आख़िर कितना मातम करूं बेवफ़ा तेरी बेवफ़ाई का..,
कि ये जीस्त-ओ-जां भी मुझसे तेरी तरहा तौबा करले।
Aakhir kitna maatam karoon bewafa teri bewafai kaa..,
ki yeh jeest-o-jaan bhi mujhse teri tarha tauba karle।
- मातम - शोक, रंज, ग़म, रोना पीटना
- जीस्त-ओ-जां - ज़िन्दगी और जान
- तौबा - रुक जाना, छोड़ देना या त्यागना
- Article By. Dharm_Singh

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