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jakhmi dil shayari...

jakhmi_dil_shayari


बुझा दो इन चरागों को, उजालों से अब मुझकों डर लगता है,
मुझकों मेरा दिल, महज़ इक ग़म का मुक़म्मल घर लगता है।

Bujha do in charagon ko, ujalon se ab mujhkon dar lagta hai,
Mujhkon mera dil, mahaz ik gum kaa mukammal ghar lagta hai



  • चिराग़ - दीपक, दिया, मोमबत्ती, लैम्प, लालटेन, चिमनी, बल्ब
  • महज़ - केवल, सिर्फ़, मात्र, निरा
  • ग़म - गहरा दुःख, रंज, शोक, मातम, मुसीबत, परेशानी, कष्ट, क्लेश
  • मुक़म्मल - सम्पूर्ण, समस्त, सारा, सब, समाप्त, आख़िरी

  • Article By. Dharm_Singh

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