किन 'लफ़्ज़ों' में समझाए अब हम यार, ये उस संगदिल को,
कोई रास ही नहीं आता उसके सिवा, कमबख़्त इस दिल को।
Kin 'lafzon' mein samjhaye ab hum yaar, yeh us sangdil ko,
Koi raas hi nahin aata uske siwa, kambakht is dil ko।
- लफ़्ज़ - शब्द, बोल, बात
- संगदिल - पत्थर दिल, निर्दयी, कठोर हृदय वाला
- रास - पसंद, स्वीकार
- Article By. Dharm_Singh

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