ख़ैरात में मिली ख़ुशियाँ हम, हरगिज़ 'गवारा' नहीं करते,
उन्हें कह दो, एक ही मोहब्बत को हम दोबारा नहीं करते।
Khairat mein mili khushiyan hum, hargiz 'gawara' nahin karte,
Unhein kah do, ek hi mohabbat ko hum dobara nahin karte।
- ख़ैरात - भिक्षा, दान, उपकार
- हरगिज़ - कदापि, कभी, कतई या बिल्कुल नहीं
- गवारा - स्वीकार, मानना, क़बूल करना
- Article By. Dharm_Singh

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