जिंदगी के कुछ सच मीठे नहीं होते, पर वो दिल को सीधा छू जाते हैं। हम अक्सर वो बातें नहीं कह पाते जो सच होती हैं। नमस्कार दोस्तों, My Alfaaz पर मैं Marudhar Rahi आपके लिए लाया हूँ True Line Status in Hindi का सबसे बेहतरीन कलेक्शन। इस पोस्ट में आपको जिंदगी, प्यार, दोस्ती और दर्द की सच्ची लाइनों पर लिखी गई ऐसी शायरियाँ मिलेंगी, जो आप WhatsApp Status, Instagram Caption या Facebook Post के तौर पर लगा सकते हैं। ये सिर्फ स्टेटस नहीं, बल्कि जिंदगी की हकीकत हैं।
True Line Shayari on Life in Hindi - Zindagi Ki Sacchai
कौन रोयेगा लाश पे मेरी 'मुर्शद',
मुझे आदत है सच बोलने की..!!
मुझे आदत है सच बोलने की..!!
यूँ ही नहीं वो अपने कहे जाते हैं..,
कुछ दर्द, मय्यत तक साथ निभाते हैं।
कुछ दर्द, मय्यत तक साथ निभाते हैं।
ग़र देह में तुम्हारी कोई दुःख नहीं,
तो इससे बड़ा कोई 'सुख' नहीं..!!
तो इससे बड़ा कोई 'सुख' नहीं..!!
मेरे दोस्त सब जीते-जी के मेले हैं,
बाद मरने के तो सभी अकेले हैं..!!
बाद मरने के तो सभी अकेले हैं..!!
वादे उन्हीं के अनेक हुआ करते हैं,
इरादे न जिनके नेक हुआ करते हैं।
इरादे न जिनके नेक हुआ करते हैं।
रिश्तों में रिश्ता इक वही सही है,
जिसमें तुम ग़लत मैं सही नहीं है।
जिसमें तुम ग़लत मैं सही नहीं है।
ये भी 'सच' है कि, सच बोलने से,
लोग सच में, बुरा मान जाते हैं..!!
लोग सच में, बुरा मान जाते हैं..!!
ग़र लोग सच पर ही 'यक़ीन' कर लेते,
तो शायद झूठ का जन्म ही नहीं होता।
तो शायद झूठ का जन्म ही नहीं होता।
ख़ामोशियां भी बड़ा 'शौर' मचाती है,
बशर्ते, कान से नहीं ध्यान से सुनना।
बशर्ते, कान से नहीं ध्यान से सुनना।
Zindagi Ki Sacchai Par True Lines
जितना आसान मुफ़्त का ज्ञान बाँटना है,
उतना ही कठिन किसी का दर्द बाँटना है।
उतना ही कठिन किसी का दर्द बाँटना है।
दुनिया बहुत 'ज्ञानी' है, उसे न ज्ञान दो,
बेहतर होगा, तुम ख़ुद पर ही ध्यान दो।
बेहतर होगा, तुम ख़ुद पर ही ध्यान दो।
जब वक़्त और हालात दोनों विपरीत हो,
तो बेहतर होगा कि आप ख़ामोश ही रहें।
तो बेहतर होगा कि आप ख़ामोश ही रहें।
कितना अच्छा होता है ना ये बुरा वक़्त,
हर चेहरे से नक़ाब हटा दिया करता है।
हर चेहरे से नक़ाब हटा दिया करता है।
जनाब, ये सब तो नसीबों के बट-बांटे हैं,
जो आपके हिस्से में फूल, मेरे में कांटे हैं।
जो आपके हिस्से में फूल, मेरे में कांटे हैं।
लोग पैसों से भले ही अमीर होते जा रहे हैं,
