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Hayat shayari...

Hayat_shayari


अब ना आऊँगा मैं लौटकर फ़िर से तेरी हयात में..,
देखी है मैंने मक्कारी और ग़द्दारी बेवफ़ा तेरी जात में।

Ab naa aaunga main lautkar fir se teri hayat mein..,
Dekhi hai maine makkari aur gaddari bewafa teri jaat mein



  • हयात - ज़िन्दगी, जीवन, जान, आत्मा, रूह
  • मक्कारी - धोकेबाज़ी, छल से भरा कार्य, चालाकी
  • ग़द्दारी - विश्वासघाती, नमकहरामी, कृतघ्नता, विद्रोही
  • जात - कुटुम्ब, कुल, वर्ग, समूह, जाति, बिरादरी, कौम

  • Article By. Dharm_Singh

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