊँ यार, तुम्हें अपनी दास्ताँ-ए-दिल,
होठों से मुस्कान ही नहीं, लफ्ज़ भी छीनकर ले गया संगदिल।
होठों से मुस्कान ही नहीं, लफ्ज़ भी छीनकर ले गया संगदिल।
ग़ज़ब का हौसला रखते हैं, कमबख़्त ये दिल तोड़ने वाले भी यार..,
अपने ही चाहने वाले का दिल तोड़कर, उफ़्फ़ तक नहीं किया करते।
अपने ही चाहने वाले का दिल तोड़कर, उफ़्फ़ तक नहीं किया करते।
क्यूँ लगाकर गए तुम यार, ऐसी आग 'दिल' के मेरे आशियाने में,
कि इक उम्र गुजर गई हमको, रो-रोकर अश्क़ों से आग बुझाने में।
कि इक उम्र गुजर गई हमको, रो-रोकर अश्क़ों से आग बुझाने में।
जिस पर किया था ख़ुद से ज़्यादा ऐतबार, वही हमकों दग़ा दे गया,
कुछ पल जीना सिखाकर, ताउम्र तड़प-तड़पकर मरने की सज़ा दे गया।
कुछ पल जीना सिखाकर, ताउम्र तड़प-तड़पकर मरने की सज़ा दे गया।
जब हमने ज़माने भर की, तमाम ख़ुशियाँ उनके दामन में डाल दी,
तो कमबख़्त हमारे हिस्से में, रंज-ओ-ग़म के सिवा कुछ बचा ही नहीं।
तो कमबख़्त हमारे हिस्से में, रंज-ओ-ग़म के सिवा कुछ बचा ही नहीं।
जी तो रहे हैं तुम्हारे बग़ैर भी, बस ख़ुश हुए इक ज़माना हो गया,
फ़क़त इक तुम्हारे चले जाने से, मुक़म्मल जहाँ बेगाना हो गया।
फ़क़त इक तुम्हारे चले जाने से, मुक़म्मल जहाँ बेगाना हो गया।
Aakar Thaam Lo Mujhko Bahon Me - Marudhar Rahi
आकर थाम लो मुझको अपनी बाहों में बिखरने से पहले,
इक लम्हा प्यार का जीना चाहता हूँ मैं 'मरने' से पहले..!
इक लम्हा प्यार का जीना चाहता हूँ मैं 'मरने' से पहले..!
बहुत 'मुश्किल' होगा, फिर भी कर जाऊँगा मैं,
तुम यूँही ख़फ़ा रही तो, बिन-बताए मर जाऊँगा मैं।
तुम यूँही ख़फ़ा रही तो, बिन-बताए मर जाऊँगा मैं।
कोई रह गया हो बाकी इल्ज़ाम, तो वो भी लगा दो,
मुझको मेरे ऐतबार की, हर-इक तुम 'सज़ा' दो...!!
मुझको मेरे ऐतबार की, हर-इक तुम 'सज़ा' दो...!!
