साक़ी इन्तिहा ना पूछ तू मेरे दर्द-ए-दिल की, क्या क़यामत दिल पे गुज़र रही है,
रिश्ते में हमारे जिन्होंने ज़हर घोला, वो बेवफ़ा उन्हीं की ज़िन्दगी में रंग भर रही है।
Saaqee intiha naa poochh too mere dard-e-dil ki, kya qayamat dil pe guzar rahi hai,
Rishte mein humare jinhone zahar ghola, woh bewafa unhin ki zindagi mein rang bhar rahi hai।
- साक़ी - शराब पिलाने वाला व्यक्ति, शराब पिलाने वाली प्रेमिका
- इन्तिहा - सीमा, पराकाष्ठा, उत्थान, अंजाम, चरम सीमा, अत्यधिक
- दर्द-ए-दिल - दिल के दर्द, दिल का दर्द
- क़यामत - आफ़त, प्रलय, प्रलय का दिन
- Article By. Dharm_Singh

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