इन आँखों में अब ख़्वाब नहीं अश्क़ों के बहते धारे हैं,
ज़िन्दगी की जंग को दुश्मनों से नहीं अपनों से हारे हैं !
In aankhon mein ab khwab nahin ashqon ke bahte dhaare hain,
Zindagi ki jung ko dushmanon se nahin apnon se haare hain !
- ख़्वाब - स्वप्न, सपना, नींद, निद्रावस्था
- अश्क़ - आँसू, अश्रु, नयनवारि
- ज़िन्दगी - जीवन, जीवन-काल, आयु, उम्र, प्राण, सजीवता, जीवंतता
- Article By. Dharm_Singh

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