मगर अफ़सोस, सोच से ग़रीब होते जा रहे हैं।
मगर अफ़सोस, सोच से ग़रीब होते जा रहे हैं।
ख़ुद को न कभी तुम ख़ुद से 'शर्मिंदा' रखना,
हालात बिगड़े तो बिगड़े, ज़मीर ज़िंदा रखना।
हालात बिगड़े तो बिगड़े, ज़मीर ज़िंदा रखना।
Mitti Ki Kaya Aur Jhoothi Moh Maya - Marudhar Rahi
मिट्टी की काया, और झूठी मोह-माया,
फिर भी इंसां में, कितना गुरूर है समाया।
दो पल की ये हस्ती, चार दिन का साया,
जाने फिर क्यूँ इंसां ने, ख़ुद को बड़ा बताया।
फिर भी इंसां में, कितना गुरूर है समाया।
दो पल की ये हस्ती, चार दिन का साया,
जाने फिर क्यूँ इंसां ने, ख़ुद को बड़ा बताया।
ख़्वाहिशों पर वक़्त के पहरे हुआ करते हैं,
हँसती आँखों के ज़ख्म गहरे हुआ करते हैं,
कोई क्या ही पहचाने इन्सान की फ़ितरत..,
एक चेहरे के पीछे कई चेहरे हुआ करते हैं।
हँसती आँखों के ज़ख्म गहरे हुआ करते हैं,
कोई क्या ही पहचाने इन्सान की फ़ितरत..,
एक चेहरे के पीछे कई चेहरे हुआ करते हैं।
क्यूँ करते हो तुम इतनी जोरा-जोरी,
साथ नहीं जाने वाली कोई तिजोरी,
मुलाक़ातों का सिलसिला भी रखो,
जाने कब टूट जाए 'साँसों' की डोरी।
साथ नहीं जाने वाली कोई तिजोरी,
मुलाक़ातों का सिलसिला भी रखो,
जाने कब टूट जाए 'साँसों' की डोरी।
आख़िर में जब सबको मिट्टी ही होना है,
तो फिर किस लिए इतना रोना धोना है,
गहरी नींद तो उसी बिस्तर पर आएगी यार,
जिसमें न कोई तकिया न कोई बिछौना है।
तो फिर किस लिए इतना रोना धोना है,
गहरी नींद तो उसी बिस्तर पर आएगी यार,
जिसमें न कोई तकिया न कोई बिछौना है।
वक़्त अच्छा है तो उसकी क़दर करो,
और बुरा है तो फिर तुम सबर करो।
कैसा भी हो वक़्त ज़्यादा दिन टिक नहीं पाता,
अच्छा या बुरा वक़्त कभी बताकर नहीं आता।
और बुरा है तो फिर तुम सबर करो।
कैसा भी हो वक़्त ज़्यादा दिन टिक नहीं पाता,
अच्छा या बुरा वक़्त कभी बताकर नहीं आता।
जो हुआ न अब से पहले वो अब हो नहीं सकता,
खुली आँखों से कभी कोई सो नहीं सकता,
क्यूँ करूँ मैं ज़माने से अदावत और बग़ावत..,
मुझे इल्म है मैं अपनी ही लाश पे रो नहीं सकता।
खुली आँखों से कभी कोई सो नहीं सकता,
क्यूँ करूँ मैं ज़माने से अदावत और बग़ावत..,
मुझे इल्म है मैं अपनी ही लाश पे रो नहीं सकता।
जो दुनिया पहले विश्वास पर टिकी थी,
अफ़सोस, वही अब स्वार्थ पर टिकी है।
अफ़सोस, वही अब स्वार्थ पर टिकी है।
हैरत हूँ यार लोगों को बे-ग़ैरत देखकर,
वो हाल भी पूछते हैं तो खैरियत देखकर।
वो हाल भी पूछते हैं तो खैरियत देखकर।
कुछ अपने ही लिए गए ग़लत फ़ैसले...
