जीस्त-ए-दश्तो-गरेबाँ सुलझ ही जाएगी,
बशर्ते सफ़र-ए-मुसाफ़िर मुक़म्मल हो जाये।
Jeest-e-dashto-garebaan sulajh hi jaayegi,
Basharte safar-e-musafir mukammal ho jaaye।
- जीस्त - ज़िन्दगी, जीवन, हयात, जीवनयापन
- दश्तो-गरेबाँ - उलझी हुई
- बशर्ते - शर्त यह है
- सफ़र-ए-मुसाफ़िर - मुसाफ़िर का सफ़र
- मुक़म्मल - संपूर्ण, समाप्त, पूरा
- Article By. Dharm_Singh

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