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Maa Shayari in Hindi by Marudhar Rahi - MyAlfaaz

माँ पर लिखी गई Marudhar Rahi की ये शायरियाँ सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं, एक पूरा एहसास हैं। ये उन लम्हों की कहानी है जहाँ माँ की ममता, उसका दर्द और उसकी दुआ सब एक साथ मिलते हैं। नमस्कार दोस्तों, मैं मरुधर राही MyAlfaaz पर पेश है दिल को छू लेने वाली Maa Shayari in Hindi by Marudhar Rahi का सबसे बेहतरीन संग्रह, जो हर उस दिल को सुकून देगा जिसने माँ के प्यार को महसूस किया है।

Maa Shayari in Hindi by Marudhar Rahi

अब तो कुछ ऐसे हाल हो चले हैं, शहर और गाँव में,
बैठना ही नहीं चाहता कोई, बूढ़े माँ-बाप की छाँव में,
इक तरफ़ दर्द से तड़पती रहे माँ, तो दूसरी ओर बेटा
बहू से बोले, कांटा भी न लगने दूँ जान तुम्हारे पाँव में।
वैसे तो मैं हर रंज-ओ-ग़म से मालामाल हूँ,
माँ साथ है, फ़क़त इसी बात से ख़ुशहाल हूँ।
ये बालों की सफ़ेदी तो ज़माने के लिए है 'साहिब',
मेरी माँ तो मुझे आज भी 'बच्चा' ही समझती है।
Maa Baap Ki Dua Shayari - Gar lete rahoge waqt par maa baap ki duayen by Marudhar Rahi
ग़र लेते रहोगे वक़्त पर माँ-बाप की दुआएं,
तो बहुत कम खानी पड़ेगी आपको दवाएं।
ख़ुदा उन्हीं के सर पर ख़ुशियों की चादर करता है,
जो अपने माँ-बाप की कदर और आदर करता है।
कितने ही तुम तीर्थ करो, कितने ही करो तुम धाम,
माँ-बाप की सेवा नहीं की, तो सब-कुछ है बेकाम।
कैसे चुकाऊँ माँ, तेरे इस बे-पनाह प्यार का मैं क़र्ज़ा,
ग़र होता मेरे बस में, तो दे देता तुझे भगवान का दर्जा।

Emotional Maa Shayari in Hindi - Mothers Day Shayari

अश्क़ और आँखों की यारी हुआ करती है,
गुलों की ख़ुशबू बड़ी न्यारी हुआ करती है,
ज़माना चाहे कुछ भी कहे ‘मरूधर राही’,
हर किसी को अपनी माँ प्यारी हुआ करती है।
वक़्त के साथ सब-कुछ बदलते देखा है मैंने,
फ़क़त इक माँ की फ़िक्र और प्रेम को छोड़कर।
आँगन में मेरे फिर 'जन्नत' बसती है,
खिलखिलाकर जब मेरी माँ हँसती है।
Maa Ka Pyar Shayari - Shayad yah pahle page par likha hoga us vidhata ke vidhan mein by Marudhar Rahi
शायद यह पहले पेज पर लिखा होगा, उस विधाता के विधान में,
माँ के प्रेम से बढ़कर, दूजा कोई प्रेम न होगा इस सारे जहान में।
दम-ब-दम फ़क़त एक ही डर सताता है ‘मरूधर राही’ को,
माँ के चले जाने पर, कौन करेगा फिर इतना प्यार हमको।
किसी को यहाँ तो किसी को वहाँ, न जाने किस-किस को क्या कहाँ नज़र आता है,
मुझे फ़क़त मेरी माँ के कदमों में जन्नत, और आँचल में मुक़म्मल जहाँ नज़र आता है।
ना दौलत ना शोहरत ना सोहबत, और ना ही किसी की कोई ख़िदमत काम आएगी,
ज़िन्दगी में जब कोई मुश्किल मुक़ाम आएगा, फ़क़त माँ-बाप की नेमत काम आएगी।
- मरुधर राही ✍️

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