वो दिल के क़रीब होकर भी नज़रों से मेरी दूर था,
उसे दिखाई न दी उल्फ़त मेरी ये उसका कूसूर था।
उसे दिखाई न दी उल्फ़त मेरी ये उसका कूसूर था।
बचा-खुचा दिल हमने अपना फिर ख़ुद ही तोड़ लिया,
ठुकराकर उसने हमें जब रक़ीबों संग नाता जोड़ लिया।
ठुकराकर उसने हमें जब रक़ीबों संग नाता जोड़ लिया।
हम उस राह से भी बड़ी ही बा-ख़ूबी से गुजरे हैं,
जहाँ लोग अपने ही वादों से "शौक़" से मुकरे हैं।
जहाँ लोग अपने ही वादों से "शौक़" से मुकरे हैं।
ये फ़ितरत है तुम्हारी या फिर सीखा है हुनर कहीं से,
करके वादे-वफ़ा हमसे, निभा रही हो हर किसी से।
करके वादे-वफ़ा हमसे, निभा रही हो हर किसी से।
हँसते मुस्कुराते मेरे चेहरे की हर 'मुस्कान' ले ली,
जान-जान कहने वाले ने ही यार मेरी जान ले ली।
जान-जान कहने वाले ने ही यार मेरी जान ले ली।
काश... कि वो जाते-जाते हमको बस इतना जता जाते,
वो किस ख़ता से ख़फ़ा होकर गए मेरी ये तो बता जाते।
वो किस ख़ता से ख़फ़ा होकर गए मेरी ये तो बता जाते।
शिद्दत से सजाए थे कुछ ख़्वाब, न जाने कहाँ गुम हो गए,
हम 'हम' न रहे अब यार, उनके लिए महज़ तुम हो गए।
हम 'हम' न रहे अब यार, उनके लिए महज़ तुम हो गए।
क्या कहें कि दिन दुगने तो रातें चौगुनी सी लगती है,
तेरे बग़ैर मेरे यार कायनात सुनी-सुनी सी लगती है।
तेरे बग़ैर मेरे यार कायनात सुनी-सुनी सी लगती है।
Khud Apne Hi Dil Ko Kaisi Saza De Di - Marudhar Rahi
ख़ुद अपने ही दिल को अपने हाथों, ये कैसी सज़ा देदी हमने,
जो क़ाबिल न थे दोस्ती के, उन्हें 'दिल' में जगहा देदी हमने।
जो क़ाबिल न थे दोस्ती के, उन्हें 'दिल' में जगहा देदी हमने।
चले जो राह-ए-इश्क़ कुछ दूर हम, तो इतना मालूम हुआ,
कि दिल खोता ही नहीं, तड़प-तड़पकर रोता भी बहुत है..!
कि दिल खोता ही नहीं, तड़प-तड़पकर रोता भी बहुत है..!
ऐसा नहीं है कि, हम पहले अच्छे थे और अब बुरे हो गए,
बस उनकी नज़रों में हमसे बेहतर, कुछ सरफिरे हो गए।
बस उनकी नज़रों में हमसे बेहतर, कुछ सरफिरे हो गए।
किसी का होकर भी देखा, और फिर उन्हें खोकर भी देखा,
वो न समझे हालात और जज़्बात, मैंने रो-रोकर भी देखा।
वो न समझे हालात और जज़्बात, मैंने रो-रोकर भी देखा।
जिस कमबख़्त के मैंने जी-भर कर ख़ूब लाड़ लड़ाए हैं,
अफ़सोस उसी ने मेरे अरमानों पे मय्यत के फूल चढ़ाए हैं।
अफ़सोस उसी ने मेरे अरमानों पे मय्यत के फूल चढ़ाए हैं।
जिसको बसाया था अपने 'दिल' में , उसी ने दिल तोड़ दिया,
कुछ पल अपना बनाकर, ज़माने में फिर से तन्हा छोड़ दिया।
कुछ पल अपना बनाकर, ज़माने में फिर से तन्हा छोड़ दिया।
ग़र मालूम जो होता पहले हमको कि, वो इतने पत्थर-दिल हैं,
तो कसम से, दिल जोड़ने की बजाय सर फोड़ लेते उस पत्थर से।
तो कसम से, दिल जोड़ने की बजाय सर फोड़ लेते उस पत्थर से।
मेरे सीने में जो दिल पहले धड़कता था, वो आज भी धड़क रहा है,
पहले मचलता था तुझे याद करके, अफ़सोस... आज तड़प रहा है।
पहले मचलता था तुझे याद करके, अफ़सोस... आज तड़प रहा है।
जिस शख्स को ठीक से, लुड़ो तक खेलना नहीं आता था मेरे यार,
वो मेरी ज़िन्दगी से ही नहीं, जज़्बातों से भी बा-ख़ूबी खेल गया..!!
वो मेरी ज़िन्दगी से ही नहीं, जज़्बातों से भी बा-ख़ूबी खेल गया..!!
