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Takleef shayari...

Takleef_shayari


यहाँ हर किसी को, फ़क़त अपनी ही तक़लीफ़ से तक़लीफ़ है,
और बड़े अहतराम से मिलते हैं वो लोग, जिनके चेहरे मुख़्तलिफ़ है।

Yahan har kisi ko, faqat apni hi taqleef se taqleef hai,
Aur bade ahtram se milte hain woh log, jinke chehre mukhtlif hai



  • फ़क़त - केवल, सिर्फ़, बस, बस इतना
  • तक़लीफ़ - दुःख, दर्द, कष्ट, पीड़ा, विपत्ति, संकट
  • अहतराम - आदर, सम्मान, इज्ज़त
  • मुख़्तलिफ़ - भिन्न, पृथक, अनेक प्रकार का, विभिन्न

  • Article By. Dharm_Singh

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