ऐ मेरे दिल-ए-नादाँ, ना यूँ आह भर ना राह तक,
उसने फ़क़त राह ही नहीं, मंज़िल भी बदल ली है।
Aye mere dil-e-nadan, naa yun aah bhar naa raah tak,
Usne faqat raah hi nahin, manzil bhi badal lee hai।
- दिल-ए-नादाँ - नादान दिल, भोला दिल, मासूम दिल
- आह - पीड़ा में गहरी साँस लेने या कराहने का ध्वनि
- राह - रास्ता, मार्ग, पथ
- फ़क़त - केवल, सिर्फ़, बस इतना
- मंज़िल - मुकाम, पड़ाव, गंतव्य स्थान, ठहराव, ठिकाना
- Article By. Dharm_Singh

1 टिप्पणियाँ
अभी न जाने कितने हादसों से अनजान हूँ मैं,
जवाब देंहटाएंअपने हालातों के चलते बहुत परेशान हूँ मैं
हाँ, वक़्त ही कुछ ऐसा है कि ख़ामोश हूँ मैं,
मुस्कुराता तो हूँ मगर अंदर से बेजान हूँ मैं
अब कुछ इस तरह दिल देता है गवाही मेरी,
जैसे बस कुछ दिनों का मेहमान हूँ मैं
हर रोज़ टूटकर भी ख़ुद को समेट लेता हूँ,
क्योंकि अपनों के लिए अभी भी ज़िम्मेदार हूँ मैं
ज़िंदगी ने हर मोड़ पर इम्तिहान ही दिए,
इसलिए हर खुशी से थोड़ा अनजान हूँ मैं
दर्द इतना है कि अब आँसू भी साथ नहीं देते,
बस ख़ामोशी ओढ़े हुए एक इंसान हूँ मैं...✍️✍️