अच्छे बुरे हर वक़्त के अफ़साने याद हैं हमें,
लोगों के तमाम सहारे और ताने याद हैं हमें,
अक्सर जिसमें मापा करते हैं लोग 'हैसियत',
अमीरी ग़रीबी के वो सारे पैमाने याद हैं हमें।
Achchhe bure har waqt ke afsaane yaad hain humein,
Logon ke tamam sahare aur taane yaad hain humein,
Aksar jismein maapa karte hain log 'haisiyat',
Amiri garibi ke woh saare paimane yaad hain humein।
- सार -
- अच्छे और बुरे दोनों वक्त हमने देखे हैं।
- लोगों ने अच्छे वक्त में साथ दिया और बुरे वक्त में ताने मारे।
- लोग किसी की इज्जत सिर्फ पैसों से यानी 'हैसियत' से नापते हैं।
- ये अमीर-गरीब का फर्क करने वाले सारे पैमाने हमें अच्छे से याद हैं।
- Article By. Dharm_Singh

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