ना मंज़िल है ना मुक़ाम है, फ़िर भी मैं चलता ही जा रहा,
ये जीवन महज़ बर्फ़ के समान, जो पिघलता ही जा रहा।
Naa manzil hai naa muqam hai, fir bhi main chalta hi jaa raha,
Yeh jeevan mahaz barf ke saman, jo pighalta hi jaa raha।
- मंज़िल - पड़ाव, मुक़ाम, ठिकाना, विश्राम स्थल, गंतव्य स्थान
- मुक़ाम - ठहरने का स्थान या जगह, ठहराव, घर
- महज़ - केवल, सिर्फ़, मात्र, निरा, निर्मल, खालिस
- Article By. Dharm_Singh

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