देर से समझ आते हैं कि वो कितने सही थे।
देर से समझ आते हैं कि वो कितने सही थे।
लोगों की बातों पर कभी जाना नहीं - Duniya Ki Sacchai Par True Lines
लोगों की बातों पर कभी जाना नहीं,
लोग फ़क़त ताना देते हैं खाना नहीं।
लोग फ़क़त ताना देते हैं खाना नहीं।
मैंने लोगों को फ़क़त इतना ही समझा,
जो जैसा था उसने मुझे वैसा ही समझा।
जो जैसा था उसने मुझे वैसा ही समझा।
अपने पापों की 'गठरी' भारी मत होने देना तुम..,
सुना है आख़री सफ़र में सहारे नहीं मिला करते।
सुना है आख़री सफ़र में सहारे नहीं मिला करते।
कभी बे-मतलब भी याद कर लिया करो हमको यारों..,
मतलब के इन रिश्तों की, उम्र बड़ी छोटी हुआ करती है।
मतलब के इन रिश्तों की, उम्र बड़ी छोटी हुआ करती है।
न मंज़िल है न मुक़ाम है, फ़िर भी मैं चलता ही जा रहा,
ये जीवन महज़ बर्फ़ के समान, जो पिघलता ही जा रहा।
ये जीवन महज़ बर्फ़ के समान, जो पिघलता ही जा रहा।
मैं हर-रोज़ मिलता रहा लोगों से, नए कपड़े बदल-बदल कर,
मुझे एक ही कपड़े में ले गए लोग, अपने कंधे बदल-बदल कर।
मुझे एक ही कपड़े में ले गए लोग, अपने कंधे बदल-बदल कर।
Zindagi To Unki Rangeen Hai - Marudhar Rahi
ज़िन्दगी तो उनकी रंगीन है,
ज़ुर्म जिनके बेहद संगीन है।
ज़ुर्म जिनके बेहद संगीन है।
ज़माना बड़ा समझदार हो गया है साहिब,
चेहरा मासूम, दिल गद्दार हो गया है साहिब।
चेहरा मासूम, दिल गद्दार हो गया है साहिब।
किसी के चेहरे की ख़ामोशी पर मत जाना 'साहिब',
अक्सर ठंडी राख़ के नीचे दहकते शोले हुआ करते हैं।
अक्सर ठंडी राख़ के नीचे दहकते शोले हुआ करते हैं।
क्या करोगे साहिब तुम मेरा दर्द जानकर,
सुना है तुम तो नमक का व्यापार करते हो।
सुना है तुम तो नमक का व्यापार करते हो।
मिट्टी के इन्सान को पल में, मिट्टी में मिला देती है,
दिल से निकली आह, बुनियाद तक हिला देती है।
दिल से निकली आह, बुनियाद तक हिला देती है।
देर कहाँ लगती है 'साहिब', ख़ास से आम होने में,
वक़्त ही कितना लगता है, सुबह से शाम होने में।
वक़्त ही कितना लगता है, सुबह से शाम होने में।
बाहर से सख़्त और कठोर वही इन्सान होता है..,
जिसके अन्दर टूटकर बहुत कुछ बिखरा पड़ा हो।
जिसके अन्दर टूटकर बहुत कुछ बिखरा पड़ा हो।
दो कौड़ी के लोगों से, और लाइलाज रोगों से,
जितना बचकर रहोगे, उतना ही 'बेहतर' होगा।
जितना बचकर रहोगे, उतना ही 'बेहतर' होगा।
बेहतर होता है जब हम ऐसे लोगों से दूर होते हैं,
जो वक़्त पड़ने पर मासूम होकर मजबूर होते हैं।
जो वक़्त पड़ने पर मासूम होकर मजबूर होते हैं।
घाव तो भर ही जाते हैं, मगर निशान रह जाते हैं,
कुछ लोग बातों-बातों में, बहुत कुछ कह जाते हैं।
कुछ लोग बातों-बातों में, बहुत कुछ कह जाते हैं।
Kadvi Sacchai Status in Hindi
अक्सर हमसे वही नाराज़ होते हैं,
दिल में ना जिनके 'राज़' होते हैं।
दिल में ना जिनके 'राज़' होते हैं।
मतलबी लोगों की इस भीड़ में,
सच्चा इंसान ढूंढना भी हुनर है।
सच्चा इंसान ढूंढना भी हुनर है।
सच कड़वा ही सही 'मरुधर राही',
पर झूठ से बेहतर हुआ करता है।
पर झूठ से बेहतर हुआ करता है।
कुछ ज़ख़्मों का 'मरहम'..,
वक़्त के पास भी नहीं हुआ करता।
वक़्त के पास भी नहीं हुआ करता।
जो 'जज़्बातों' में बह जाते हैं,
वो किनारों से महरूम रह जाते हैं।
वो किनारों से महरूम रह जाते हैं।
पेट की 'भूख'..,
हर शौक़ से बड़ी हुआ करती है 'साहिब'।
हर शौक़ से बड़ी हुआ करती है 'साहिब'।