लगता है मेरे यार, मेरा 'मुक़द्दर' मुझसे ख़फ़ा होकर रूठ रहा है,
जो इतनी कशिश के बावजूद भी, मेरे हाथ से तेरा हाथ छूट रहा है।
जो इतनी कशिश के बावजूद भी, मेरे हाथ से तेरा हाथ छूट रहा है।
सुर्ख़ आँखों की तलब-ए-दीद में, तुम अपना चेहरा ज़र्द कर जाओ,
आओ कि फ़िर से मेरे दिल के हिस्से में, थोड़ा और दर्द कर जाओ।
आओ कि फ़िर से मेरे दिल के हिस्से में, थोड़ा और दर्द कर जाओ।
Mausam E Patjhad Me Aane Wali Shayari - Marudhar Rahi
मौसम-ए-पतझड़ में आने वाली, पहली बसंत बहार की तरह,
काश... वो आये मिलने आख़िरी मर्तबा, पहली बार की तरह।
काश... वो आये मिलने आख़िरी मर्तबा, पहली बार की तरह।
कहीं आँधियाँ चल रही थी, तो कहीं थम के बदरा बरस रहे थे,
वो जब ग़ैरों संग गुलछर्रे उड़ा रहे थे, हम गुफ़्तगू को तरस रहे थे।
वो जब ग़ैरों संग गुलछर्रे उड़ा रहे थे, हम गुफ़्तगू को तरस रहे थे।
मेरी वफ़ा को ठुकराने वाले, अब तू ज़माने को भी आज़माकर देख ले,
कौन मरता है तेरे संग, तू अपनी मौत की झूठी ख़बर फैलाकर देख ले।
कौन मरता है तेरे संग, तू अपनी मौत की झूठी ख़बर फैलाकर देख ले।
वादा कर के 'हँसाने' का फिर क्यूँ तुमने हमको रूला दिया..,
जरा ये तो बतलाओ वो कौन ख़ुश-नसीब है, जिसके लिए हमकों भुला दिया।
जरा ये तो बतलाओ वो कौन ख़ुश-नसीब है, जिसके लिए हमकों भुला दिया।
ख़ता हुई थी इक ग़रीब से, वफ़ा का ख़्वाब जगती आँखों से देखने की,
सज़ा में उसने फिर रो-रोकर, आँखों के रास्ते दर्द के दरिया बहा दिए।
सज़ा में उसने फिर रो-रोकर, आँखों के रास्ते दर्द के दरिया बहा दिए।
लगाकर अपने सीने से हमको, तुम तो मेरे अपने होने का हर दावा करते थे,
अब कैसे समझाए इस दिल-ए-नादाँ को, तुम महज़ इक छलावा करते थे।
अब कैसे समझाए इस दिल-ए-नादाँ को, तुम महज़ इक छलावा करते थे।
तन्हाईयों संग तन्हा बैठा रो रहा है, वो बद-नसीब अभागा कई रातों से,
महफ़िल लूट ले गया कोई उसकी, जिसे सजाई थी उसने अपने हाथों से।
महफ़िल लूट ले गया कोई उसकी, जिसे सजाई थी उसने अपने हाथों से।
जो अपनी फ़िक्र और ख़ुशियों को छोड़कर, तेरे ग़मों में शामिल हो गया,
तू उसी को ज़माने में तन्हा छोड़कर, उसके रक़ीबों में शामिल हो गया..!
तू उसी को ज़माने में तन्हा छोड़कर, उसके रक़ीबों में शामिल हो गया..!
