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Khuddar shayari...

Khuddar_shayari


मंज़ूर है मुझें ख़ुद्दारी की सूखी खाना भाकरी,
पर हरगिज़ नहीं करूँगा दौलतमंदों की चाकरी।

Manzoor hai mujhen khuddari ki sookhi khaana bhaakri,
Par hargiz nahin karunga daulatmandon ki chaakri



  • मंज़ूर - स्वीकृत, स्वीकार, पसंद, जो मान लिया गया हो,
  • ख़ुद्दारी - स्वाभिमान, आत्मसम्मान, आत्मगौरव, अपनी प्रतिष्ठा और मर्यादा का ध्यान रखनेवाला
  • भाकरी - रोटी, नान, जवार की रोटी
  • हरगिज़ - कदापि, कभी, कभी नहीं, कत्तई, किसी दशा में, किसी हालात में
  • दौलतमंद - धनवान, धनी, संपन्न, अमीर, रईस, समृद्ध, मालदार

  • Article By. Dharm_Singh

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