Manjil Aur Safar Sad Shayari By Marudhar Rahi
यूँ तो 'मंज़िल' बहुत क़रीब थी मेरे यार,
कमबख़्त सफ़र ही कुछ लम्बा निकला।
कमबख़्त सफ़र ही कुछ लम्बा निकला।
हर इंसान अपनी अच्छी-बुरी 'तकदीर',
ख़ुद अपनी ही मुठ्ठी में बंद करके लाता है।
ख़ुद अपनी ही मुठ्ठी में बंद करके लाता है।
ये मैं नहीं कहता मेरा 'तजुर्बा' कहता है,
हर शख़्स में छुपा इक और शख़्स रहता है।
हर शख़्स में छुपा इक और शख़्स रहता है।
जब कल का और पल का पता नहीं,
तो अभी ख़ुश रहना कोई ख़ता नहीं।
तो अभी ख़ुश रहना कोई ख़ता नहीं।
वक़्त तो वक़्त आने पर ही बदलेगा,
इन्सान थोड़े ही है, जो बे-वक़्त बदलेगा।
इन्सान थोड़े ही है, जो बे-वक़्त बदलेगा।
झूठी उम्मीदों के पुल न बाँधो इस बे-दर्द ज़माने में,
मौक़ा मिले तो हर शख़्स 'माहिर' है दिल दुखाने में।
मौक़ा मिले तो हर शख़्स 'माहिर' है दिल दुखाने में।
कोई कितना ही क्यों न हो फिर ख़ास और क़रीबी,
दूर हो ही जाता है, देखकर इक रोज़ अपनी ग़रीबी।
दूर हो ही जाता है, देखकर इक रोज़ अपनी ग़रीबी।
यह कलयुग है 'मरुधर राही',
इसमें होंठो की नहीं, नोटों की भाषा समझ आती है।
इसमें होंठो की नहीं, नोटों की भाषा समझ आती है।
सारे रिश्ते-नातों को अपने दम पे तौलता है,
और जो ज़ुबाँ न बोले वो 'पैसा' बोलता है..!!
और जो ज़ुबाँ न बोले वो 'पैसा' बोलता है..!!
हद से ज़्यादा जहाँ तू 'मौजूद' हो जाएगा,
फिर ख़त्म वहाँ तेरा ही वजूद हो जाएगा।
फिर ख़त्म वहाँ तेरा ही वजूद हो जाएगा।
अक्सर मर्द की 'ना-कामयाबी',
औरत को बेवफ़ा बना देती है..!
औरत को बेवफ़ा बना देती है..!
ख़ाली जिसकी जेब है..,
उसमें फिर बहुत से ऐब है।
उसमें फिर बहुत से ऐब है।
अक्सर औरतें जिस्म से ज़्यादा..,
तारीफ़ की तलबग़ार हुआ करती है।
तारीफ़ की तलबग़ार हुआ करती है।
Life Reality True Lines in Hindi
चेहरे की 'झुर्रियां' कहती है कि..,
अब कुछ नेकियाँ भी बटोरी जाए।
अब कुछ नेकियाँ भी बटोरी जाए।
सहरा में गुल कभी खिलता नहीं,
बग़ैर नसीब के कुछ मिलता नहीं।
बग़ैर नसीब के कुछ मिलता नहीं।
कुछ कर्म होते हैं 'ज़नाब', करने को,
वरना कौन जीता है महज़ मरने को।
वरना कौन जीता है महज़ मरने को।
कोई साथ नहीं देता इन्सान के जीते-जी,
फ़क़त बातें करते हैं साथ जीने-मरने की।
फ़क़त बातें करते हैं साथ जीने-मरने की।
मेरे यार भरोसे का ही दूसरा नाम धोका है,
चाहो तो आज़मा लो तुम्हें किसने रोका है।
चाहो तो आज़मा लो तुम्हें किसने रोका है।
कश्ती में हमारी फ़िर वही छेद किया करते हैं,
बयाँ जिनसे हम अपना हर भेद किया करते हैं।
बयाँ जिनसे हम अपना हर भेद किया करते हैं।
झूठी कसमें खाते हैं लोग सच को छुपाने के लिए - True Shayari
झूठी कसमें खाते हैं लोग,
'सच' को छुपाने के लिए।
'सच' को छुपाने के लिए।
किसी को धोखे में रखना,
धोखे से भी बड़ा गुनाह है।
धोखे से भी बड़ा गुनाह है।
जनाब ये दुनिया दारी है,
मतलब की यहाँ यारी है,
जो दिल में द्वेष रखते हैं..,
ज़ुबां उनकी भी प्यारी है।
मतलब की यहाँ यारी है,
जो दिल में द्वेष रखते हैं..,
ज़ुबां उनकी भी प्यारी है।
पैसा है तो प्यार है,
वरना मेरे यार हर कोशिश बेकार है,
पास जिसके पैसा है,
लोग उन्हीं से पूछते हैं हाल कैसा है।
वरना मेरे यार हर कोशिश बेकार है,
पास जिसके पैसा है,
लोग उन्हीं से पूछते हैं हाल कैसा है।
ख़ुद को ख़ुद से बेहतर,
कोई नहीं समझ सकता।
कोई नहीं समझ सकता।
थोड़ा जुनून भी ज़रुरी है,
कुछ 'सुकून' के लिए..!