वो मेरे जज़्बातों पर कफ़न डालकर, ग़ैरों की महफ़िल में जश्न मना रहे हैं,
करके बहाना कुछ काम का, हमसे बात ना करने का 'बहाना' बना रहे हैं।
करके बहाना कुछ काम का, हमसे बात ना करने का 'बहाना' बना रहे हैं।
रस्में बदल गई कसमें बदल गई, और बदल गए प्यार वफ़ा के मुक़म्मल वादे,
जब मिला उन्हें हमसे बेहतर कोई और, बदले उसने दिल के अपने सारे इरादे।
जब मिला उन्हें हमसे बेहतर कोई और, बदले उसने दिल के अपने सारे इरादे।
शिद्दत से तुम्हें अपना बनाया था, और पलभर में तुमने हमें बेगाना कर दिया,
तुमने तो सजा ली अपने दिल की महफ़िल, सूना मेरा आशियाना कर दिया।
तुमने तो सजा ली अपने दिल की महफ़िल, सूना मेरा आशियाना कर दिया।
Gar Aayen Wo Laash Par Meri Yaaron Shayari - Marudhar Rahi
ग़र आयें वो लाश पर मेरी यारों, तो चेहरे से मेरे 'कफ़न' हटा देना,
वो आँसू भी बहाएंगे झूठे, पर मेरी ओर से तुम सच में मुस्कुरा देना।
वो आँसू भी बहाएंगे झूठे, पर मेरी ओर से तुम सच में मुस्कुरा देना।
आह पर आह बेहिसाब भरता हूँ, तेरे आने की हर-रोज़ मुसलसल 'राह' तकता हूँ,
न जाने किस घड़ी आ आओ तुम लौटकर, इसी उम्मीद में मुक़म्मल रात जगता हूँ।
न जाने किस घड़ी आ आओ तुम लौटकर, इसी उम्मीद में मुक़म्मल रात जगता हूँ।
मत पूछ मेरे यारा, कितने 'टुकड़ों' में जिए हैं ज़िन्दगी हम तेरे जाने के बाद..,
कभी आँसू कभी तड़प, कभी दर्द कभी याद, कभी तन्हाई तो कभी फ़रियाद।
कभी आँसू कभी तड़प, कभी दर्द कभी याद, कभी तन्हाई तो कभी फ़रियाद।
आकर मेरे दिल के इतने बे-हद क़रीब, अब तू ख़ुद को मुझसे ऐसे दूर न कर,
मैंने खाई है जुदा तुझसे होकर मरने की कसमें, निभाने को उन्हें मजबूर न कर।
मैंने खाई है जुदा तुझसे होकर मरने की कसमें, निभाने को उन्हें मजबूर न कर।
समन्दर सी तासीर थी मेरी, फिर भी वो दरिया बनकर मुझ में न समा सके,
उम्मीद थी लबों की ख़ामोशी भी पढ़ लेंगे वो, जिन्हें हम लफ़्ज़ों में न समझा सके।
उम्मीद थी लबों की ख़ामोशी भी पढ़ लेंगे वो, जिन्हें हम लफ़्ज़ों में न समझा सके।
ऐ मेरे दिल-ए-नादाँ, तू क्यूँ मुझसे उस बे-ख़बर की बेरुख़ी से इस क़दर रूठ रहा है,
पलटकर पीछे वही देखा करते हैं, जिन्हें एहसास हो सफ़र में कुछ न कुछ छूट रहा है।
पलटकर पीछे वही देखा करते हैं, जिन्हें एहसास हो सफ़र में कुछ न कुछ छूट रहा है।
ना हँसता हूँ ना रोता हूँ, ना जगता हूँ ना सोता हूँ, बस हर लम्हा तेरे ख़यालों में ख़ोया रहता हूँ,
कहीं सूख़ न जाए आँखें मेरी तेरे दीदार की तलब में, इसलिए इन्हें अश्क़ों में भिगोया रहता हूँ।
कहीं सूख़ न जाए आँखें मेरी तेरे दीदार की तलब में, इसलिए इन्हें अश्क़ों में भिगोया रहता हूँ।
वादे वफ़ा के तोड़कर न जा,
रोता हमें यूँ छोड़कर न जा,
एक ही तक़दीर है पास मेरे,
ज़ालिम उसे फोड़कर न जा।
रोता हमें यूँ छोड़कर न जा,
एक ही तक़दीर है पास मेरे,
ज़ालिम उसे फोड़कर न जा।
नये साल में नया तराना लिखेंगे,
तुझको हम गुज़रा ज़माना लिखेंगे,
सदियों याद रखे जिसे ये दुनियाँ,
ऐसा हम अपना 'फ़साना' लिखेंगे।
तुझको हम गुज़रा ज़माना लिखेंगे,
सदियों याद रखे जिसे ये दुनियाँ,
ऐसा हम अपना 'फ़साना' लिखेंगे।
Dillagi Kar Ke Dil Lagana Bhool Gaya Shayari - Marudhar Rahi
दिल्लगी कर के दिल लगाना भूल गया,
वादे पर वादे कर के निभाना भूल गया,
वो हुआ हमसे रुखसत कुछ इस क़दर,
कि... लौटकर 'वापस' आना भूल गया।
वादे पर वादे कर के निभाना भूल गया,
वो हुआ हमसे रुखसत कुछ इस क़दर,
कि... लौटकर 'वापस' आना भूल गया।
चाहत की सारी रस्में कसमें तोड़कर,
मैंने चाहा है तुझे ज़माने को छोड़कर,
बा-ख़ुदा हम तो जीते-जी मर जाएंगे.,
जाओ न तुम हमसे ऐसे मुँह मोड़कर।
मैंने चाहा है तुझे ज़माने को छोड़कर,
बा-ख़ुदा हम तो जीते-जी मर जाएंगे.,
जाओ न तुम हमसे ऐसे मुँह मोड़कर।
इक अच्छा ख़ासा शख़्स पत्थर हो गया,
जिगर में जब उसके यह नश्तर हो गया,
ठुकराकर मेरी बे-पनाह मोहब्बत को..,
हम-सफ़र रक़ीबों संग हम-बिस्तर हो गया।
जिगर में जब उसके यह नश्तर हो गया,
ठुकराकर मेरी बे-पनाह मोहब्बत को..,
हम-सफ़र रक़ीबों संग हम-बिस्तर हो गया।
दिल की हर धड़कन वीरान हो गई है,
जुदा जबसे तू मुझसे मेरी जान हो गई है,
ऐसी क्या ख़ता हुई उल्फ़त में मुझसे..,
जो तू अब रक़ीबों पर मेहरबान हो गई है।
जुदा जबसे तू मुझसे मेरी जान हो गई है,
ऐसी क्या ख़ता हुई उल्फ़त में मुझसे..,
जो तू अब रक़ीबों पर मेहरबान हो गई है।
काश... कि कुछ लोग हमसे मिले न होते,
तो ज़िन्दगी से आज इतने गिले न होते,
महक गए घर ग़ैरों के जिन गुलों की ख़ुशबू से,
गुलशन में हमारे वो कभी खिले न होते।
तो ज़िन्दगी से आज इतने गिले न होते,
महक गए घर ग़ैरों के जिन गुलों की ख़ुशबू से,
गुलशन में हमारे वो कभी खिले न होते।
Bhav Gehre Ho To Alfaaz Samajh Nahi Aate Shayari - Marudhar Rahi
भाव गहरे हो तो अल्फ़ाज़ समझ नहीं आते,
मुख़्तलिफ़ हो चहरे तो राज़ समझ नहीं आते,
जिनकी नीयत और फ़ितरत में हो दग़ा करना,
उन्हें फ़िर 'वफ़ा' के अंदाज़ समझ नहीं आते।
मुख़्तलिफ़ हो चहरे तो राज़ समझ नहीं आते,
जिनकी नीयत और फ़ितरत में हो दग़ा करना,
उन्हें फ़िर 'वफ़ा' के अंदाज़ समझ नहीं आते।
बद-क़िस्मती से किसी की कहानी में आ गए,
बर्बादियों की राह हम भरी जवानी में आ गए,
देखा जो पलटकर पीछे सफ़र वापसी का तन्हा,
मौसम-ए-सर्द में पसीने मेरे पेशानी में आ गए।