कुछ 'सुकून' के लिए..!
कुछ सुकून के लम्हे,
ता-उम्र दर्द देते हैं..!
ता-उम्र दर्द देते हैं..!
तमाम सुख विमुख हो जाते हैं,
मेहरबां जहाँ दु:ख हो जाते हैं।
मेहरबां जहाँ दु:ख हो जाते हैं।
Maut Aur Zindagi Ki Haqeeqat Shayari
मुक़म्मल मंज़िल तो सभी की यहीं है,
बस 'राह' सभी की एक जैसी नहीं है।
बस 'राह' सभी की एक जैसी नहीं है।
न सीरत अच्छी लगती है, न किसी को सूरत अच्छी लगती है,
यहाँ हर किसी को फ़क़त अपनी, 'ज़रुरत' अच्छी लगती है..!
यहाँ हर किसी को फ़क़त अपनी, 'ज़रुरत' अच्छी लगती है..!
तुम कितना ही करलो अपनों के लिए अपनी ज़िन्दगी से लफड़ा,
आख़िर में तुम्हारे अपने भी 'नापकर' देंगे तुम्हें चार गज कपडा..!
आख़िर में तुम्हारे अपने भी 'नापकर' देंगे तुम्हें चार गज कपडा..!
खिलकर कली से जो बिखर गए फूल, वो फिर दोबारा कहीं नहीं खिला करते,
हँसकर मिला करो हर किसी से, यहाँ के बिछड़े दोबारा कहीं नहीं मिला करते।
हँसकर मिला करो हर किसी से, यहाँ के बिछड़े दोबारा कहीं नहीं मिला करते।
हम-दर्दी की आड़ में, बे-दर्दी से जज़्बातों का मज़ाक उड़ाते हैं लोग,
जिन्हें तुम रो-रोकर सुनाते हो, वही हमें हँस-हँसकर सुनाते हैं लोग।
जिन्हें तुम रो-रोकर सुनाते हो, वही हमें हँस-हँसकर सुनाते हैं लोग।
ज़माने से बग़ावत करके जो हमारा वफ़ादार बन जाता है,
फिर इन्सान तो क्या, कुत्ता भी हमारा 'यार' बन जाता है।
फिर इन्सान तो क्या, कुत्ता भी हमारा 'यार' बन जाता है।
यहाँ हर किसी को, फ़क़त अपनी ही तक़लीफ़ से तक़लीफ़ है,
और बड़े अहतराम से मिलते हैं वो लोग, जिनके चेहरे मुख़्तलिफ़ है।
और बड़े अहतराम से मिलते हैं वो लोग, जिनके चेहरे मुख़्तलिफ़ है।
किसी की मंज़िल, तो फिर किसी की राह बदल जाती है,
इक 'वक़्त' के बाद, हर किसी की चाह बदल जाती है..!!
इक 'वक़्त' के बाद, हर किसी की चाह बदल जाती है..!!
ज़ाहिर न होने देना तुम कभी अपने दिल के ज़ख्मों को,
वरना लोग गले भी मिलेंगे, तो हाथों पर नमक लगाकर।
वरना लोग गले भी मिलेंगे, तो हाथों पर नमक लगाकर।
इन्सान रोता हुआ आता है और रुलाकर चला जाता है,
बस यही छोटा सा सफ़र दोस्तों, 'जीवन' कहलाता है..!
बस यही छोटा सा सफ़र दोस्तों, 'जीवन' कहलाता है..!
- मरुधर राही ✍️










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