बर्बादियों की राह हम भरी जवानी में आ गए,
देखा जो पलटकर पीछे सफ़र वापसी का तन्हा,
मौसम-ए-सर्द में पसीने मेरे पेशानी में आ गए।
हर हँसता हुआ चेहरा खुशहाल नहीं होता,
हर किसी से बयां दिल का मलाल नहीं होता,
अक्सर हम खुद को खो देते हैं जिनके तसव्वुर में,
अफ़सोस... उन्हीं को हमारा ख़याल नहीं होता।
हर किसी से बयां दिल का मलाल नहीं होता,
अक्सर हम खुद को खो देते हैं जिनके तसव्वुर में,
अफ़सोस... उन्हीं को हमारा ख़याल नहीं होता।
मर गया 'मरुधर राही', फ़क़त इतना ख़याल करके,
कोई कैसे चला गया, मेरी वफ़ा पे सवाल करके,
अब तो ख़ुदा ही देगा उन्हें गवाही मेरी वफ़ा की..,
फिर वो भी रोएंगे, मेरी 'वफ़ा' का मलाल करके।
कोई कैसे चला गया, मेरी वफ़ा पे सवाल करके,
अब तो ख़ुदा ही देगा उन्हें गवाही मेरी वफ़ा की..,
फिर वो भी रोएंगे, मेरी 'वफ़ा' का मलाल करके।
इक अरसे से भुलाकर बैठे हैं हँसी क्या चीज़ है,
कोई हमसे पूछे तो बतलाए बेबसी क्या चीज़ है,
जिसको चाहा था शिद्दत से हमने वो मिला नहीं,
अब हज़ारों भी मिले उसके 'जैसी' क्या चीज़ है।
कोई हमसे पूछे तो बतलाए बेबसी क्या चीज़ है,
जिसको चाहा था शिद्दत से हमने वो मिला नहीं,
अब हज़ारों भी मिले उसके 'जैसी' क्या चीज़ है।
ज़ुबां ख़ामोश थी पर निग़ाहें कुछ और कह रही थी,
सीने से जब लगाया तो बाहें कुछ और कह रही थी,
हमको अपनी मुक़म्मल मंज़िल क़रार देकर...,
वो जिस ओर जा रहे थे वो राहें कुछ और कह रही थी।
सीने से जब लगाया तो बाहें कुछ और कह रही थी,
हमको अपनी मुक़म्मल मंज़िल क़रार देकर...,
वो जिस ओर जा रहे थे वो राहें कुछ और कह रही थी।
बेचैनियाँ बेक़रारियाँ बेताबियाँ सब कुछ पास लिए बैठे हैं हम,
आँखों में अश्क़ लबों पर ख़ामोशी दिल उदास लिए बैठे हैं हम,
हमको मालूम है कि अब न आओगे तुम लौटकर कभी वापस,
फ़िर भी तुम्हारे आने की इक 'झूठी' आस लिए बैठे हैं हम...!!
आँखों में अश्क़ लबों पर ख़ामोशी दिल उदास लिए बैठे हैं हम,
हमको मालूम है कि अब न आओगे तुम लौटकर कभी वापस,
फ़िर भी तुम्हारे आने की इक 'झूठी' आस लिए बैठे हैं हम...!!
खो रहे हो जिसकी ख़ातिर तुम हमें, उन्हें कभी खोओगे तो नहीं,
जुदा उनसे बीच राह फिर हमारी तरह, तुम कभी होवोगे तो नहीं,
जाते-जाते हमसे फ़क़त, इक आख़िरी वादा करते जाओ तुम..,
कल को गर मैं मर भी गया तो मेरे लिए, तुम कहीं रोओगे तो नहीं।
जुदा उनसे बीच राह फिर हमारी तरह, तुम कभी होवोगे तो नहीं,
जाते-जाते हमसे फ़क़त, इक आख़िरी वादा करते जाओ तुम..,
कल को गर मैं मर भी गया तो मेरे लिए, तुम कहीं रोओगे तो नहीं।
- मरुधर राही ✍️

















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